पब्लिक ओपिनियन: वोटर लिस्ट रिवीजन सही, लेकिन टाइमिंग और प्रॉसेस पर सवाल
बिहार में जारी वोटर लिस्ट रिवीजन पर जनता की राय मिलीजुली है। गहन विशेष पुनरीक्षण कोई कई लोगों ने सही बताया है, लेकिन कुछ चिंताएं भी जाहिर की है। साथ ही घर-घर बीएलओ के नहीं पहुंचने की बात भी सामने आई है।

बिहार में जारी वोटर लिस्ट रिवीजन को लेकर जनता में अलग-अलग राय है। चुनाव आयोग के इस अभियान को सही भी बता रहे हैं, लेकिन कुछ चिंताएं भी जाहिर कर रहे है। पूर्णिया के चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष राजेंद्र संचेती ने कहा कि राज्य में चुनाव आयोग द्वारा गहन विशेष पुनरीक्षण किया जा रहा है और इसके लिए बीएलओ को अधिकृत किया गया है, लेकिन व्यवसायियों को ये नहीं मालूम है कि उन्हें कहां और कैसे अपने सदस्यों की सूची देनी है। इस सूचना के अभाव में बहुत से व्यापारियों का नाम कट न जाए। इस पर प्रशासन को ध्यान देने की जरूरत है।
बिहार पंचायत नगर प्रारंभिक शिक्षक संघ के सीतामढ़ी जिलाध्यक्ष प्रकाश कुमार ने कहा कि वोटर लिस्ट वेरिफिकेशन हमेशा से होता रहा है। प्रमाण पत्र संलग्न करना है, फोटो लगाना है, यहां तक तो ठीक है, लेकिन जब मतदाता बन गए हैं तो बार-बार प्रमाण पत्र क्यों देना पड़ रहा है। अगर यही करना है तो निर्वाचन आयोग और भारत सरकार को ये करना चाहिए कि जब हमारे बच्चे का जन्म होता है तो उसी समय भारतीय नागरिकता पंजी बनाया जाए और उसमें बच्चे का नाम दर्ज किया जाए। इससे उसको भविष्य में परेशानी नहीं होगी। और न ही विदेशी हमारे यहां आकर नागरिकता प्राप्त कर सकते हैं। इसलिए मेरा आग्रह है कि भारत सरकार इस पर विचार करे।
उत्तर बिहार वाणिज्य एवं उद्योग परिषद के पूर्व महामंत्री सज्जन शर्मा ने कहा कि सर्वोच्च न्यायल ने भी वोटर लिस्ट रिवीजन पर कोई टिप्पणी नहीं है और कहा कि ये कार्य होना चाहिए, ये सरकार की सतत प्रक्रिया है। जो अपने मतदाता का समय-समय पर पुनरीक्षण करती है। लेकिन जो समय सरकार ने चयन किया है और जो सरकारी काम करने की आज तक की पद्धति रही है, उससे मन में संशय है कि ये कार्य पूर्ण होगा या नहीं होगा। हमारा अनुरोध है कि कोई भी मतदाता इससे वंचित न रहे। इस प्रक्रिया की पूरी मॉनिटरिंग करते हुए समय से पूर्व संपन्न कराने की कृपा करें। सरकार अगर ठान ले तो उसके लिए कोई भी कार्य बड़ा नहीं है। क्योंकि उसके पास सारे तंत्र हैं। ये सरकार की मंशा उसकी इच्छाशक्ति पर निर्भर करता है। हमें राज्य सरकार पर भरोसा है, कि वो निश्चित तौर पर इसमें सफल होगी।
मुजफ्फरपुर के सब्जी विक्रेता शिव कुमार ने कहा कि वोटर लिस्ट वेरिफिकेशन बहुत अच्छा है, इससे गलत लोगों का नाम कट जाएगा। एक-एक आदमी का चार-चार जगह पहचान पत्र में नाम है। जो वोट डाल देते हैं, वो वोगस हो जाता है। हालांकि, उन्होंने जोड़ा कि एक चीज गलत हो रहा है। बात घर-घर वेरिफिकेशन की कही गई थी, लेकिन पब्लिक को ऑफिस में बुलाया जा रहा है और परेशान किया जा रहा है। हमारी मांग है कि घर-घर जाकर वेरिफिकेशन हो। हर किसी को एक जगह वोट देने का अधिकार है, चार जगह नहीं है, जिनके पास प्रमाण पत्र हैं उनका वेरिफिकेशन ठीक होना चाहिए।
ई-रिक्शा चालक कुणाल ने बताया कि वोटर लिस्ट वेरिफिकेशन ठीक भी है, गलत भी है। हम पढ़े-लिखे नहीं है, तो हमारे पास आधार कार्ड, पैन कार्ड यही सब रहेगा। हम और हमारे पापा पढ़े-लिखे नहीं है, तो कहां से जन्म प्रमाण पत्र लाएंगे।




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