CBSE 12th Result 2026 नहीं रहा ‘Coming Soon’, आपकी मार्कशीट में A1 या E2? यहां समझिए पूरा सिस्टम
CBSE 12th Result 2026 जारी हो चुका है। कई दिनों की अटकलों के बाद आखिरकार आज सीबीएससी नें 12वीं के नतीजे घोषित कर दिए हैं। आइए जानते हैं रिजल्ट पर लिखो A1 से E2 तक का पूरा ग्रेडिंग सिस्टम।

आखिरकार लाखों छात्रों का इंतजार खत्म हो गया और CBSE 12th Result 2026 जारी कर दिया गया। कई दिनों के लंबे इंतजार और चल रही अटकलों पर विराम लगाते हुए सीबीएससी ने आज यानी 13 मई को नतीजे घोषित कर दिए। इस बार कुल 85.20 प्रतिशत छात्र पास हैं। रिजल्ट आते ही सोशल मीडिया से लेकर स्कूलों तक हर जगह सिर्फ नंबरों और प्रतिशत की चर्चा शुरू हो गई। लेकिन इस बार कई छात्र अपनी मार्कशीट में दिख रहे A1, B2, C1 जैसे ग्रेड को लेकर भी उलझन में नजर आए। बहुत से छात्रों को समझ नहीं आ रहा कि आखिर इन ग्रेड्स का मतलब क्या है और कितने नंबर पर कौन-सा ग्रेड मिलता है।
सिर्फ नंबर नहीं, ग्रेड भी बताते हैं असली प्रदर्शन
सीबीएसई का ग्रेडिंग सिस्टम इस तरह बनाया गया है ताकि छात्रों की परफॉर्मेंस को सिर्फ प्रतिशत से नहीं बल्कि ओवरऑल कैटेगरी में भी समझा जा सके। बोर्ड हर विषय के नंबर के आधार पर अलग-अलग ग्रेड देता है। यही ग्रेड बाद में कॉलेज दाखिले और कई प्रतियोगी परीक्षाओं में भी काम आते हैं।
91 से 100 नंबर वालों को मिलता है A1 ग्रेड
अगर किसी छात्र ने किसी विषय में 91 से 100 अंक हासिल किए हैं तो उसे A1 ग्रेड दिया जाता है। इसे आउटस्टैंडिंग कैटिगरी माना जाता है। यानी छात्र ने उस विषय में बेहतरीन प्रदर्शन किया है। 81 से 90 अंक पाने वाले छात्रों को A2 ग्रेड मिलता है, जिसे एक्सिलेंट कैटेगरी कहा जाता है। वहीं 71 से 80 अंक वाले छात्रों को B1 यानी वेरी गुड ग्रेड दिया जाता है।
61 से 70 नंबर वालों को मिलता है B2 ग्रेड
सीबीएसई के ग्रेडिंग सिस्टम में 61 से 70 अंक पाने वाले छात्रों को B2 ग्रेड मिलता है। इसे गुड कैटेगरी माना जाता है। इसके बाद 51 से 60 अंक पाने वालों को C1 यानी एबव एवरेज और 41 से 50 अंक वालों को C2 यानी एवरेज ग्रेड दिया जाता है।
पास होने के लिए कितने नंबर जरूरी?
जो छात्र 33 से 40 अंक हासिल करते हैं उन्हें D ग्रेड दिया जाता है। यही पैसिंग कैटेगरी मानी जाती है। यानी किसी भी विषय में पास होने के लिए कम से कम 33 अंक जरूरी हैं। अगर कोई छात्र 33 से कम अंक हासिल करता है तो उसे E1 या E2 ग्रेड दिया जाता है। इसका मतलब होता है कि छात्र उस विषय में पास नहीं हो पाया है और उसे कंपार्टमेंट या दोबारा परीक्षा देनी पड़ सकती है।
हर विषय के लिए अलग-अलग लागू होता है ग्रेडिंग सिस्टम
सीबीएसई का यह ग्रेडिंग सिस्टम पूरी मार्कशीट पर एक साथ लागू नहीं होता, बल्कि हर विषय के लिए अलग-अलग तय किया जाता है। यानी किसी छात्र को मैथ्स में A1 और इंग्लिश में B2 ग्रेड मिल सकता है। यही वजह है कि छात्रों को सिर्फ ओवरऑल पर्सेंटेज नहीं बल्कि विषयवार परफॉर्मेंस भी ध्यान से देखनी चाहिए।
छात्रों के लिए क्यों अहम है ग्रेडिंग सिस्टम ?
आज के समय में सिर्फ प्रतिशत ही नहीं बल्कि ग्रेडिंग पैटर्न भी काफी मायने रखता है। कई यूनिवर्सिटी और स्कॉलरशिप प्रोग्राम विषयवार ग्रेडिंग को भी महत्व देते हैं। ऐसे में छात्रों के लिए यह समझना जरूरी है कि उनकी मार्कशीट में लिखा हर ग्रेड आखिर क्या संकेत देता है।




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