Stock market falls investors losses 20 lakh crore rupee in this week बुरे सपने जैसा बीता शेयर बाजार में यह हफ्ता, निवेशकों के डूबे ₹20 लाख करोड़, Business Hindi News - Hindustan
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बुरे सपने जैसा बीता शेयर बाजार में यह हफ्ता, निवेशकों के डूबे ₹20 लाख करोड़

Why Stock Market Falling: शेयर बाजार के लिए यह हफ्ता किसी बुरे सपने से कम नहीं रहा है। इस सप्ताब निफ्टी 50 इंडेक्स में 5 प्रतिशत की गिरावट आई है। पिछले 4 सालों में यह शेयर बाजार का सबसे बुरा सप्ताह रहा है। इससे पहले जून 2022 में घरेलू शेयर बाजार में 5 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई थी।

Fri, 13 March 2026 04:26 PMTarun Pratap Singh लाइव हिन्दुस्तान
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बुरे सपने जैसा बीता शेयर बाजार में यह हफ्ता, निवेशकों के डूबे ₹20 लाख करोड़

Why Stock Market Falling: शेयर बाजार के लिए यह हफ्ता किसी बुरे सपने से कम नहीं रहा है। इस सप्ताब निफ्टी 50 इंडेक्स में 5 प्रतिशत की गिरावट आई है। पिछले 4 सालों में यह शेयर बाजार का सबसे बुरा सप्ताह रहा है। इससे पहले जून 2022 में घरेलू शेयर बाजार में 5 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई थी। बता दें, शेयर बाजार के इस हफ्ते भारी भरकम गिरावट की वजह से बीएसई लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 20 लाख करोड़ रुपये डूब गया। जब से मिडिल ईस्ट में युध्द शुरू हुआ है तब से निवेशकों ने घरेलू स्टॉक मार्केट में 33 लाख करोड़ रुपये गंवाए हैं।

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गिरावट के पीछे की 2 बड़ी वजह

1-घरेलू स्टॉक मार्केट के लिए सबसे बड़ी टेंशन क्रूड ऑयल है। इसी वजह से शेयर बाजार में दबाव में है। ब्रेंट क्रूड ऑयल 102 डॉलर प्रति बैरल के करीब है। IEA ने 400 मिलियन बैरल तेल को रिलीज करने के बाद भी क्रू़ड ऑयल की कीमतें आसमान को छू रही हैं।

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ईरान और अमेरिका दोनों की तरफ से युद्ध को समाप्त करने के लिए कोई ठोस कोशिश नहीं हो रही है। जिसकी वजह से क्रूड ऑयल की कीमतों में तेजी आगे भी जारी रह सकती है। गोल्डमैन स्कैस ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज नहीं खुला तो तेल की कीमतें 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं।

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2- डॉलर का मजबूत होना

डॉलर अगर मजबूत होता है तो उसका बुरा असर दुनिया भर के बाजारों पर पड़ता ही है। खासकर एमर्जिंग मार्केट्स को। यूएस डॉलर इंडेक्स एक फिर से 100 के मार्क को क्रॉस कर गया है। दूसरी तरफ निफ्टी मेटल इंडेक्स शुक्रवार यानी 4 प्रतिशत और पिछले एक हफ्ते में यह 5 प्रतिशत लुढ़क चुका है।

डॉलर मजबूत होने के कारण मेटल की डिमांड में गिरावट आती है। इंटरनेशनल खरीदार इससे दूरी बना लेते हैं।

(शेयर बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश से पहले सूझ-बूझ के साथ फैसला करें। यहां प्रस्तुत एक्सपर्ट्स के विचार निजी हैं। यहां प्रस्तुत एक्सपर्ट्स के विचार निजी हैं। लाइव हिन्दुस्तान इस आधार पर शेयरों को खरीदने और बेचने की सलाह नहीं देता है।)

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