क्या 2030 तक भारत के IT इंडस्ट्री को खत्म कर देगा AI? इस पर TCS के CEO ने ये दिया जवाब
ऐसा कहा जा रहा है कि 2030 तक आईटी सर्विसेज इंडस्ट्री खत्म हो सकती है। इस पर टीसीएस के सीईओ के कृतिवासन का कहना है कि AI खतरा नहीं, बल्कि एक बड़ा अवसर बनकर उभर रहा है।
भारतीय आईटी इंडस्ट्री को लेकर अक्सर यह कहा जाता रहा है कि हर दशक में इसका अंत नजदीक है, लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। AI के चलते यह चर्चा तो और आम हो गई है। टीसीएस के सीईओ के कृतिवासन का कहना है कि भारतीय आईटी सेक्टर अपनी मजबूती और स्किल के दम पर हर चुनौती से उभरकर सामने आई हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस सेक्टर की ताकत केवल कम लागत नहीं, बल्कि उच्च स्तर की विशेषज्ञता और गहरे स्किल सेट हैं।
2030 तक खत्म होने की बातें बेबुनियाद
द इकोनॉमिक टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि हाल के समय में यह दावा किया जा रहा था कि 2030 तक आईटी सर्विसेज इंडस्ट्री खत्म हो सकती है। इसके उलट कंपनियों को AI का पूरा फायदा उठाने के लिए टीसीएस जैसी कंपनियों की जरूरत और ज्यादा बढ़ेगी। यानी AI खतरा नहीं, बल्कि एक बड़ा अवसर बनकर उभर रहा है।
AI क्यों है आईटी कंपनियों के लिए बड़ा अवसर
टीसीएस की चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर आरती सुब्रमणियन ने बताया कि AI टेक्नोलॉजी तेजी से आगे बढ़ रही है, लेकिन कंपनियों में इसका उपयोग अभी उतनी तेजी से नहीं हो पा रहा। यही अंतर आईटी कंपनियों के लिए बड़ा अवसर बन रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि क्लाउड जैसे एडवांस AI टूल्स पारंपरिक आईटी सर्विसेज को चुनौती जरूर दे सकते हैं, लेकिन टीसीएस इन्हें नए मौके के रूप में देखता है।
आरती सुब्रमणियन के मुताबिक, कंपनियों के पास AI के जरिए अपने पुराने सिस्टम और टेक्नोलॉजी डेब्ट को कम करने का अनोखा मौका है। इससे न केवल ऑपरेशन बेहतर होंगे बल्कि बिजनेस की गति भी तेज होगी।
ग्लोबल अनिश्चितताओं के बीच भी मजबूत भरोसा
टीसीएस का नेतृत्व आने वाले वित्त वर्ष 2027 को लेकर काफी आशावादी है। ग्लोबल पर जियो-पॉलिटिकल टेंशन, खासकर पश्चिम एशिया की स्थिति के बावजूद कंपनी को अपने प्रदर्शन पर भरोसा है। कंपनी का मानना है कि आने वाले समय में ग्रोथ के नए अवसर सामने आएंगे।
रेवेन्यू में गिरावट, लेकिन उम्मीद बरकरार
हालांकि हाल ही में कंपनी के वार्षिक राजस्व में 2.4% की गिरावट दर्ज की गई है, जो 2004 में लिस्टिंग के बाद पहली बार हुआ है। पिछले तीन सालों से टेक खर्च में कमी और वैश्विक अनिश्चितताओं का असर आईटी सेक्टर पर पड़ा है। इसके चलते कंपनियां कम लागत में ज्यादा काम की मांग कर रही हैं, जिससे रेवेन्यू पर दबाव बढ़ा है।
गिरावट के बाद फिर दिखा ग्रोथ का ट्रेंड
दूसरी ओर कृतिवासन ने कहा कि गिरावट मुख्य रूप से एक बड़े ट्रांसफॉर्मेशन प्रोजेक्ट के खत्म होने के कारण आई थी। इसके बाद कंपनी ने लगातार तीन तिमाहियों में ग्रोथ दर्ज की है। इससे साफ है कि कंपनी अब फिर से मजबूती की राह पर लौट रही है।
रिकॉर्ड डील्स और मजबूत ऑर्डर बुक
टीसीएस ने हाल ही में अपने इतिहास का सबसे बड़ा टोटल कॉन्ट्रैक्ट वैल्यू (TCV) हासिल किया है। कंपनी ने मार्च तिमाही में तीन बड़े सौदे और पूरे साल में पांच बड़े डील्स किए। वित्त वर्ष 2026 में कंपनी का TCV 40.7 अरब डॉलर रहा, जबकि चौथी तिमाही में यह 12 अरब डॉलर रहा। यह आंकड़े बताते हैं कि कंपनी की ऑर्डर बुक मजबूत बनी हुई है।
ग्राहकों का भरोसा बढ़ा, निवेश में तेजी: कंपनी के अनुसार अब ग्राहक अपने प्रोजेक्ट्स में निवेश को लेकर ज्यादा आत्मविश्वास दिखा रहे हैं। निर्णय लेने की प्रक्रिया भी तेज हो रही है, जिससे आने वाले समय में आईटी सेक्टर में तेजी देखने को मिल सकती है।




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