8th Pay Commission latest updates, gov employee body raised 7 issues in 49th annual meeting सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर! 8वें वेतन आयोग और पुरानी पेंशन पर आया बड़ा अपडेट, Business Hindi News - Hindustan
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सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर! 8वें वेतन आयोग और पुरानी पेंशन पर आया बड़ा अपडेट

केंद्र सरकार के कर्मचारियों की 49वीं वार्षिक बैठक में 8वें वेतन आयोग, पुरानी पेंशन योजना (OPS), बढ़ते कोर्ट केस, प्रमोशन नियम और कर्मचारियों की कमी जैसे कई बड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। संगठन ने न्यूनतम वेतन बढ़ाने, पुरानी पेंशन, लंबित मामलों को जल्दी निपटाने और खाली पदों पर भर्ती करने की मांग की।

Mon, 18 May 2026 02:18 PMSarveshwar Pathak लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर! 8वें वेतन आयोग और पुरानी पेंशन पर आया बड़ा अपडेट

देश के लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। पिछले हफ्ते कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन की अध्यक्षता में राष्ट्रीय परिषद-संयुक्त परामर्श तंत्र (NC-JCM) की 49वीं वार्षिक बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में कर्मचारियों के प्रतिनिधि शिव गोपाल मिश्रा और 30 अन्य सदस्यों ने सरकार के सामने अपनी उन मांगों को रखा था, जो लंबे समय से पेंडिंग हैं। इस उच्च स्तरीय बैठक में मुख्य रूप से 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission), पुरानी पेंशन योजना (OPS) को वापस लाने और विभागों की मनमानी के कारण अदालतों में बढ़ते मुकदमों जैसे गंभीर मुद्दों पर चर्चा हुई। आइए आसान शब्दों में जानते हैं कि कर्मचारियों की वे 7 मुख्य मांगें क्या हैं, जो आपके वेतन, पेंशन और नौकरी की शर्तों को सीधे प्रभावित कर सकती हैं।

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1- 8वें वेतन आयोग के लिए मांग पत्र तैयार

कर्मचारी संगठनों (Staff Side) ने कैबिनेट सचिव को बताया कि उन्होंने 8वें वेतन आयोग के लिए अपनी मांगों का विस्तृत मसौदा सौंप दिया है। इसमें कर्मचारियों के न्यूनतम वेतन (Minimum Pay) को बढ़ाने, फिटमेंट फैक्टर (Fitment Factor) को तय करने, सालाना इंक्रीमेंट (वेतन वृद्धि) की दर और प्रमोशन नीति में सुधार जैसे कई महत्वपूर्ण सुझाव शामिल हैं। कर्मचारियों ने मांग की है कि इस पर सरकार उनके साथ लगातार बातचीत जारी रखे।

2- 8वें वेतन आयोग के दायरे में आए पुरानी पेंशन (OPS)

बैठक में 'पुरानी पेंशन योजना' (OPS) को दोबारा लागू करने की मांग सबसे प्रमुखता से उठी। कर्मचारियों ने कैबिनेट सचिव से अनुरोध किया है कि वे केंद्र सरकार से कहकर 8वें वेतन आयोग के 'नियम और शर्तों' (Terms of Reference) में संशोधन करवाएं। इसके तहत आयोग को केवल नया वेतन तय करने की जिम्मेदारी न दी जाए, बल्कि इसमें मौजूदा पेंशनभोगियों की पेंशन में संशोधन, कम्यूटेड पेंशन की बहाली और पुरानी पेंशन (OPS) को वापस लाने के मुद्दे को भी अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए।

3- अदालती मुकदमों की बढ़ती संख्या पर चिंता

कर्मचारी संगठनों ने इस बात पर गहरा दुख जताया कि कर्मचारियों से जुड़े सेवा मामलों (Service Matters) के हजारों मुकदमे कैट (CAT), हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में सालों से लंबित हैं।

नियम का उल्लंघन:- संगठनों का आरोप है कि सरकार की 'राष्ट्रीय मुकदमा नीति' (National Litigation Policy) का उल्लंघन करते हुए विभिन्न मंत्रालय और विभाग हर छोटे-मोटे मामले को लेकर अदालतों में अपील या रिव्यू पिटीशन दायर कर देते हैं। इससे कर्मचारियों का मनोबल टूटता है।

