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बाजार में भूचाल के बीच रॉकेट बने 3 पेनी कैटेगरी के शुगर स्टॉक, भाव ₹50 से भी कम

शेयर बाजार में भूचाल के बीच पेनी कैटेगरी के तीन स्टॉक रॉकेट बन गए। ये स्टॉक द्वारिकेश शुगर इंडस्ट्रीज लिमिटेड, श्री रेणुका शुगर्स लिमिटेड, बजाज हिंदुस्तान शुगर हैं। इन शेयरों की कीमत 50 रुपये से भी कम है।

Mon, 30 March 2026 03:04 PMDeepak Kumar लाइव हिन्दुस्तान
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बाजार में भूचाल के बीच रॉकेट बने 3 पेनी कैटेगरी के शुगर स्टॉक, भाव ₹50 से भी कम

शेयर बाजार में सोमवार को एक बार फिर से भारी बिकवाली का माहौल रहा। हालांकि, इस बिकवाली वाले माहौल में भी शुगर कंपनियों के शेयर डिमांड में रहे। इसमें कुछ शुगर कंपनियां ऐसी भी हैं जिनके शेयर पेनी कैटेगरी के हैं। ये शेयर - द्वारिकेश शुगर इंडस्ट्रीज लिमिटेड, श्री रेणुका शुगर्स लिमिटेड और बजाज हिन्दुस्तान शुगर के हैं। इन शेयरों की कीमत 50 रुपये से भी कम है।

कंपनी के शेयर का परफॉर्मेंस

द्वारिकेश शुगर इंडस्ट्रीज लिमिटेड- ट्रेडिंग के दौरान शेयर करीब 10 पर्सेंट चढ़कर 48.30 रुपये तक जा पहुंचा। इस शेयर के 52 हफ्ते का हाई 52.55 रुपये और लो 32.14 रुपये है।

श्री रेणुका शुगर्स लिमिटेड- ट्रेडिंग के दौरान शेयर करीब 6 पर्सेंट चढ़कर 28.55 रुपये तक जा पहुंचा। 52 हफ्ते का हाई 35.84 रुपये और 52 हफ्ते का लो 22.86 रुपये है।

बजाज हिंदुस्तान शुगर लिमिटेड-ट्रेडिंग के दौरान शेयर करीब 2 पर्सेंट उछाल के साथ 17.33 रुपये तक पहुंच गया। 52 हफ्ते का हाई 29.62 रुपये और 52 हफ्ते का लो 14.89 रुपये है।

ये शेयर भी बने रॉकेट

इसके अलावा, ट्रेडिंग के दौरान प्राज इंडस्ट्रीज लिमिटेड के शेयर करीब 2 पर्सेंट बढ़कर 326.65 रुपये पर पहुंच गया। इसके अलावा, ट्रेडिंग के दौरान धामपुर शुगर मिल्स लिमिटेड का शेयर करीब 8 पर्सेंट बढ़कर 146.45 रुपये तक जा पहुंचा। इसी तरह, ट्रेडिंग के दौरान डालमिया भारत शुगर एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड का शेयर करीब 16 पर्सेंट बढ़कर 401.50 रुपये तक जा पहुंचा।

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तेजी की वजह क्या है?

शुगर कंपनियों के शेयर में यह तेजी मुख्य रूप से कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी उछाल के कारण है। दरअसल, एशियाई बाजार में शुरुआती कारोबार के दौरान कच्चे तेल की कीमतें बढ़ीं और अब वे महीने भर में मजबूत बढ़त हासिल करने की राह पर हैं। ब्रेंट क्रूड 3% तक उछलकर $116.5 प्रति बैरल पर पहुंच गया, जो अपने हाल के उच्चतम स्तर $119 के करीब है। कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से आमतौर पर वैकल्पिक ईंधन के तौर पर इथेनॉल की मांग और आकर्षण बढ़ जाता है। इसका सीधा फायदा चीनी कंपनियों को होता है, जिनमें से कई ने अब इथेनॉल उत्पादन के क्षेत्र में भी कदम रख दिया है।

इथेनॉल एक बड़ा विकल्प

कहने का मतलब है कि चीनी कंपनियां अब सिर्फ चीनी की बिक्री पर ही निर्भर नहीं हैं। वे इथेनॉल का उत्पादन भी करती हैं, जिसे पेट्रोल में मिलाया जाता है। जब कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं तो इथेनॉल ज्यादा फायदेमंद और मुनाफे वाला विकल्प बन जाता है।

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इससे कंपनियों को गन्ने का ज्यादा हिस्सा इथेनॉल उत्पादन में लगाने का मौका मिलता है, जिससे उनके मुनाफे (मार्जिन) में सुधार होता है। शेयरों में निवेशकों की दिलचस्पी फिर से जागने के पीछे यही एक मुख्य वजह है। इस बीच, दुनिया के सबसे बड़े चीनी उत्पादक देश ब्राजील में चीनी का उत्पादन घटकर 40.3 मिलियन टन रहने का अनुमान है, जो पिछले साल 43.5 मिलियन टन था।

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वैश्विक बाजार में चीनी की आपूर्ति कम होने से इसकी कीमतें बढ़ सकती हैं, जिसका फायदा भारतीय निर्यातकों को मिलेगा। रुपया में लगातार आ रही गिरावट का फायदा निर्यातकों को मिलने की उम्मीद है क्योंकि निर्यात से कमाई में बढ़ोतरी की संभावना रहती है।

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