पेट्रोल-डीजल की कमी नहीं फिर भी पंपों पर क्यों लग रही कतार, सरकार ने क्या बताया?
Petrol Diesel Crisis: केंद्र सरकार ने साफ कहा है सरकार के अनुसार भारत के पास घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त ईंधन भंडार मौजूद है। तो सवाल उठता है कि कहीं पंपों पर “डीजल नहीं है” तो कहीं “पेट्रोल नहीं है” के बोर्ड क्यों लटके हैं? पंपों पर कतारे क्यूं लग रही हैं?

पेट्रोल-डीजल की किल्लत सोशल मीडिया की सुर्खियां तो हैं ही, अखबारों और न्यूज चैनलों में भी छाई हुई हैं। किल्लत की खबर चाहे गोरखपुर से हो या देवरिया से, रत्नागिरि से हो या भावनगर से या फिर महराजगंज से हो या डिंगुरपुर से, हर खबर को HPCL ने अपने X हैंडल पर सिरे से खारिज कर दिया है। हालांकि, ऑयल मार्केटिंग कंपनियां भरपूर सप्लाई का लाख दावा करें, लेकिन हकीकत इससे जुदा है।
यही नहीं सरकार भी कह रही कि देश में पेट्रोल और डीजल की कोई कमी नहीं है तो सवाल उठता है कि कहीं पंपों पर “डीजल नहीं है” तो कहीं “पेट्रोल नहीं है” के बोर्ड क्यों लटके हैं? पंपों पर कतारे क्यूं लग रही हैं?
पंपों से कौन ले जा रहा पेट्रोल-डीजल
इसका जवाब भी सरकार ने ही दिया है। सरकार के मुताबिक असली समस्या ईंधन की कमी नहीं बल्कि “आर्बिट्रेज” है। यानी कुछ औद्योगिक उपभोक्ता सस्ते रिटेल फ्यूल का फायदा उठाने के लिए पेट्रोल पंपों से खरीदारी कर रहे हैं। सरकार ने बताया कि सरकारी तेल कंपनियां अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की बढ़ी कीमतों का पूरा बोझ ग्राहकों पर नहीं डाल रही हैं। इसी कारण रिटेल कीमतें अपेक्षाकृत कम बनी हुई हैं।

सरकार ने बताया कि निजी तेल कंपनियों के हाई-स्पीड डीजल (HSD) की बिक्री इस महीने करीब 38% घट गई है। इसकी वजह यह है कि ग्राहक अब सरकारी तेल कंपनियों के पंपों से ज्यादा खरीदारी कर रहे हैं। इसी तरह PSU कंपनियों की बल्क सप्लाई भी लगभग 29% घटी है, क्योंकि मांग अब रिटेल आउटलेट्स की ओर शिफ्ट हो रही है।
पेट्रोल-डीजल के दाम इस महीने 4 बार बढ़े
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और मई महीने में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में चार बार बढ़ोतरी के बीच केंद्र सरकार ने साफ कहा है सरकार के अनुसार भारत के पास घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त ईंधन भंडार मौजूद है। सरकार के आधिकारिक बयान के मुताबिक भारत की कुल रिफाइनिंग क्षमता इस समय 258.1 मिलियन टन प्रति वर्ष है। देश में 22 रिफाइनरियां संचालित हो रही हैं।

भारत की उत्पादन क्षमता घरेलू मांग से अधिक
वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में देश की कुल पेट्रोलियम खपत 243.2 मिलियन टन रही। इसका मतलब है कि भारत की उत्पादन क्षमता घरेलू मांग से अधिक है। सरकार ने यह भी बताया कि भारत ने पिछले वित्त वर्ष में 61.5 मिलियन टन पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात किया, जिससे भारत दुनिया के बड़े रिफाइंड फ्यूल निर्यातकों में शामिल है।

पेट्रोलियम मंत्री लगातार कर रहे निगरानी
केंद्र सरकार ने कहा कि पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी लगातार सरकारी तेल कंपनियों, राज्य सरकारों और उद्योग संगठनों के संपर्क में हैं ताकि देशभर में पेट्रोल-डीजल की सप्लाई बिना रुकावट जारी रहे। इसके अलावा पेट्रोलियम सचिव ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों के साथ बैठक भी की है। उद्योग संगठनों FICCI और CII के साथ भी हालात की समीक्षा की गई।
कालाबाजारी और जमाखोरी पर सख्ती
केंद्र सरकार ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कहा है कि विशेष जांच दल बनाए जाएं और कालाबाजारी पर कार्रवाई करें। तेल के अवैध भंडारण रोक लगाएं और फ्यूल डायवर्जन पर कड़ी निगरानी रखी जाए। यह कार्रवाई एस्मा के तहत की जाएगी। सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करें और पेट्रोल-डीजल की कमी से जुड़ी अफवाहों पर ध्यान न दें। अंतरराष्ट्रीय हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है और देश में फ्यूल की सप्लाई पूरी तरह सामान्य बनी हुई है।




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