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महंगाई की मार से बढ़ जाएगा EMI और खर्च? मिडिल क्लास क्या करे? क्या आगे और बढ़ सकती है मुश्किल?

भारत में महंगाई बढ़ने का खतरा फिर गहरा गया है। जानें पेट्रोल-डीजल, खाने-पीने की चीजों और EMI पर इसका क्या असर पड़ेगा और विशेषज्ञ निवेशकों को क्या सलाह दे रहे हैं।

Wed, 20 May 2026 09:46 AMDrigraj Madheshia लाइव हिन्दुस्तान
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महंगाई की मार से बढ़ जाएगा EMI और खर्च? मिडिल क्लास क्या करे? क्या आगे और बढ़ सकती है मुश्किल?

खाने-पीने की चीजें, कपड़े, मकान, पेट्रोल, डीजल, एलपीजी, सीएनजी और बिजली की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की जेब पर दबाव बढ़ाया है। वहीं थोक महंगाई (WPI) अप्रैल में उछलकर 8.3% पर पहुंच गई, जो 42 महीने का उच्च स्तर है। इसकी बड़ी वजह महंगा कच्चा तेल और ईंधन कीमतों में तेजी रही।

दूसरी ओर खुदरा महंगाई अक्टूबर 2024 से RBI के 2% से 6% के लक्ष्य दायरे में बनी हुई थी, लेकिन अब बढ़ती ऊर्जा कीमतों और पश्चिम एशिया संकट ने हालात बदलने शुरू कर दिए हैं। अप्रैल 2026 में खुदरा महंगाई बढ़कर 3.48% पर पहुंच गई, जो 13 महीनों का उच्च स्तर है।

क्यों बढ़ रही है महंगाई?

अमेरिका-ईरान तनाव और होर्मुज स्ट्रेट में सप्लाई में रुकावटों के कारण तेल और गैस महंगे बने हुए हैं। अगर यह संकट लंबा चला, तो सरकार को पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतें और बढ़ानी पड़ सकती हैं। ऊर्जा महंगी होने का असर सिर्फ ईंधन तक सीमित नहीं रहता।

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इससे ट्रांसपोर्ट महंगा होता है, खाने-पीने की चीजों की कीमत बढ़ती है, फैक्ट्रियों की लागत बढ़ती है और खेती और उर्वरक महंगे होते हैं। यानी लगभग हर चीज पर महंगाई का असर दिखता है।

इस वित्तवर्ष में महंगाई कितनी रह सकती है?

डीबीएस बैंक की वरिष्ठ अर्थशास्त्री राधिका राव के मुताबिक इस वित्तवर्ष में औसत खुदरा महंगाई 4.9% रह सकती है। वहीं पिरामल ग्रुप के मुख्य अर्थशास्त्री देबोपम चौधरी का मानना है कि अगर कच्चा तेल लंबे समय तक महंगा रहा, तो CPI महंगाई 5.2% तक जा सकती है।

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आपकी जेब पर क्या असर होगा?

1. रोजमर्रा का खर्च बढ़ेगा: महंगाई बढ़ने से राशन, दूध-सब्जियां, बिजली, स्कूल फीस, मेडिकल खर्च, यात्रा खर्च सब महंगे हो सकते हैं।

2. EMI महंगी हो सकती है: अगर महंगाई लगातार बढ़ती है, तो RBI ब्याज दरें बढ़ा सकता है। इससे होम लोन, EMI,कार लोन, पर्सनल लोन महंगे हो सकते हैं।

3. निवेश पर दबाव: महंगाई बढ़ने से कंपनियों की लागत बढ़ती है, जिससे मुनाफा प्रभावित होता है। इसका असर शेयर बाजार रिटर्न पर भी पड़ सकता है।

अब क्या करना चाहिए?

वरूण फतेहपुरिया के अनुसार मिडिल क्लास पर महंगाई का सबसे ज्यादा असर पड़ता है, क्योंकि उनकी कमाई का बड़ा हिस्सा जरूरी खर्चों में चला जाता है।

सेबी में रजिस्टर्ड रिसर्च एनालिस्ट और स्मॉलकेस के फंड मैनेजर शशांक उडुपा ने कहा कि बढ़ती महंगाई के माहौल में लोगों को अपनी लाइफस्टाइल के खर्च और ईएमआई को जल्द से जल्द कम करने की कोशिश करनी चाहिए।

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उन्होंने गैर-जरूरी खर्चों पर लगाम और ज्यादा बचत करने की सलाह दी है। केवल FD पर निर्भर न रहें बल्कि SIP जारी रखें। उन्होंने गोल्ड में कुछ निवेश रखने और बॉन्ड और डायवर्सिफायड इन्वेस्टमेंट विकल्प अपनाने की सलाह दी है। सोना महंगाई के खिलाफ अच्छा हेज साबित हो सकता है। वहीं डॉलर आधारित निवेश भी पोर्टफोलियो को सुरक्षित रखने में मदद कर सकते हैं।

क्या आगे और मुश्किल बढ़ सकती है?

मनीकंट्रोल रिपोर्ट के अनुसार, वित्त मंत्रालय को उम्मीद है कि सीपीआई-आधारित मुद्रास्फीति, या खुदरा मुद्रास्फीति, वित्त वर्ष 27 में 5.5% से 6% की सीमा में औसत होगी। ऐसे में अगर तेल महंगा बना रहा, मानसून कमजोर रहा और खाद संकट गहराया तो खाद्य महंगाई और बढ़ सकती है। ऐसे में आने वाले महीनों में आम लोगों पर खर्च का दबाव और बढ़ने की आशंका है।

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