CBSE बोर्ड की कॉपियों में परछाई और मुड़े हुए पेज देख भड़के छात्र, बोले- स्कैनर नहीं मोबाइल से खींची है फोटो?
CBSE 12th Evaluation: सीबीएसई बोर्ड से छात्र सवाल पूछ रहे हैं—क्या आपने सच में कॉपियां जांचने के लिए प्रोफेशनल स्कैनर्स का इस्तेमाल किया था या किसी मोबाइल ऐप से फोटो खींचकर काम चला लिया?

CBSE 12th Answer Sheets Evaluation: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) इन दिनों अपनी कक्षा 10वीं और 12वीं की उत्तर पुस्तिकाओं के डिजिटल मूल्यांकन (OSM) को लेकर चौतरफा विवादों और आलोचनाओं से घिर गया है। हाल ही में घोषित हुए नतीजों के बाद, जब असंतुष्ट छात्रों ने पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया के तहत अपनी मूल्यांकित उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन की गई डिजिटल कॉपी डाउनलोड कीं, तो उनके होश उड़ गए।
छात्रों ने सोशल मीडिया पर उत्तर पुस्तिकाओं में कई गंभीर और अजीबोगरीब तकनीकी खामियों को उजागर किया है। इसके बाद इंटरनेट पर सीबीएसई की कार्यप्रणाली को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है और छात्र बोर्ड से सवाल पूछ रहे हैं—"क्या आपने सच में कॉपियां जांचने के लिए प्रोफेशनल स्कैनर्स का इस्तेमाल किया था या किसी मोबाइल ऐप से फोटो खींचकर काम चला लिया?"
सोशल मीडिया पर खुला गड़बड़ियों का पिटारा: परछाईं और मुड़े पन्ने
अनेक प्रभावित छात्रों ने 'एक्स' (पहले ट्विटर) और रेडिट (Reddit) जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपनी आंसर-शीट्स के स्क्रीनशॉट साझा किए हैं। छात्रों द्वारा उठाए गए मुख्य मुद्दे इस प्रकार हैं:
अजीब परछाई और धुंधलापन: कई उत्तर पुस्तिकाओं के पन्नों पर किसी व्यक्ति के हाथ या मोबाइल फोन की साफ परछाई दिखाई दे रही है, जिससे लिखावट पूरी तरह धुंधली हो गई है। छात्रों का तर्क है कि यदि बोर्ड ने हाई-एंड डिजिटल स्कैनर्स का उपयोग किया होता, तो ऐसी परछाइयां आना नामुमकिन था।
पेज की सिलवटें और कटे हुए शब्द: कुछ कॉपी में पन्ने मुड़े हुए दिखाई दे रहे हैं, जिसके कारण छात्रों द्वारा लिखे गए महत्वपूर्ण शब्द और फॉर्मूले छिप गए हैं। शिक्षकों ने इन मुड़े हुए और कटे हुए हिस्सों पर बिना पढ़े ही 'शून्य-0' अंक या क्रॉस मार्क लगा दिया है।
अंकों की गणना में भारी भूल: एक छात्र ने स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए दिखाया कि कैसे एक सही उत्तर पर परीक्षक ने टिक मार्क लगाकर '4 अंक' लिखे थे, लेकिन जब पेज के अंत में कुल योग टोटलिंग किया गया, तो वहां केवल '1 अंक' लिखा गया।
छात्रों का फूटा गुस्सा: "यह हमारे भविष्य का सवाल है"
सोशल मीडिया पर एक यूजर ने लिखा, "सीबीएसई कॉपियों की इन स्कैन कॉपियों को देखकर ऐसा लगता है जैसे किसी टीचर ने जल्दबाजी में अपने पर्सनल फोन के कैमरे से, बिना उचित रोशनी के तस्वीरें खींची हैं। क्या देश के सबसे बड़े बोर्ड के पास एक अच्छा स्कैनर तक नहीं है?"
वहीं, अभिभावकों का कहना है कि वे प्रति विषय ₹500 से ₹700 की भारी-भरकम फीस देकर अपनी कॉपियों की फोटोकॉपी मंगवाते हैं। इतनी मोटी रकम वसूलने के बाद भी बोर्ड द्वारा ऐसी घटिया और त्रुटिपूर्ण डिजिटल प्रतियां उपलब्ध कराना छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और उनके करियर के साथ खिलवाड़ है। कई मेधावी छात्रों के मार्क्स इन तकनीकी खामियों के कारण कम हो गए हैं, जिससे उन्हें अच्छे कॉलेजों में दाखिला मिलने में परेशानी हो रही है।




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