पेट्रोल-डीजल महंगा और क्रूड सस्ता होने का असर, HPCL, IOCL और BPCL के चढ़े शेयर
OMCs Share Price: पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 12 दिन में चौथी बार इजाफा किया गया। इन दोनों वजहों ने बढ़ती अंतरराष्ट्रीय क्रूड लागत के बीच ऑयल पीएसयू को राहत पहुंचाई है। इससे इनके शेयरों में आज तेजी है।

ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) के शेयरों ने आज 25 मई को बाजार में शानदार प्रदर्शन किया। क्रूड ऑयल दो सप्ताह के निचले स्तर पर आ गया, वहीं पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 12 दिन में चौथी बार इजाफा किया गया। इन दोनों वजहों ने बढ़ती अंतरराष्ट्रीय क्रूड लागत के बीच ऑयल पीएसयू को राहत पहुंचाई है।
HPCL, BPCL और IOCL में तेजी
हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL)के शेयरों की आज स्थित सबसे मजबूत दिख रही है। इसका शेयर 5.8% चढ़कर 412.55 रुपये पर पहुंच गया। भारत पेट्रोलियम (BPCL) 4.44% की बढ़त के साथ 308.70 रुपये पर पहुंच गया। जबकि, इंडियन ऑयल (IOC) ने 3.90% का उछाल दर्ज कराया और BSE पर 144.95 रुपये पर ट्रेड कर रहा था।
इस साल 13-20% टूटे
इस तेजी के साथ OMCs के शेयर मई महीने में सकारात्मक जोन में आ गए हैं और लगातार दूसरे महीने हरे निशान पर हैं। हालांकि, साल 2026 में अब तक इन शेयरों में 13-20% की गिरावट आ चुकी है।
क्यों बढ़ रहे हैं OMCs के शेयर?
क्रूड ऑयल में भारी गिरावट: मध्य पूर्व युद्ध शुरू होने के बाद से OMCs पर दबाव था, लेकिन आज क्रूड ऑयल 98 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गया। ब्रेंट क्रूड 5.7% यानी 5.85 डॉलर गिरकर 97.69 डॉलर प्रति बैरल पर आया। जबकि, डब्ल्यूटीआई क्रूड 6% यानी 5.75 डॉलर टूटकर 90.85 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ। दोनों कॉन्ट्रैक्ट 7 मई के बाद अपने निचले स्तर पर पहुंच गए।
मिडिल-ईस्ट संकट के अंत की उम्मीद: 20% वैश्विक तेल की सप्लाई होर्मुज स्ट्रेट से गुजरती है। इसके फिर से खुलने और पश्चिम एशिया संकट के समाधान की संभावनाओं से क्रूड की कीमतों पर दबाव बना है। उच्च क्रूड कीमतें OMCs के रिफाइनिंग और मार्केटिंग मार्जिन को नुकसान पहुंचाती हैं, और अब इसके उलट होने से राहत मिली है।
चौथी बार बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम: OMCs पर दबाव कम करने के लिए सरकार ने आज पेट्रोल और डीजल के दामों में चौथी बार बढ़ोतरी की। डीजल में 2.71 रुपये प्रति लीटर और पेट्रोल में 2.61 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है। अब दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये प्रति लीटर हो गया है। लंबे अंतराल के बाद 15 मई से तेल की कीमतों में संशोधन फिर से शुरू हुआ था। तब से अब तक कुल बढ़ोतरी लगभग 7.5 रुपये प्रति लीटर हो चुकी है।
अंडर-रिकवरी का अनुमान
18 मई के एक नोट में जेएम फाइनेंशियल ने कहा था कि OMCs को Q1FY27 में लगभग 84,500 करोड़ रुपये की अंडर-रिकवरी (9,200 करोड़ रुपये प्रतिदिन) का सामना करना पड़ सकता है। इससे उनकी कैश लॉस 54,000 करोड़ रुपये रह सकती है, जो Q1 के अंत तक बुक वैल्यू में लगभग 10% की कमी ला सकती है।
हालांकि, बैलेंस शीट मजबूत है। वर्तमान नेट डेट-टू-इक्विटी अनुपात 0.52x है, जो रूस संकट (1.16x) के मुकाबले काफी आरामदायक है। कंपनियां दो-तीन तिमाहियों के लिए अंडर-रिकवरी सहन कर सकती हैं।
कितनी और बढ़ोतरी की जरूरत?
मई में पहली बढ़ोतरी (लगभग 3 रुपये) के बाद जेएम फाइनेंशियल ने अनुमान लगाया था कि OMCs को EBITDA घाटे से बचने के लिए 6-9 रुपये प्रति लीटर और सामान्य EBITDA कमाने के लिए 14-17 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी चाहिए।




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