MSMEs और एविएशन सेक्टर को बूस्ट देगी मोदी सरकार, ₹18100 करोड़ फंड का हुआ ऐलान
केंद्र सरकार ने पश्चिम एशिया संकट से प्रभावित उद्योगों की मदद के लिए इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम 5.0 शुरू करने का फैसला किया है।इसके तहत सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम (MSMEs) और एविएशन सेक्टर के लिए 18,100 करोड़ रुपये का फंड दिए जाने की योजना है।

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने पश्चिम एशिया संकट से प्रभावित उद्योगों की मदद के लिए इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम (ECLGS) 5.0 शुरू करने का फैसला किया है। इसके तहत सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम (MSMEs) और एविएशन सेक्टर के लिए 18,100 करोड़ रुपये का फंड दिए जाने की योजना है।
क्या कहा केंद्रीय मंत्री ने?
सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मीडिया को बताया कि पश्चिम एशिया संकट के कारण MSMEs और एयरलाइन कंपनियों पर पड़े दबाव से उन्हें राहत दिलाने के लिए यह योजना लाई गई है। इस योजना में बैंकों द्वारा MSMEs को दिए जाने वाले लोन के लिए 100 प्रतिशत और गैर-एमएसएमई अैर एयरलाइन कंपनियों को दिए जाने वाले लोन के लिए 90 प्रतिशत तक क्रेडिट गारंटी दी जाएगी। क्रेडिट गारंटी राष्ट्रीय क्रेडिट गारंटी न्यास कंपनी लिमिटेड (एनसीजीटीसी) के जरिये दी जाएगी। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि पश्चिम एशिया संकट के कारण जिन सेक्टरों पर दबाव है, उन्हें नकदी की कमी से निपटने और अपने नियमित परिचालन को बनाए रखने में मदद मिलेगी। इसमें कोई गारंटी शुल्क नहीं होगा।
वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च 2026) में पात्र कंपनियों की अधिकतम वर्किंग कैपिटल का 20 प्रतिशत तक (अधिकतम 100 करोड़ रुपये) उन्हें अतिरिक्त क्रेडिट के रूप में दिया जाएगा। एयरलइन कंपनियां अधिकतम वर्किंग कैपिटल का 100 प्रतिशत तक (अधिकतम 1,500 करोड़ रुपये) अतिरिक्त क्रेडिट ले सकेंगी क्योंकि उनकी पूंजी की जरूरत ज्यादा होती है।
मोरेटोरियम की सुविधा
एयरलाइन कंपनियों के पास दो साल के मोरेटोरियम सहित लोन चुकाने के लिए सात साल का समय होगा जबकि अन्य कंपनियों / संस्थानों को एक साल के मोरेटोरियम सहित 5 साल का समय मिलेगा। यह योजना एनसीजीटीसी द्वारा दिशा निर्देश जारी किये जाने की तारीख से 31 मार्च 2027 तक स्वीकृत लोन पर लागू होगी और गारंटी की अधिकतम अवधि लोन की अवधि के बराबर होगी।
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि ECLGS की शुरुआत कोविड के समय हुई थी। ECLGS 5.0 में उद्योग को बैंकों द्वारा लोन के रूप में कुल 2,55,000 करोड़ रुपये का समर्थन मिलने की उम्मीद है। केंद्र सरकार को इस लोन की गारंटी देने के लिए 18,100 करोड़ रुपये खर्च करने पड़ेंगे। इससे उद्योग को समर्थन मिलने के अलावा रोजगार की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।
एयरलाइन कंपनियों के संगठन ने की थी मांग
हाल ही में देश की प्रमुख एयरलाइन कंपनियों ने एटीएफ कीमतों की वजह से एविएशन इंडस्ट्री के ज्यादा दबाव में होने का जिक्र करते हुए कहा था कि तत्काल राहत नहीं दिए जाने पर संचालन ठप होने की भी स्थिति बन सकती है। फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस (एफआईए) ने नागर विमानन मंत्रालय को पत्र लिखकर विमानन ईंधन (एटीएफ) की कीमतों, करों में राहत और घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए समान मूल्य निर्धारण व्यवस्था की बहाली की मांग की थी। एयर इंडिया, इंडिगो और स्पाइसजेट की भागीदारी वाले इस संगठन ने कहा है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है, जबकि कई क्षेत्रों में हवाई क्षेत्र पाबंदियों ने परिचालन लागत और बढ़ा दी है।




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