20% टूटा शेयर, निवेशकों को एक ही दिन में ₹14438 करोड़ का नुकसान, बैंक में बड़ी गड़बड़ी से हड़कंप
शुरुआती कारोबार में बैंक के शेयर करीब 20% तक टूटकर 66.85 रुपये पर पहुंच गया, जो मार्च 2020 के बाद की सबसे बड़ी गिरावट मानी जा रही है। बाद में कुछ रिकवरी जरूर हुई, लेकिन भरोसे को लगा झटका साफ नजर आया।

IDFC First Bank Share: आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के शेयरधारकों के लिए सोमवार का दिन बेहद भारी रहा। बैंक की चंडीगढ़ शाखा में 590 करोड़ रुपये के कथित फ्रॉड का खुलासा होते ही निवेशकों में हड़कंप मच गया और शेयरों में जोरदार बिकवाली देखने को मिली। एक ही कारोबारी सत्र में बैंक का मार्केट कैप करीब 14,438 करोड़ रुपये घट गया। शुरुआती कारोबार में शेयर करीब 20% तक टूटकर 66.85 रुपये पर पहुंच गया, जो मार्च 2020 के बाद की सबसे बड़ी गिरावट मानी जा रही है। बाद में कुछ रिकवरी जरूर हुई, लेकिन भरोसे को लगा झटका साफ नजर आया।
क्या है मामला
बैंक ने बताया कि हरियाणा सरकार से जुड़े खातों में कुछ कर्मचारियों ने अनधिकृत लेनदेन किए, जिससे करीब 590 करोड़ रुपये की जमा राशि में गड़बड़ी सामने आई। यह मामला तब सामने आया जब हरियाणा सरकार के एक विभाग ने अपना खाता बंद कर दूसरी बैंक में पैसा ट्रांसफर करने का अनुरोध किया। जांच के दौरान गड़बड़ी पकड़ में आई। बैंक का कहना है कि यह एक अलग-थलग घटना है और इसे कंट्रोल में कर लिया गया है, लेकिन हरियाणा सरकार ने बैंक को सरकारी कामकाज से डी-एम्पैनल कर दिया है, जो भरोसे में आई कमी को दिखाता है।
निवेशकों को झटका
इस गिरावट से बड़े निवेशकों को भी तगड़ा झटका लगा। भारत के राष्ट्रपति के पास बैंक में 7.75% हिस्सेदारी है और शेयर गिरने से उनकी हिस्सेदारी की वैल्यू में 1,100 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमी आई। म्यूचुअल फंड्स, जिनकी करीब 10.93% हिस्सेदारी है, उन्हें भी 1,500 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान झेलना पड़ा। वहीं रिटेल निवेशकों, जिनकी करीब 27.9% हिस्सेदारी है, को हजारों करोड़ रुपये का कागजी नुकसान हुआ। साफ है कि इस एक खबर ने छोटे से लेकर बड़े सभी निवेशकों की जेब पर असर डाला।
बैंक ने क्या कहा
बैंक के एमडी और सीईओ V. Vaidyanathan ने निवेशकों के साथ कॉन्कॉल में कहा कि बैंक हर प्रक्रिया की बारीकी से जांच करेगा और अगर कहीं सिस्टम या निगरानी में कमी मिली तो उसे तुरंत सुधारा जाएगा। संदिग्ध कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया गया है और स्वतंत्र फॉरेंसिक ऑडिट के लिए KPMG को नियुक्त किया गया है। प्रबंधन का दावा है कि बैंक की कुल बैलेंस शीट मजबूत है और इस घटना का लंबी अवधि में बड़ा असर नहीं पड़ेगा।
शेयर बाजार एनालिस्ट की राय
हालांकि, बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल शेयर पर दबाव बना रह सकता है। कुछ एक्सपर्ट्स का कहना है कि ऐसे मामलों में ग्राहकों का भरोसा सबसे अहम होता है और अगर डिपॉजिटर्स ने पैसा निकालना शुरू किया तो बैंक के लिए चुनौती बढ़ सकती है। लंबी अवधि के निवेशकों को सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है, जबकि कुछ ट्रेडर्स इसे शॉर्ट टर्म ट्रेडिंग मौके के रूप में देख रहे हैं। कुल मिलाकर, 590 करोड़ के इस फ्रॉड ने यह साफ कर दिया है कि बैंकिंग सेक्टर में गवर्नेंस और निगरानी कितनी अहम है।




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