Why india tax cut on petrol diesel only to option left Govt explain this decision Petrol Diesel Price: किस वजह से पेट्रोल-डीजल पर हुई टैक्स कटौती? सरकार के पास बचे थे बस दो विकल्प, आया मंत्री का बयान, Business Hindi News - Hindustan
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Petrol Diesel Price: किस वजह से पेट्रोल-डीजल पर हुई टैक्स कटौती? सरकार के पास बचे थे बस दो विकल्प, आया मंत्री का बयान

Petrol Diesel Price: सरकार ने शुक्रवार को बड़ा फैसला किया। केंद्र सरकार की तरफ से पेट्रोल और डीजल पर लगने वाले स्पेशल एक्साइट ड्यूटी को घटाने की फैसला किया है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार के पास दो ही विकल्प बचे थे। 

Fri, 27 March 2026 11:47 AMTarun Pratap Singh हिन्दुस्तान टाइम्स
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Petrol Diesel Price: किस वजह से पेट्रोल-डीजल पर हुई टैक्स कटौती? सरकार के पास बचे थे बस दो विकल्प, आया मंत्री का बयान

Petrol Diesel Price: भारत सरकार ने आज पेट्रोल और डीजल पर लगने वाले एक्साइज टैक्स में कटौती की है। सरकार ने पेट्रोल पर स्पेशल एक्साइज ड्यूटी 13 रुपये प्रति लीटर से घटाकर तीन रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है जबकि डीजल पर यह शुल्क पहले के 10 रुपये से घटाकर शून्य कर दिया गया है। युद्ध की वजह से जारी तनाव के बीच सरकार ने यह फैसला क्यों लिया है? केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इस फैसले को विस्तार से समझाया। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार के पास सिर्फ दो ही विकल्प मौजूदा परिस्थितियों में बचे थे।

मंत्री ने कहा कि या तेल की कीमतों में इजाफा किया जाए या फिर वित्तीय बोझ को सरकार अपने कंधों पर ले जिससे नागरिकों को बढ़ते कच्चे तेल की कीमतों से बचाया जा सके। इसी वजह से सरकार ने टैक्स में कटौती की है।

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क्या कुछ है हरदीप सिंह पुरी ने

केंद्रीय मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “इंटरनेशनल क्रूड ऑयल का रेट पिछले एक महीने में सातवें आसमान पर पहुंच चुका है। कच्चे तेल की कीमतें 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 122 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया है। जिसकी वजह से दुनिया भर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में इजाफा किया गया है। दक्षिण एशिया के देशों में पेट्रोल औ्र डीजल की कीमतों में 30 से 50 प्रतिशत का इजाफा किया गया है। नॉर्थ अमेरिका के देशों में तेल की कीमतों में 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। यूरोन ने 20 प्रतिशत और अफ्रीका के देशों ने 50 प्रतिशत तक दाम बढ़ाया है। मोदी सरकार के पास भी दो ही विकल्प बचे थे। जैसा अन्य देशों ने किया वैसे घरेलू स्तर पर कीमतों में इजाफआ किया जाता। या फिर वित्तीय बोझ को अपने कंधों पर लिया जाए। जिससे नागरिकों को इस इंटरनेशनल दबाव से बचाया जा सके।”

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तेल कंपनियों को हो रहा है घाटा

हरदीप सिंह पुरी लिखते हैं कि प्रधानमंत्री ने जी एक बार फिर से नागरिकों के हितों की सुरक्षा के लिए वित्तीय बोझ को उठाने का फैसला किया है। पुरी ने कहा कि कच्चे तेल की कीमतों में हो रही बढ़ोतरी की वजह से तेल कंपनियों को घाटा हो रहा था। बता दें, क्रू़ड ऑयल का दाम बढ़ने की वजह से पेट्रोल पर लगभग 24 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 30 प्रति लीटर का घाटा तेल कंपनियों को हो रहा था।

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एक्सपोर्ट पर लगाया गया टैक्स

सरकार ने इसके अलावा एक्सपोर्ट टैक्स लगाया है। कोई भी भारतीय रिफाइनरी विदेशों में तेल एक्सपोर्ट करती है उसे तब की स्थिति में सरकार को टैक्स देना पड़ेगा।

इससे पहले केंद्रीय वित्त मंत्री ने बताया था कि सरकार ने डीजल के एक्सपोर्ट पर 21.50 रुपये प्रति लीटर और एटीएफ पर 29.50 प्रति लीटर का टैक्स लगाया है। बता दें, सरकार का यह फैसला तत्काल प्रभाव से लागू है।

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