डॉलर की दहाड़ से थरथर कांप रहा रुपया, INR 100 के करीब, इंडोनेशियाई 17630 पर पहुंचा
Dollae Vs INR: 8 फरवरी से शुरू हुए ईरान युद्ध के बाद से रुपया लगभग 5.5% गिर चुका है। सोमवार को लगातार पांचवें कारोबारी सत्र में रुपया नए सबसे निचले स्तर पर पहुंचा।

अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये की हालत बद से बदतर होती जा रही है। भारतीय रुपया सोमवार (18 मई) को 20 पैसे टूटकर 96.17 प्रति डॉलर के नए ऑल-टाइम लो पर खुला। साल 2026 में अब तक भारतीय रुपया एशिया की सबसे कमजोर करेंसी बन चुका है। 28 फरवरी से शुरू हुए ईरान युद्ध के बाद से यह लगभग 5.5% गिर चुका है। सोमवार को लगातार पांचवें कारोबारी सत्र में रुपया नए सबसे निचले स्तर पर पहुंचा। ईरान युद्ध के चलते बढ़ी कच्चे तेल की कीमतों ने वैश्विक बाजारों पर दबाव बढ़ा दिया है और निवेशकों का जोखिम के प्रति रुझान कमजोर हो गया है।
इंडोनेशियाई रुपिया भी ऑल-टाइम लो पर
तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और दो दिन की छुट्टी के बाद स्थानीय बाजार खुलते ही इंडोनेशियाई रुपिया अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। सोमवार को रुपिया 0.9% टूटकर 17,630 प्रति डॉलर पर बंद हुआ, जो इस क्षेत्र में सबसे खराब प्रदर्शन है। इस साल अब तक यह 5% से अधिक गिर चुका है।
ब्लूमबर्ग की खबर के मुताबिक बैंक इंडोनेशिया पर अब और कदम उठाने का दबाव है, क्योंकि देश एशिया में तेल की बढ़ती कीमतों से सबसे अधिक प्रभावित होने वालों में शामिल है। ऊंची तेल कीमतों से ऊर्जा सब्सिडी बढ़ने और सरकारी घाटा बड़ने का खतरा है। फिच और मूडीज जैसी रेटिंग एजेंसियों ने पहले ही भारत के क्रेडिट आउटलुक को निगेटिव कर दिया है।
क्यों है रुपये पर संकट
तेल के दाम बढ़ने से इंडोनेशिया और भारत दोनों की मुद्राओं पर भारी दबाव है। दोनों देशों के रुपये लगातार नए रिकॉर्ड तोड़ रहे हैं, जिससे महंगाई और आयात बिल बढ़ने की चिंता बढ़ गई है।
इससे क्या पड़ेगा असर
रुपया गिरने से इंडिया की ग्रोथ कम होने की आशंका बनी हुई है। यहां आम आदमी पर दोहरी मार पड़ सकती है। महंगाई बढ़ने की आशंका है, लेकिन आमदनी जस की तस रहने या घटने का डर है। लोग खर्च कम करेंगे तो असर कंपनियों की बिक्री और अंततः मुनाफ़े पर पड़ता है।
शेयर बाजार में डर
घरेलू शेयर बाजार में डर दिखने लगा है। आज सेंसेक्स में 800 अंक से अधिक की गिरावट है। विदेशी निवेश लगातार निकासी कर रहे हैं। विदेशी निवेशकों के अलावा रुपया गिरने का बड़ा कारण है कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी है। होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से दुनिया की कुल खपत का 20% कच्चा तेल की सप्लाई नहीं हो पा रही है। कच्चे तेल की कीमत प्रति बैरल $70 से बढ़कर $110 के ऊपर पहुंच गई है। यह भी डॉलर की मांग बढ़ने का कारण है।




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