Tata trusts row mehli mistry seeks probe over appointment of non parsis venu srinivasan resign टाटा ट्रस्ट्स में छिड़ी गैर-पारसी की बहस, सवालों के बीच एक ट्रस्टी का इस्तीफा, Business Hindi News - Hindustan
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टाटा ट्रस्ट्स में छिड़ी गैर-पारसी की बहस, सवालों के बीच एक ट्रस्टी का इस्तीफा

मेहली मिस्त्री ने महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर के समक्ष हलफनामा दायर कर, टाटा ट्रस्ट्स से जुड़ी एक संस्था में कथित अनियमितताओं की जांच की मांग की है। उन्होंने अपने पूर्व टाटा ट्रस्टी सहयोगियों पर दो वाइस चेयरमैन, विजय सिंह और वेणु श्रीनिवासन को नियुक्त करने का आरोप लगाया है।

Sat, 4 April 2026 04:30 PMDeepak Kumar लाइव हिन्दुस्तान
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टाटा ट्रस्ट्स में छिड़ी गैर-पारसी की बहस, सवालों के बीच एक ट्रस्टी का इस्तीफा

बीते कुछ समय से टाटा ट्रस्ट्स में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। टाटा ग्रुप के सात ट्रस्टों के वाइस चेयरमैन और ट्रस्टी, वेणु श्रीनिवासन ने शनिवार को बाई हीराबाई चैरिटेबल ट्रस्ट (टाटा ट्रस्ट) से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने इसके लिए अपने दूसरे बिजनेस में व्यस्तता का हवाला दिया। श्रीनिवासन का इस्तीफा ऐसे समय में आया है, जब पूर्व ट्रस्टी मेहली मिस्त्री ने दो ट्रस्टियों- श्रीनिवासन और विजय सिंह की योग्यता को चुनौती दी थी।

मेहली मिस्त्री के आरोप

बता दें कि पूर्व ट्रस्टी मेहली मिस्त्री ने महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर के समक्ष हलफनामा दायर कर, टाटा ट्रस्ट्स से जुड़ी एक संस्था में कथित अनियमितताओं की जांच की मांग की है। उन्होंने अपने पूर्व टाटा ट्रस्टी सहयोगियों पर दो वाइस चेयरमैन, विजय सिंह और वेणु श्रीनिवासन को नियुक्त करने का आरोप लगाया है। मेहल मिस्त्री का दावा है कि ये दोनों गैर-पारसी हैं, इसलिए उन्हें मुख्य टाटा ट्रस्ट द्वारा संचालित किसी ट्रस्ट में काम नहीं करना चाहिए था।

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मिस्त्री द्वारा 3 मार्च को दायर एक अपील में कहा गया है- 7 दिसंबर 1923 की ट्रस्ट डीड के क्लॉज 6 में स्पष्ट और बिना किसी दुविधा के एक खास अनिवार्य शर्त रखी गई है कि सभी ट्रस्टी (बाई हीराबाई जमशेदजी टाटा नवसारी चैरिटेबल इंस्टीट्यूशन के) पारसी ही होंगे ट्रस्ट डीड के क्लॉज 18 में साफ तौर पर कहा गया है कि कोई भी ऐसा व्यक्ति जो पारसी धर्म का न हो, उसे ट्रस्टी के तौर पर नियुक्त नहीं किया जाएगा।

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मिस्त्री की याचिका में कहा गया है कि सिंह और श्रीनिवासन की नियुक्तियां ट्रस्ट डीड की स्पष्ट शर्तों का घोर उल्लंघन है। यह कार्रवाई न केवल ट्रस्ट के कुप्रबंधन के बराबर है बल्कि ट्रस्ट के संबंध में कदाचार (गलत काम) करने के बराबर भी है। इसके साथ ही मिस्त्री ने नियामक संस्था से 'बाई हीराबाई जमशेदजी टाटा नवसारी चैरिटेबल इंस्टीट्यूशन' की जांच करने को कहा है। यह उन पांच ट्रस्टों में से एक है जिन्हें 'सर रतन टाटा ट्रस्ट एंड एलाइड ट्रस्ट्स' द्वारा संचालित किया जाता है। इसके अलावा, 'सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट एंड एलाइड ट्रस्ट्स' नौ अन्य ट्रस्टों का संचालन करता है।

किस ट्रस्ट्स के पास कितनी हिस्सेदारी

सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट्स (SDTT) और सर रतन टाटा ट्रस्ट्स (SRTT) के पास टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी, टाटा संस का 27.98% और 23.56% हिस्सा है। इस 51.54% हिस्सेदारी के साथ-साथ छह अन्य ट्रस्ट्स के पास 14.36% हिस्सा है। इस तरह, ये टाटा संस की कुल 65.9% हिस्सेदारी के बराबर है।

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मेहली मिस्त्री को देना पड़ा था इस्तीफा

मेहली मिस्त्री की बात करें तो उन्होंने पिछले साल अक्टूबर में टाटा ट्रस्ट्स से इस्तीफा दे दिया था। दरअसल, 28 अक्टूबर को मिस्त्री को परमानेंट ट्रस्टी बनाने का नोएल टाटा, श्रीनिवासन और सिंह ने विरोध किया था, जिसके बाद SRTT और SDTT दोनों के ट्रस्टी के तौर पर मिस्त्री का कार्यकाल आगे नहीं बढ़ाया गया। यह विरोध तब शुरू हुआ जब मिस्त्री और तीन अन्य ट्रस्टियों ने टाटा संस के बोर्ड में टाटा ट्रस्ट्स के प्रतिनिधि के तौर पर विजय सिंह को हटाने के पक्ष में वोट दिया। मिस्त्री का कहना है कि उन्हें हटाना, विरोध करने वाले उन तीनों ट्रस्टियों की तरफ से की गई एक बदले की कार्रवाई थी।

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