3 big shocks are coming to india simultaneously balance of payments is deteriorating cea warned what impacts on you भारत को 3 बड़े झटके एक साथ लग रहे हैं, बिगड़ रहा भुगतान संतुलन, सीईए ने किया आगाह, आम आदमी पर क्या पड़ेगा असर?, Business Hindi News - Hindustan
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भारत को 3 बड़े झटके एक साथ लग रहे हैं, बिगड़ रहा भुगतान संतुलन, सीईए ने किया आगाह, आम आदमी पर क्या पड़ेगा असर?

भारत एक बड़े आर्थिक तूफान से गुजर रहा है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, रुपये की गिरावट और कम होता विदेशी निवेश, सब मिलकर भुगतान संतुलन को चुनौती दे रहे हैं। स्थिति गंभीर है, लेकिन देश इससे निपटने की पूरी कोशिश कर रहा है। हालांकि, इसका असर आम आदमी की जेब पर जरूर पड़ेगा।

Wed, 20 May 2026 05:47 AMDrigraj Madheshia लाइव हिन्दुस्तान
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भारत को 3 बड़े झटके एक साथ लग रहे हैं, बिगड़ रहा भुगतान संतुलन, सीईए ने किया आगाह, आम आदमी पर क्या पड़ेगा असर?

भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) वी. अनंत नागेश्वरन ने कहा है कि पश्चिम एशिया का चल रहा संकट भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए 'भुगतान संतुलन की एक वास्तविक दबाव परीक्षा' है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब देश कई मोर्चों पर आर्थिक दबाव झेल रहा है। भारत पर तीन बड़े झटके एक साथ आ रहे हैं...

पहला झटका: तेल, सोना, खाद जैसी जरूरी चीजों के दाम अंतरराष्ट्रीय बाजार में बहुत बढ़ गए हैं।

दूसरा झटका: विदेशी निवेशक (FPI) लगातार भारतीय बाजार से अपना पैसा निकाल रहे हैं।

तीसरा झटका: आयात तो बढ़ रहा है, लेकिन निर्यात में कमी आ रही है। इसका सीधा असर रुपये पर पड़ रहा है और उसकी कीमत गिर रही है।

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क्या है 'भुगतान संतुलन' और यह इतना जरूरी क्यों है?

यह है एक 'हिसाब-किताब' की तरह है। हर देश का भुगतान संतुलन यानी बैलेंस ऑफ पेमेंट (BoP) एक रसीद-बही है, जो बताती है कि देश के अंदर कितना विदेशी पैसा आया और कितना गया।

पैसा कब आता है और कब जाता है?

जब भारत किसी दूसरे देश को सामान बेचता है, यानी कोई निर्यात करता है। या कोई विदेशी निवेशक यहां पैसा लगाता है, या फिर प्रवासी भारतीय (NRI) परिवार को पैसे भेजते हैं। जब भारत दूसरे देशों से तेल, सोना, मशीनें खरीदता है यानी इंपोर्ट करता है। या फिर भारतीय विदेश यात्रा या पढ़ाई पर पैसा खर्च करते हैं।

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अगर आने वाला पैसा जाने वाले पैसे से अधिक है, तो भुगतान संतुलन अच्छा है, लेकिन अगर जाने वाला पैसा अधिक है, तो यह मुश्किल पैदा कर देता है।

इसका असर आम आदमी पर क्यों पड़ेगा?

पहला महंगाई बढ़ेगी: क्योंकि रुपया कमजोर हो रहा है। तेल-गैस जैसी चीजों का दाम बढ़ रहा है। इससे आपको पेट्रोल-डीजल, सब्जियों से लेकर हर चीज के दाम बढ़कर मिल सकते हैं। डॉलर की बढ़ती मांग के चलते रुपया और कमजोर हो सकता है, जिससे विदेशी सामान और महंगा पड़ेगा।

क्या कोई बड़ी समस्या है?

सीईए नागेश्वरन ने चेतावनी दी है कि यह सिर्फ एक अस्थायी उतार-चढ़ाव नहीं है। पश्चिम एशिया में संकट के कारण तेल की सप्लाई ठप हो गई है और होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से कीमतें 60% तक बढ़ गई हैं।

भारत अपनी जरूरत का 87% कच्चा तेल आयात करता है, जिसका लगभग आधा हिस्सा इसी अस्थिर क्षेत्र से आता है। वहीं, एलपीजी का 90% से अधिक इंपोर्ट और भारत को मिलने वाला 38% रेमिटेंस भी इसी क्षेत्र पर निर्भर है। यानी वहां का संकट सीधे भारत की जेब पर भारी पड़ रहा है।

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क्या भारत इस संकट से बच सकता है?

सीईए ने यह भी कहा कि भारत पहले से कहीं अधिक तैयार है। केंद्र सरकार ने विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत कर रखा है, जो बढ़कर 701 अरब डॉलर हो गया है। इसके अलावा, सरकार ने इन्फ्रास्ट्रक्चर और सुधारों पर लगातार ध्यान दिया है, जिससे अर्थव्यवस्था को इस तूफान का सामना करने में मदद मिलेगी।

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