5वें वेतन आयोग का हवाला:- कर्मचारियों ने 5वें वेतन आयोग की उस सिफारिश को लागू करने की मांग की, जिसमें कहा गया था कि "यदि अदालत या सरकार किसी एक मामले में कोई राहत या फैसला देती है, तो वही फैसला उसी तरह के बाकी सभी समान मामलों पर भी लागू होना चाहिए।" इसके लिए बाकी कर्मचारियों को दोबारा अदालत जाने के लिए मजबूर न किया जाए।

4- एम्स (AIIMS) कर्मचारियों के लिए आदेशों में देरी

कर्मचारियों ने एक बेहद संवेदनशील मुद्दा उठाया कि 'कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग' (DoPT) का एक स्पष्ट नियम है, जिसके तहत पति-पत्नी (Spouse) दोनों के सरकारी नौकरी में होने पर उन्हें एक ही शहर/स्टेशन पर पोस्टिंग दी जानी चाहिए। लेकिन, देश के विभिन्न एम्स (AIIMS) संस्थानों में इस नियम का पालन नहीं किया जा रहा है। पारिवारिक मजबूरियों के कारण कई महिला कर्मचारियों को अपनी नौकरी तक छोड़नी पड़ी है। डिमांड की गई है कि कैबिनेट सचिव सभी एम्स को इस नियम का सख्ती से पालन करने का निर्देश दें।

5- 'आर्बिट्रेशन अवार्ड्स' (मध्यस्थता फैसलों) को लागू न करना

कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को सबसे ज्यादा परेशान करने वाला एक मुद्दा यह है कि 'आर्बिट्रेशन अवार्ड्स' (मध्यस्थता के तहत तय किए गए वित्तीय लाभ) सालों से धूल फांक रहे हैं और सरकार उन्हें लागू नहीं कर रही है। कर्मचारी संघ ने कैबिनेट सचिव से इन सभी फैसलों को तुरंत अमली जामा पहनाने की मांग की है।

6- प्रमोशन और इंक्रीमेंट नीति में बदलाव की मांग

वर्तमान नियमों (CCS RP Rules 2016 के नियम 10) के मुताबिक, किसी कर्मचारी को प्रमोशन मिलने के बाद अगला इंक्रीमेंट पाने के लिए कम से कम 6 महीने की सेवा पूरी करनी होती है।

पेंच कहां है? इस 6 महीने की अवधि के दौरान अगर किसी कर्मचारी की एक भी दिन की छुट्टी को 'डीज-नॉन' (Dies-non- वह अवधि जिसे सेवा में नहीं गिना जाता) घोषित कर दिया जाता है, तो उसका इंक्रीमेंट आगे खिसक जाता है।

डिमांड:- कर्मचारियों ने मांग की है कि इस 'डीज-नॉन' क्लॉज को इंक्रीमेंट रोकने का आधार न बनाया जाए और 6 महीने की जगह नियम में '180 दिन' शब्द का इस्तेमाल किया जाए।

7- काम का दबाव कम करने के लिए हो भर्ती

कर्मचारियों ने कहा कि रेलवे जैसे बड़े विभागों में काम का बोझ और नए प्रोजेक्ट्स लगातार बढ़ रहे हैं, लेकिन उस अनुपात में नए पदों को मंजूरी नहीं दी जा रही है। मैनपावर की भारी कमी के कारण मौजूदा स्टॉफ पर काम का अत्यधिक मानसिक और शारीरिक दबाव है। इस कमी को पूरा करने के लिए प्रशासन आउटसोर्सिंग और प्राइवेटाइजेशन का सहारा ले रहा है, जिसे तुरंत रोका जाना चाहिए और खाली पड़े सभी पदों पर स्थायी (पक्की) नियुक्तियां की जानी चाहिए।

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कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में हुई यह बैठक इस मायने में बेहद खास है, क्योंकि यह 8वें वेतन आयोग के गठन से ठीक पहले कर्मचारियों की बुनियादी समस्याओं को सीधे सरकार के शीर्ष स्तर तक पहुंचाती है। अगर सरकार इन मांगों पर सकारात्मक रुख अपनाती है, तो आने वाले दिनों में केंद्रीय कर्मचारियों के वेतन, भत्तों और कार्यशैली में बड़े और अच्छे बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

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