बाकी का 61 लाख कहां से लाए? प्रशांत किशोर ने मंगल पांडेय से फिर मांगा दिल्ली वाले फ्लैट का हिसाब
प्रशांत किशोर ने एक बार फिर से मंत्री मंगल पांडेय से कोरोना काल में दिल्ली में खरीदे गए फ्लैट का हिसाब मांगा है। उन्होने कहा कि 25 लाख रुपए दिलीप जायसवाल से लेने की बात उन्होने स्वीकारी है। लेकिन ये बताए कि 81 लाख वाले फ्लैट के लिए 61 लाख रुपए कहां से आए थे।

जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने एक बार फिर से नीतीश सरकार में मंत्री मंगल पांडे से कोरोना काल में दिल्ली खरीदे गए फ्लैट का हिसाब मांगा है। नालंदा में मीडिया से बातचीत में उन्होने कहा कि पहली बात ये कि मंत्री मंगल पांडेय ने ये स्वीकारा है, कि बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने उन्हें चेक के माध्यम से आरटीजीएस के जरिए 25 लाख रुपए दिए थे। वो पैसा जायसवाल ने मंगल पांडे के पिता के खाते में दिया था। फ्लैट की कीमत है 81 लाख। हमने सिर्फ 25 लाख की जानकारी दी है। मंगल पांडे कह रहे है कि उन्होने जो 25 कर्ज के तौर पर लिए थे, जो वापस कर दिए हैं। लेकिन बाकी के 61 लाख रुपए कहां से आए ये बताएं।
पीके ने कहा कि वो बताएं कि 61 लाख कहां से आए, नहीं तो हम वो भी जारी करेंगे, उनको लग रहा है कि हमको पता नहीं है। अब मंगल पांडे फंस गए हैं, उन्होने ये स्वीकार किया, कि उन्होने 25 लाख लिए थे, लेकिन अपने खाते में लेने के बजाय पिता जी के अकाउंट में क्यों लिए, फिर वहां से छिपाकर पत्नी के खाते में क्यों दिए। सब बातें मान भी लें, तो ये बताइए कि बाकी का 61 लाख कहां से आया। नहीं तो 7 दिन के अंदर हम बता देंगे
आपको बता दें प्रशांत किशोर ने स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय पर दिलीप जायसवाल से पैसा लेकर दिल्ली के द्वारका में फ्लैट खरीदने का आरोप लगाया था। पीके ने दावा किया कि कहा कि 2019 में कोरोना काल में पैसा लिया और अगले साल 2020 में जायसवाल के मेडिकल कॉलेज को डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा दिया गया। इससे उन्हें खुद डिग्री देने का अधिकार मिल गया। जन सुराज पार्टी के संस्थापक ने कहा कि दिलीप जायसवाल ने 25 लाख मंत्री मंगल पांडेय के पिता अवधेश पांडेय के खाते में भेजा। उन्होंने यह पैसा मंगल पांडेय की पत्नी एवं अपनी बहू उर्मिला पांडेय के खाते में ट्रांसफर किए थे, जिन्होंने इस पैसे को बिल्डर को दिया। खरीदारी में गवाह भी दिलीप जायसवाल थे।
वहीं इन आरोप के जवाब में मंत्री मंगल पांडेय कह चुके हैं कि जिस यूनिवर्सिटी की मान्यता दिलाने की बात पीके कर रहे हैं उसमें स्वास्थ्य विभाग की कोई भूमिका नहीं होती है। पांडेय ने यह भी कहा कि दिलीप जायसवाल से लिया 25 लाख रुपये का पूरा लोन उन्होंने चुका दिया था। आज से पौने 5 साल पहले खाते से पूरा पैसा वापस कर दिया गया। लोन की पूरी राशि चेक से ली गयी थी और चेक से ही पिताजी के खाते से पूरा पैसा वापस किया गया।
उन्होने कहा कि जहां तक एंबुलेंस खरीद की बात है तो उसकी एक प्रक्रिया है। इसके लिए निविदा होती है, जो संबंधित पक्ष होता है, वह निविदा देता है। इसके निष्पादन की भी एक प्रक्रिया है। निष्पादन की प्रक्रिया से यदि कोई सहमत नहीं होता है तो वह न्यायालय जाता है। उन्होंने कहा कि इस खरीद मामले में भी लोग हाई कोर्ट गए हुए हैं। मामला अदालत में है। मैंने विभाग से इस संबंध में जानकारी ली है, अभी तक इसमें कोई भुगतान नहीं हुआ है।




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