पेट्रोल-डीजल और ATF पर कंपनियों के नुकसान की सरकार नहीं करेगी भरपाई! शेयर धराशायी
बीपीसीएल 1.31 प्रतिशत टूटकर 297.75 रुपये पर आ गया। यह 300.25 रुपये पर खुला था। आईओसीएल सुबह साढ़े नौ बजे के करीब 0.80 पर्सेंट नीचे 141.12 रुपये पर ट्रेड कर रहा था। एचपीसीएल 1.51 प्रतिशत के नुकसान के साथ 368.20 रुपये पर कारोबार कर रहा था।

पेट्रोल, डीजल और विमानन ईंधन (ATF) की खुदरा बिक्री पर सरकारी ऑयल कंपनियों को हो रहे नुकसान की भरपाई के लिए फाइनेंशियल सपोर्ट देने का सरकार के पास फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है। सोमवार को एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी। बता दें एक बैरल कच्चे तेल में 10 डॉलर की बढ़ोतरी की वजह से कंपनियों को करीब 6 रुपये प्रति लीटर का नुकसान होता है।
ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के शेयरों का हाल
इस खबर के बाद आज इंडियन ऑयल, हिन्दुस्तान पेट्रोलियम और एचपीसीएल के शेयरों पर दबाव साफ नजर आ रहा है। शुरुआती कारोबार में ही बीपीसीएल 1.31 प्रतिशत टूटकर 297.75 रुपये पर आ गया। यह 300.25 रुपये पर खुला था। आईओसीएल सुबह साढ़े नौ बजे के करीब 0.80 पर्सेंट नीचे 141.12 रुपये पर ट्रेड कर रहा था। एचपीसीएल 1.51 प्रतिशत के नुकसान के साथ 368.20 रुपये पर कारोबार कर रहा था।
क्यों गिर रहे कंपनियों के शेयर
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय में संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा कि ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को उनके नुकसान के लिए समर्थन देने का कोई भी प्रस्ताव सरकार के समक्ष नहीं है। सार्वजनिक क्षेत्र की इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC), भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (HPCL) पिछले दो महीनों से पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बावजूद पेट्रोल-डीजल के खुदरा दाम नहीं बढ़ा रही हैं।
कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से दुनिया के कई देशों में बढ़े तेल के दाम
दुनिया के कई देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में आग लगी हुई है। कहीं पेट्रोल का भाव दोगुना हुआ है तो कहीं डीजल के रेट ढाई गुने हो गए हैं। क्योंकि, ईरान-अमेरिका युद्ध के चलते कच्चे तेल की कीमतें अभी भी 110 डॉलर प्रति बैरल के पार हैं। युद्ध शुरू होने से पहले कच्चे तेल की कीमत 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास थीं। इसका असर दुनिया भर के देशों में पेट्रोल-डीजल के रेट पर पड़ रहा है।
पेट्रोल-डीजल पर प्रति लीटर 25-28 रुपये तक नुकसान
कच्चे तेल की लागत बढ़ने और खुदरा दाम में स्थिरता की वजह से इन पेट्रोलियम कंपनियों को प्रति लीटर 25-28 रुपये तक का 'अंडर-रिकवरी' (लागत से कम कीमत पर बिक्री) झेलना पड़ रहा है। इसके अलावा, कंपनियों को दो दशक से अधिक समय में पहली बार एटीएफ पर भी घाटा उठाना पड़ रहा है। इसकी वजह यह है कि घरेलू एयरलाइंस के लिए एटीएफ की कीमतों में समुचित बढ़ोतरी नहीं की गई है।
(डिस्क्लेमर: एक्सपर्ट्स की सिफारिशें, सुझाव, विचार और राय उनके अपने हैं, लाइव हिन्दुस्तान के नहीं। यहां सिर्फ शेयर के परफॉर्मेंस की जानकारी दी गई है, यह निवेश की सलाह नहीं है। शेयर मार्केट में निवेश जोखिमों के अधीन है और निवेश से पहले अपने एडवाइजर से परामर्श कर लें।)




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