अगर 5 मिनट बिना मोबाइल के नहीं रह सकते तो सावधान! यह बीमारी है, बिना देर किए डॉक्टर से मिलें
इस स्थिति को मनोरोग चिकित्सक ‘फैंटम वाइब्रेशन सिंड्रोम’ कहते हैं। इसके शिकार लोगों को काम के बीच, नींद के दौरान या थोड़ी-थोड़ी देर में आभास होता रहता है कि उनका फोन बज रहा है। इस कारण वे बार-बार अपना फोन चेक करते रहते हैं।

अगर आपको अचानक लगता है कि आपके फोन की घंटी बज रही है या फिर जेब में रखा फोन वाइब्रेट हो रहा है। लेकिन जब आप चेक करते हैं तो न तो फोन की घंटी बजी और न ही कोई मैसेज आया है। अगर ये सब आपके साथ आए दिन हो रहा है तो आप जरा सतर्क और सजग हो जाएं। क्योंकि बार-बार इस तरह का लक्षण दिखना या फिर बार-बार फोन पर व्हाट्सअप मैसेज चेक करने की आदत आपको मनोरोगी होने की तरफ इशारा कर रही है।
इस स्थिति को मनोरोग चिकित्सक ‘फैंटम वाइब्रेशन सिंड्रोम’ कहते हैं। इसके शिकार लोगों को काम के बीच, नींद के दौरान या थोड़ी-थोड़ी देर में आभास होता रहता है कि उनका फोन बज रहा है। इस कारण वे बार-बार अपना फोन चेक करते रहते हैं।
फैंटम वाइब्रेशन सिंड्रोम
जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (मायागंज अस्पताल) के मनोरोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. कुमार गौरव बताते हैं कि फैंटम वाइब्रेशन सिंड्रोम का शिकार इंसान बार-बार अपना फोन चेक करता है और उसे लगता है कि उसके फोन की घंटी बजी है या फिर किसी मैसेज आने का नोटिफिकेशन रिंग बजा है। जबकि हकीकत में ऐसा होता नहीं है। ऐसा होने की स्थिति में उसे फोन से चिपके रहने की आदत हो जाती है। जेएलएनएमसीएच के मनोरोग विभाग में हर माह औसतन तीन से चार की संख्या में फैंटम वाइब्रेशन सिंड्रोम के मरीज इलाज के लिए आ रहे हैं। बीते दो से तीन साल से फैंटम वाइब्रेशन सिंड्रोम के मामले देखने को मिल रहे हैं। ऐसा नहीं है कि फैंटम वाइब्रेशन सिंड्रोम सिर्फ बड़ों में ही पाई जाती है। फैंटम वाइब्रेशन सिंड्रोम की जद में अब बच्चे व किशोर भी हैं।
भागलपुर, वरीय संवाददाता
मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. कुमार गौरव बताते हैं कि अगर कोई व्यक्ति बिना फोन, लैपटॉप या फिर कंप्यूटर के पांच मिनट भी नहीं रह पा रहा है तो वो इस स्थिति को संभाल लें या फिर चिकित्सक से मिले। इसके अलावा याददाश्त में कमी, मन का चंचल रहना, चिड़चिड़ापन और हमेशा ही अपने मोबाइल फोन पर कॉल, व्हाट्सअप, इंस्टाग्राम, फेसबुक आदि का मैसेज या नोटिफिकेशन आने का आभास होना ही फैंटम वाइब्रेशन के प्रमुख लक्षण हैं। बच्चे या किशोर को फोन, लैपटॉप या फिर कंप्यूटर से दूर कर दिया जाए तो वे आक्रामक हो जाते हैं।
ऐसे मरीजों में मिल रही एंजाइटी डिसऑर्डर की समस्या
सदर अस्पताल के मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. पंकज कुमार मनस्वी कहते हैं कि नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, फैंटम वाइब्रेशन सिंड्रोम के कारण लोगों में एंजाइटी डिसऑर्डर की समस्या तेजी से बढ़ रही है। इस अवस्था को टैक्टाइल हेलुसिनेशन कहते हैं। यानी इसमें ऐसी चीज को लोग महसूस करते हैं, जो कि असल में होती ही नहीं है। फोन के अधिक इस्तेमाल व इस पर बढ़ रही लोगों की निर्भरता के कारण लोग इस सिंड्रोम का शिकार बन रहे हैं। अब तो कुछ में ओवर विजिलेंस की समस्या भी फैंटम वाइब्रेशन सिंड्रोम के मरीजों में मिलने लगी है।




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