CBSE Board Exam 2026: CBSE 12वीं की 1 करोड़ कॉपियां कंप्यूटर स्क्रीन पर होंगी चेक, 7 चरणों में पूरी होगी प्रक्रिया
CBSE Board Exam 2026: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने घोषणा की है कि कक्षा 12वीं की लगभग 1 करोड़ आंसर-शीट की चेकिंग अब पेन-पेपर के बजाय ‘ऑनस्क्रीन’ के जरिए की जाएगी।

CBSE Board Exam 2026: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने बोर्ड परीक्षाओं के मूल्यांकन (इवैल्यूएशन) की प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी, सटीक और आधुनिक बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। बोर्ड ने घोषणा की है कि कक्षा 12वीं की लगभग 1 करोड़ आंसर-शीट की चेकिंग अब पेन-पेपर के बजाय ‘ऑनस्क्रीन’ के जरिए की जाएगी।
इस नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य मानवीय गलतियों को शून्य करना और रिजल्ट जारी करने की प्रक्रिया में तेजी लाना है। बोर्ड के अनुसार, यह पूरी प्रक्रिया 7 महत्वपूर्ण चरणों में संपन्न होगी, जिससे मूल्यांकन की गुणवत्ता और गोपनीयता दोनों सुनिश्चित की जा सकेगी।
क्या है ऑनस्क्रीन मूल्यांकन और क्यों लिया गया यह फैसला?
अब तक शिक्षक कॉपियों को फिजिकल रूप से चेक करते थे और अंकों को मैन्युअल रूप से जोड़ते थे। इस पुरानी तरीके में अक्सर अंकों की गणना (टोटलिंग) में गलती होने या किसी प्रश्न के छूट जाने की संभावना बनी रहती थी।
ऑनस्क्रीन इवैल्यूएशन सिस्टम के तहत, सभी 1 करोड़ आंसर-शीट कॉपी को पहले हाई-स्पीड स्कैनर्स के जरिए डिजिटल प्रारूप में बदला जाएगा। इसके बाद, शिक्षक कंप्यूटर स्क्रीन पर इन कॉपियों को देखेंगे और सॉफ्टवेयर की मदद से अंक देंगे। यह सॉफ्टवेयर स्वचालित रूप से अंकों को जोड़ देगा, जिससे मार्क्स टोटलिंग की गलतियां पूरी तरह खत्म हो जाएंगी।
7 चरणों में पूरी होगी चेकिंग प्रक्रिया
CBSE ने इस मुश्किल कार्य को सुव्यवस्थित करने के लिए 7 चरणों का एक खाका तैयार किया है:
कॉपियों का संग्रहण (कलेक्शन): सभी परीक्षा केंद्रों से आंसर-शीट कॉपी क्षेत्रीय केंद्रों पर एकत्र की जाएंगी।
डिजिटलीकरण (स्कैनिंग): प्रत्येक कॉपी को स्कैन करके एक सुरक्षित क्लाउड सर्वर पर अपलोड किया जाएगा।
कोडिंग (मास्किंग): छात्र की पहचान गुप्त रखने के लिए बारकोड का उपयोग किया जाएगा, ताकि शिक्षक को यह पता न चले कि वह किसकी कॉपी जांच रहा है।
मूल्यांकनकर्ता का आवंटन: सॉफ्टवेयर स्वचालित रूप से संबंधित विषय के अनुभवी शिक्षकों को कॉपियां आवंटित करेगा।
डिजिटल मार्किंग: शिक्षक स्क्रीन पर उत्तरों को पढ़ेंगे और आवंटित अंकों को सॉफ्टवेयर में दर्ज करेंगे।
क्वालिटी चेक: वरिष्ठ शिक्षक रैंडम तरीके से जांची गई कॉपियों की दोबारा समीक्षा करेंगे।
अंतिम डेटा प्रोसेसिंग: सभी अंक सीधे बोर्ड के मुख्य सर्वर पर सिंक हो जाएंगे, जिससे रिजल्ट बनाने में समय की बचत होगी।
छात्रों और शिक्षकों को क्या होगा लाभ?
गलती की गुंजाइश खत्म: सॉफ्टवेयर यह सुनिश्चित करेगा कि हर प्रश्न की जांच हुई है। यदि कोई पन्ना छूट जाता है, तो सिस्टम शिक्षक को चेतावनी देगा।
तेजी से परिणाम: कॉपियों को एक स्थान से दूसरे स्थान भेजने में लगने वाला समय बचेगा, जिससे परिणाम समय से पहले जारी किए जा सकेंगे।
री-चेकिंग में कमी: मार्क्स टोटलिंग सॉफ्टवेयर द्वारा की जाएगी, इसलिए 'टोटलिंग' में गड़बड़ी की शिकायतों में भारी कमी आने की उम्मीद है।




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