CBSE 12th Result 2026: Students Who Cleared JEE Main Claim They Failed Class 12 Boards, blames OMS system JEE Main में हाई परसेंटाइल, लेकिन CBSE 12वीं में कम नंबर! क्या 'ऑन स्क्रीन मार्किंग' है वजह, CBSE का क्या है जवाब, Career Hindi News - Hindustan
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JEE Main में हाई परसेंटाइल, लेकिन CBSE 12वीं में कम नंबर! क्या 'ऑन स्क्रीन मार्किंग' है वजह, CBSE का क्या है जवाब

CBSE Digital Evaluation issues 2026: देश की सबसे कठिन इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा 'जेईई मेन' (JEE Main 2026) को अच्छे अंकों से पास करने वाले छात्र सीबीएसई बोर्ड की 12वीं परीक्षा में फेल हो गए हैं या उन्हें उम्मीद से बेहद कम नंबर मिले हैं।

Mon, 18 May 2026 10:57 AMPrachi लाइव हिन्दुस्तान
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JEE Main में हाई परसेंटाइल, लेकिन CBSE 12वीं में कम नंबर! क्या 'ऑन स्क्रीन मार्किंग' है वजह, CBSE का क्या है जवाब

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के कक्षा 12वीं के नतीजे घोषित होने के बाद देश भर में एक नया और अनोखा विवाद खड़ा हो गया है। इस साल कई ऐसे चौंकाने वाले मामले सामने आए हैं जहां देश की सबसे कठिन इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा 'जेईई मेन' (JEE Main 2026) को अच्छे अंकों से पास करने वाले छात्र सीबीएसई बोर्ड की 12वीं परीक्षा में फेल हो गए हैं या उन्हें उम्मीद से बेहद कम नंबर मिले हैं। इस अजीबोगरीब स्थिति के बाद छात्रों और अभिभावकों ने सीबीएसई द्वारा इस साल लागू किए गए नए डिजिटल मूल्यांकन सिस्टम यानी 'ऑन-स्क्रीन मार्किंग' (OSM) को इसका मुख्य जिम्मेदार ठहराया है।

नाराज छात्रों और अभिभावकों का आरोप है कि डिजिटल कॉपियों के मूल्यांकन के दौरान तकनीकी खामियों, सॉफ्टवेयर ग्लिच और एग्जामिनर की लापरवाही के कारण बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हुआ है। कई छात्रों का दावा है कि उनके मुख्य विषयों (जैसे फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स) में सिंगल डिजिट (जैसे 2 या 5 नंबर) आए हैं, जबकि जेईई मेन जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में उनका स्कोर 90 से 98 परसेंटाइल के बीच है।

क्या है पूरा विवाद और छात्रों के दावे?

सोशल मीडिया और मीडिया रिपोर्ट्स में छात्रों ने अपने एडमिट कार्ड और रिजल्ट शेयर करते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। एक छात्र ने बताया कि उसने जेईई मेन में बेहतरीन रैंक हासिल की है और वह जेईई एडवांस की तैयारी कर रहा था, लेकिन सीबीएसई के रिजल्ट में उसे फिजिक्स में फेल कर दिया गया है।

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छात्रों और शिक्षक संघों का कहना है कि ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम के तहत शिक्षकों को कंप्यूटर या टैबलेट स्क्रीन पर कॉपियां जांचनी होती हैं। कई बार सॉफ्टवेयर में कॉपियों के पन्ने पूरी तरह लोड नहीं होते या तेजी से स्क्रॉल करने के चक्कर में परीक्षक कई प्रश्नों के उत्तर देखना ही भूल जाते हैं। इसके कारण स्टेप मार्किंग का लाभ छात्रों को नहीं मिल पाया। अभिभावकों ने सवाल उठाया है कि जो बच्चा देश के सबसे कठिन ऑब्जेक्टिव और कॉन्सेप्चुअल पेपर (JEE) को क्रैक कर सकता है, वह बोर्ड के थ्योरी पेपर में पासिंग मार्क्स भी नहीं ला पाए, यह प्रैक्टिकली रूप से असंभव है।

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सीबीएसई ने दिया स्पष्टीकरण: 'सिस्टम पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी'

चारों तरफ से घिरने और छात्रों के बढ़ते विरोध प्रदर्शन के बाद सीबीएसई बोर्ड ने इस पूरे मामले पर अपनी चुप्पी तोड़ी है। बोर्ड के एक वरिष्ठ प्रवक्ता ने कॉपियों की जांच प्रक्रिया का बचाव करते हुए कहा कि 'ऑन-स्क्रीन मार्किंग' (OSM) प्रणाली पूरी तरह से पारदर्शी, बिना किसी गलती और सुरक्षित है।

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बोर्ड के अनुसार डिजिटल मूल्यांकन से अंकों को जोड़ने (टोटलिंग) की गलतियां 100% खत्म हो गई हैं क्योंकि कंप्यूटर खुद अंकों का योग करता है। यदि किसी छात्र को लगता है कि उसके साथ अन्याय हुआ है, तो उसे घबराने की जरूरत नहीं है। बोर्ड की तरफ से 'पोस्ट-रिजल्ट वेरिफिकेशन' की विंडो खोली गई है। छात्र मात्र ₹100 की संशोधित फीस देकर अपनी उत्तर पुस्तिका की स्कैन की गई डिजिटल कॉपी मंगा सकते हैं और किसी भी प्रश्न के मूल्यांकन को चुनौती दे सकते हैं। यदि नंबर बढ़ते हैं, तो पूरी फीस रिफंड कर दी जाएगी। बोर्ड ने छात्रों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर अफवाहों पर ध्यान न दें और आधिकारिक री-चेकिंग प्रक्रिया का सहारा लें।

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