2 दिन में सेंसेक्स 2400 और निफ्टी 600 अंक लुढ़का, 4 दिन में 11 लाख करोड़ डूबे, कौन हैं जिम्मेदार?
Why Stock Market Crash: शेयर मार्केट की गिरावट से चार दिन में निवेशकों के 11 लाख करोड़ रुपये डूब चुके हैं। आज भी सेंसेक्स करीब 1100 अंक से अधिक टूटकर 74894 तक पहुंच गया, जबकि निफ्टी 50 भी 23,493 के स्तर तक फिसल गया। आइए समझें बाजार की गिरावट के पीछे क्या-क्या कारण हैं…

भारतीय शेयर मार्केट में बिकवाली का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। मंगलवार, 12 मई को बीएसई का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स और एनएसई का 50 शेयरों वाला बेंचमार्क इंडेक्स निफ्टी लगातार चौथे ट्रेडिंग सेशन में गिरावट दर्ज कर रहे हैं। चार दिन में निवेशकों के 11 लाख करोड़ रुपये डूब गए। आज भी सेंसेक्स करीब 1100 अंक से अधिक टूटकर 74894 तक पहुंच गया, जबकि निफ्टी 50 भी 23,493 के स्तर तक फिसल गया। आइए समझें बाजार की गिरावट के पीछे क्या-क्या कारण हैं…
शेयर मार्केट में गिरावट के 6 बड़े कारण
1-प्रधानमंत्री मोदी की अपील का असर

पीएम मोदी की पेट्रोल-डीजल और गैस की बचत तथा सोना खरीदने से बचने की अपील ने मार्केट भावना को प्रभावित किया है। बाजार का रिएक्शन ठीक नहीं रहा। निवेशकों को आशंका है कि इससे उपभोग आधारित सेक्टरों पर असर पड़ सकता है। इसका सबसे ज्यादा दबाव ज्वेलरी, ट्रैवल, होटल और लग्जरी खपत से जुड़े शेयरों पर दिखाई दे रहा है।
2-अमेरिका-ईरान तनाव से बढ़ी अनिश्चितता

4-रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर
भारतीय रुपया गिरकर 95.63 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया। साल की शुरुआत से अब तक रुपया 6% से ज्यादा कमजोर हो चुका है। कमजोर करेंसी से विदेशी निवेशकों का भरोसा और कमजोर हुआ है, जिससे मार्केट पर अतिरिक्त दबाव बना है।

अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव ने ग्लोबल मार्केट में अस्थिरता बढ़ा दी है। सीजफायर और बातचीत की कोशिशों के बावजूद अभी तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकला है। तेल की ऊंची कीमतें और युद्ध की आशंका निवेशकों को जोखिम लेने से रोक रही हैं, जिसके कारण हर तेजी के बाद मुनाफावसूली बढ़ रही है।
3-100 डॉलर के ऊपर बना हुआ कच्चा तेल

ब्रेंट क्रूड लंबे समय से 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बना हुआ है। ऊंचे कच्चे तेल के दाम भारत जैसी आयात पर निर्भर अर्थव्यवस्थाओं के लिए बड़ा जोखिम माने जाते हैं।इससे महंगाई बढ़ सकती है, रुपये पर दबाव बढ़ सकता है और आर्थिक विकास प्रभावित हो सकता है।
5-विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) लगातार भारतीय शेयर बेच रहे हैं। मई में अब तक वे करीब ₹19,500 करोड़ की बिकवाली कर चुके हैं। पिछले जुलाई से अब तक विदेशी निवेशकों ने भारतीय मार्केट से लगभग ₹4.5 लाख करोड़ निकाले हैं, जिससे मार्केट में कमजोरी बढ़ी है।
6-मजबूत डॉलर और बढ़ती बॉन्ड यील्ड

अमेरिकी डॉलर और यूएस 10-साल के बॉन्ड यील्ड में तेजी भी उभरते मार्केटों के लिए चिंता का कारण बनी हुई है। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड 4.42% तक पहुंच गई है, जिससे निवेशक सुरक्षित अमेरिकी एसेट्स की ओर रुख कर रहे हैं। इससे भारत जैसे मार्केटों से पूंजी निकल रही है।
आगे क्या?
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक अमेरिका-ईरान तनाव कम नहीं होता, कच्चे तेल की कीमतें स्थिर नहीं होतीं, विदेशी बिकवाली धीमी नहीं पड़ती तब तक भारतीय मार्केट में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।




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