PM किसान से लेकर किसान क्रेडिट कार्ड पर वित्त मंत्री ने दी बड़ी जानकारी, किसानों के लिए खबर
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को लोकसभा में यह जानकारी देते हुए कहा कि सरकार का फोकस कर्ज माफी के बजाय किसानों की आय और आर्थिक स्थिति को मजबूत करने पर है।

केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि किसानों के लिए पूरी तरह से कर्ज माफी का कोई प्रस्ताव फिलहाल विचाराधीन नहीं है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को लोकसभा में यह जानकारी देते हुए कहा कि सरकार का फोकस कर्ज माफी के बजाय किसानों की आय और आर्थिक स्थिति को मजबूत करने पर है। उन्होंने बताया कि सरकार किसानों को समय पर और सस्ता कर्ज उपलब्ध कराने के लिए कई योजनाएं चला रही है। खास तौर पर किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के तहत 3 लाख रुपये तक का फसल ऋण सब्सिडी वाली ब्याज दर पर दिया जा रहा है। इसके साथ ही जो किसान समय पर लोन चुकाते हैं, उन्हें अतिरिक्त लाभ भी मिलता है। यह सब “मॉडिफाइड इंटरेस्ट सबवेंशन स्कीम” के तहत किया जा रहा है।
क्या है डिटेल
सरकार ने किसानों को राहत देने के लिए बिना गारंटी वाले कृषि ऋण की सीमा भी बढ़ा दी है। पहले यह सीमा 1.60 लाख रुपये थी, जिसे अब बढ़ाकर 2 लाख रुपये कर दिया गया है। इसके अलावा, रिजर्व बैंक के नियमों के तहत बैंकों को कृषि क्षेत्र में पर्याप्त कर्ज देने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि किसानों को आसानी से फाइनेंस मिल सके।
पीएम किसान पर क्या बोलीं वित्त मंत्री
वित्त मंत्री ने यह भी बताया कि सरकार फसल बीमा योजना और प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) जैसी योजनाओं के जरिए सीधे किसानों के खाते में पैसे भेज रही है। इन कदमों का मकसद किसानों की आय को स्थिर करना और जोखिम कम करना है, ताकि उन्हें कर्ज पर ज्यादा निर्भर न रहना पड़े।
इसी दौरान एक अन्य सवाल के जवाब में उन्होंने सशस्त्र बलों के दिव्यांग पेंशन पर भी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि यह टैक्स छूट पहले से ही लागू थी और अब नए आयकर कानून 2025 में इसे साफ तौर पर शामिल किया जा रहा है, ताकि किसी तरह का भ्रम न रहे। यानी यह छूट खत्म नहीं की गई है, बल्कि इसे और स्पष्ट रूप से जारी रखा गया है।
सरकार के अनुसार, नए नियम पुराने सिस्टम को ही जारी रखते हैं, न कि कोई नया टैक्स लगाने या पुरानी छूट हटाने का काम करते हैं। कुल मिलाकर, सरकार का संदेश साफ है कि किसानों के लिए कर्ज माफी नहीं, बल्कि मजबूत आर्थिक सपोर्ट सिस्टम बनाने पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है, जबकि सेना के जवानों के हितों को भी सुरक्षित रखा गया है।




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