ey report said india holds only 4 to 5 days strategic oil reserves pressure on prices of petrol LPG and fertilizers EY रिपोर्ट: भारत के पास सिर्फ 4-5 दिन का रणनीतिक तेल भंडार! पेट्रोल, LPG और खाद की कीमतों पर बढ़ सकता है दबाव, Business Hindi News - Hindustan
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EY रिपोर्ट: भारत के पास सिर्फ 4-5 दिन का रणनीतिक तेल भंडार! पेट्रोल, LPG और खाद की कीमतों पर बढ़ सकता है दबाव

पश्चिम एशिया संकट ने भारत की आयात पर निर्भरता को उजागर कर दिया है, जिसका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ सकता है। EY ने कच्चा तेल , खाद, रेयर अर्थ मटेरियल, जरूरी दवाइयां और मेडिकल इंस्ट्रूमेंट में बड़े रिजर्व बनाने की सलाह दी है।

Fri, 29 May 2026 05:30 AMDrigraj Madheshia लाइव हिन्दुस्तान
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EY रिपोर्ट: भारत के पास सिर्फ 4-5 दिन का रणनीतिक तेल भंडार! पेट्रोल, LPG और खाद की कीमतों पर बढ़ सकता है दबाव

वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच कंसल्टेंसी फर्म EY ने चेतावनी दी है कि भारत को भविष्य के संकटों से बचने के लिए कच्चे तेल, खाद, दवाइयों और रेयर अर्थ मटेरियल का बड़ा स्ट्रेटजिक रिजर्व तैयार करना होगा। EY की मई 2026 की “इकोनॉमी वॉच” रिपोर्ट में कहा गया है कि पश्चिम एशिया संकट ने भारत की आयात पर निर्भरता को उजागर कर दिया है, जिसका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ सकता है।

पेट्रोल, LPG और खाद की कीमतों पर बढ़ सकता है दबाव

EY के मुताबिक अगर वैश्विक संकट लंबे समय तक जारी रहता है तो पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और खाद की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल सकता है। इसका असर सिर्फ ईंधन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ट्रांसपोर्ट, बिजली, खेती और रोजमर्रा के खर्च भी महंगे हो सकते हैं। रिपोर्ट में कहा गया कि महंगे उर्वरक सीधे खाद्य महंगाई को बढ़ा सकते हैं।

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भारत के पास सिर्फ 4-5 दिन का रणनीतिक तेल भंडार

रिपोर्ट में सबसे बड़ी चिंता भारत के सीमित रणनीतिक तेल भंडार को लेकर जताई गई है। EY के अनुसार भारत के पास फिलहाल इतना ही कच्चा तेल स्टॉक है, जो केवल 4-5 दिनों की घरेलू जरूरत पूरी कर सकता है। तुलना में चीन और जापान जैसे देशों के पास कहीं ज्यादा बड़े रणनीतिक भंडार मौजूद हैं।

किन चीजों का रिजर्व बढ़ाने की सलाह?

EY ने सरकार को पांच प्रमुख क्षेत्रों में बड़े रिजर्व बनाने की सलाह दी है। इनमें कच्चा तेल , खाद, रेयर अर्थ मटेरियल, जरूरी दवाइयां और मेडिकल इंस्ट्रूमेंट शामिल है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इससे ग्लोबल सप्लाई चेन बाधित होने पर भी देश में जरूरी सामान की उपलब्धता बनी रह सकेगी।

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EY के अनुसार अप्रैल 2026 में वैश्विक कच्चे तेल की औसत कीमत 103.9 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जो जुलाई 2022 के बाद सबसे ऊंचा स्तर है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है।

चालू खाते का घाटा और महंगाई बढ़ने का खतरा

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अगर लंबे समय तक तेल महंगा बना रहा तो भारत का चालू खाता घाटा और महंगाई दोनों बढ़ सकते हैं। इससे रुपये पर दबाव और आर्थिक विकास की रफ्तार पर असर पड़ सकता है।

ऊर्जा आयात पर निर्भरता घटाने की सलाह

रिपोर्ट में भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक कॉरिडोर (IMEC) और इंडो-पैसिफिक रूट्स को मजबूत करने की जरूरत बताई गई है। इसके साथ ही इलेक्ट्रिक व्हीकल, ग्रीन एनर्जी और घरेलू ऊर्जा उत्पादन को तेजी से बढ़ाने पर जोर दिया गया है ताकि आयातित तेल पर निर्भरता कम हो सके।

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आर्थिक सुरक्षा अब उतनी ही जरूरी जितनी आर्थिक वृद्धि

EY का कहना है कि मौजूदा वैश्विक हालात दिखाते हैं कि अब केवल आर्थिक विकास काफी नहीं है, बल्कि “आर्थिक सुरक्षा” भी उतनी ही महत्वपूर्ण हो गई है। खासकर भारत जैसे बड़े आयात-निर्भर देशों के लिए भविष्य के झटकों से बचने की तैयारी बेहद जरूरी है।

इपनुट: ANI

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