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PF अकाउंट से हो सकता है 80 लाख रुपये तक का इंतजाम, समझ लीजिए पूरा गणित

नौकरीपेशा लोग कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) की अहमियत के बारे में बखूबी जानते हैं। अगर कर्मचारी अपने योगदान को बढ़ा दें तो करीब तीन दशक बाद 80 लाख रुपये की रकम का इंतजाम हो जाएगा। आइए समझते हैं पूरा गणित।

Mon, 27 April 2026 09:48 PMDeepak Kumar लाइव हिन्दुस्तान
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PF अकाउंट से हो सकता है 80 लाख रुपये तक का इंतजाम, समझ लीजिए पूरा गणित

नौकरीपेशा लोग कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) की अहमियत के बारे में बखूबी जानते हैं। EPF अकाउंट में कंपनी और कर्मचारी, दोनों का नियमित योगदान समय के साथ जमा होता रहता है और इस पर हर साल ब्याज भी जुड़ता है। EPF पर सालाना 8.25% की दर से ब्याज मिलता है, जो पूरे देश में 7 करोड़ से ज्यादा सब्सक्राइबर्स पर लागू होता है। हालांकि, अगर कर्मचारी अपने योगदान को बढ़ा दें तो करीब तीन दशक बाद 80 लाख रुपये की रकम का इंतजाम हो जाएगा। आइए समझते हैं पूरा गणित।

कितना होता है योगदान?

ज्यादा कर्मचारी हर महीने अपनी बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ते (DA) का 12% हिस्सा (अधिकतम ₹15,000 की सीमा तक) EPF में जमा करते हैं। नियोक्ता भी अपनी तरफ से 12% का बराबर योगदान देता है। नियाक्ता की ओर से दी गई रकम में से 3.67% हिस्सा EPF खाते में जमा होता है जबकि बाकी 8.33% हिस्सा कर्मचारी के पेंशन यानी EPS खाते में जमा किया जाता है।

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क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

अगर आप पहले से ही EPF में हर महीने लगभग ₹1200 का योगदान कर रहे हैं तो वॉलंटरी प्रोविडेंट फंड (VPF) के जरिए इस रकम को बढ़ाकर ₹5,000 तक पहुंचा सकते हैं। Rest The Case की संस्थापक और CEO श्रेया शर्मा ने मिंट को बताया- VPF कोई अलग अकाउंट नहीं है। यह आपके EPF का ही एक विस्तार है, जहां आप अनिवार्य 12% से अधिक अपनी मर्जी से योगदान करते हैं और इस पर FY 2025–26 के लिए 8.25% की बिल्कुल वही ब्याज दर मिलती है। मैच्योरिटी पर यह टैक्स-फ्री होता है और पुरानी टैक्स व्यवस्था के तहत इस पर अतिरिक्त 80C कटौती का लाभ भी मिलता है।

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उदाहरण से समझें

मान लीजिए कि दो लोग हर महीने 8.25% की दर से ₹5000 का योगदान ईपीएफ अकाउंट कर रहे हैं। पहला व्यक्ति 30 सालों तक पैसे को बिना छेड़े छोड़ देता है तो उसके पास लगभग ₹80 लाख का फंड जमा हो जाएगा। वहीं, दूसरा व्यक्ति हर 10 साल में पूरा फंड निकाल लेता है और प्रक्रिया फिर से शुरू करता है तो उसके पास कुल ₹28 लाख का फंड ही जमा हो पाएगा। श्रेया शर्मा के मुताबिक यह बड़ा फर्क इसलिए आता है क्योंकि 20–30 साल के दौरान मिलने वाला ब्याज एक बड़े जमा हुए बेस पर कंपाउंड होता है। जब आप पैसे निकालते हैं और फिर से शुरू करते हैं, तो आप हर बार उस बेस को खत्म कर देते हैं और फिर से एक छोटी रकम पर कंपाउंडिंग शुरू करते हैं।

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