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7.1% की रफ्तार से बढ़ेगी भारत की इकोनॉमी, ग्लोबल टेंशन के बीच आया पॉजिटिव अनुमान

रेटिंग एजेंसी ने इकोनॉमी पर भरोसा जताते हुए वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) के लिए जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 40 बेसिस प्वाइंट बढ़ाकर 7.1% कर दिया है। इससे पहले एजेंसी ने नवंबर-दिसंबर 2025 के अपने आउटलुक में FY27 के लिए 6.7% वृद्धि का अनुमान जताया था।

Wed, 25 March 2026 04:17 PMDeepak Kumar लाइव हिन्दुस्तान
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7.1% की रफ्तार से बढ़ेगी भारत की इकोनॉमी, ग्लोबल टेंशन के बीच आया पॉजिटिव अनुमान

ग्लोबली चुनौतियों के बावजूद भारतीय इकोनॉमी की रफ्तार तेजी से आगे बढ़ेगी। ये हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि वैश्विक क्रेडिट रेटिंग एजेंसी S&P Global ने भारत की जीडीपी ग्रोथ पर अपना अनुमान पॉजिटिव रखा है। रेटिंग एजेंसी ने इकोनॉमी पर भरोसा जताते हुए वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) के लिए जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 40 बेसिस प्वाइंट बढ़ाकर 7.1% कर दिया है। इससे पहले एजेंसी ने नवंबर-दिसंबर 2025 के अपने आउटलुक में FY27 के लिए 6.7% वृद्धि का अनुमान जताया था।

क्या है जोखिम?

हालांकि, S&P Global ने वैश्विक स्तर पर जारी संघर्ष और व्यापार अस्थिरता को बड़ा जोखिम बताया है। रेटिंग एजेंसी ने कहा कि निजी खपत, निवेश एवं निर्यात वृद्धि के प्रमुख फैक्टर रहेंगे। हालांकि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष से ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी के कारण वित्तीय स्थिति पर दबाव पड़ सकता है।

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रेटिंग एजेंसी ने कहा कि नए भू-राजनीतिक तनाव और लगातार बने व्यापार संबंधी अनिश्चितता के जोखिम से भारत पर वस्तु कीमतों, व्यापार मात्रा और पूंजी प्रवाह में उतार-चढ़ाव के असर पड़ सकता है। यदि कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं तो भारत में ईंधन की कीमतें बढ़ सकती हैं, ताकि सब्सिडी लागत को नियंत्रित किया जा सके। हालांकि कीमतों का पूरा असर उपभोक्ताओं तक पहुंचने के आसार नहीं हैं।

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महंगाई दर में बढ़ोतरी का अनुमान

एजेंसी के मुताबिक, FY27 में भारत में महंगाई दर बढ़कर 4.3% तक पहुंच सकती है। कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि से व्यापार घाटा बढ़ने की आशंका है, लेकिन सेवा क्षेत्र में मजबूत अधिशेष चालू खाते के घाटे को सीमित रखने में मदद करेगा। एसएंडपी ने कहा- ऊंची ऊर्जा कीमतें क्रय शक्ति को कम करती हैं और घरेलू मांग को कमजोर करती हैं। भारत, इंडोनेशिया, जापान, मलेशिया और थाईलैंड जैसे देशों में ऊंची कीमतों के कारण सब्सिडी पर अधिक खर्च करना पड़ सकता है, जिससे वित्तीय स्थिति पर दबाव बढ़ेगा। एजेंसी के आधारभूत अनुमान के अनुसार, ब्रेंट कच्चे तेल की औसत कीमत अप्रैल-जून तिमाही में 92 डॉलर प्रति बैरल और 2026 में करीब 80 डॉलर प्रति बैरल रहने के आसार हैं। हॉर्मुज जलडमरूमध्य में आपूर्ति में व्यवधान अप्रैल की शुरुआत तक बने रहने और उसके बाद धीरे-धीरे सामान्य होने की स्थिति के आधार पर यह अनुमान लगाया गया है।

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प्रतिकूल स्थिति में हालांकि यदि ऊर्जा बाजार में व्यवधान ज्यादा गंभीर और लंबे समय तक रहता है। साथ ही जून तिमाही में ब्रेंट कच्चा तेल औसतन 185 डॉलर प्रति बैरल और 2026 में करीब 130 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच जाता है तो भारत में ऊर्जा कीमतों से उत्पन्न होने वाली महंगाई के आकलन के बाद आरबीआई नीतिगत सख्ती कर सकता है। एसएंडपी के अनुसार, ऐसी स्थिति में वर्ष की दूसरी छमाही में ब्याज दर में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी की जा सकती है।

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