बिहार में 35 लाख वोटर का लिस्ट से कटेगा नाम! 20 दिन में 83 परसेंट रिवीजन फॉर्म जमा
चुनाव आयोग के ताजे आंकडों के मुताबिक विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के दौरान अब तक 1.59 प्रतिशत मतदाता मृत पाए गए हैं जबकि 2.2 प्रतिशत मतदाता स्थायी रूप से अन्य स्थानों पर जा चुके हैं। इसके साथ ही 0.73 प्रतिशत व्यक्ति एक से अधिक स्थानों पर पंजीकृत पाए गए हैं।

बिहार में चुनाव आयोग की ओर से जारी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) के तहत 35.5 लाख मतदाताओं के नाम हटाए जाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। चुनाव आयोग के ताजे आंकडों के मुताबिक विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के दौरान अब तक 1.59 प्रतिशत मतदाता मृत पाए गए हैं जबकि 2.2 प्रतिशत मतदाता स्थायी रूप से अन्य स्थानों पर जा चुके हैं। इसके साथ ही 0.73 प्रतिशत व्यक्ति एक से अधिक स्थानों पर पंजीकृत पाए गए हैं। जिनका कुल योग 4.52 फीसदी है। जो कुल 7,89,69,844 मतदाताओं में 35.5 लाख हैं।
सोमवार को चुनाव आयोग से मिली जानकारी के अनुसार इस अभियान के तहत अबतक 83.66 प्रतिशत मतदाताओं के गणना फॉर्म जमा किए जा चुके हैं। कुल 7,89,69,844 मतदाताओं में से 6,60,67,208 मतदाताओं के गणना फॉर्म जमा किए गए हैं। इस प्रकार, 88.18% मतदाताओं ने या तो गणना फॉर्म जमा कर दिया है, या मृत पाए गए हैं, या फिर एक स्थान पर नाम बरकरार रखा गया है अथवा स्थायी रूप से स्थानांतरित हो चुके हैं।
अब केवल 11.82 प्रतिशत मतदाताओं द्वारा गणना फॉर्म जमा किया जाना शेष है। इनमें से कई ने आने वाले दिनों में दस्तावेज़ों के साथ फॉर्म जमा करने के लिए समय मांगा है। 25 जुलाई तक फॉर्म जमा करने की अंतिम तारीख है। इसके बाद ड्राफ्ट रोल प्रकाशित होगा। इसी सूची के आधार पर 2025 के चुनावों की मतदाता सूची तय होगी।
चुनाव आयोग द्वारा विकसित किया गया ECINet प्लेटफॉर्म पर अब तक 5.74 करोड़ से अधिक फॉर्म अपलोड हो चुके हैं। ECINet जो पहले की 40 चुनावी ऐप्स को समाहित कर एकीकृत किया गया है।अब ऑनलाइन फॉर्म भरने, नाम खोजने, और दस्तावेज सत्यापन के लिए उपयोग हो रहा है। अब तीसरे चरण में लगभग 1 लाख बीएलओ एक बार फिर घर-घर जाएंगे।
सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों द्वारा नियुक्त 1.5 लाख बूथ लेवल एजेंट (बीएलओ) भी पूरी ताकत से लगे हुए हैं। प्रत्येक बूथ लेवल एजेंट प्रतिदिन 50 गणना पत्र तक जमा और प्रमाणित कर सकता है। 261 नगर निकायों के 5,683 वार्डों में विशेष कैंप लगाए जा रहे हैं, ताकि कोई भी पात्र शहरी मतदाता सूची से बाहर न रहे।




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