बायो मेडिकल कचरे को नष्ट करने के लिए क्या किया, पटना हाईकोर्ट ने बिहार के सभी DM से मांगा जवाब
वहीं पटना हाई कोर्ट ने बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से जानना चाहा कि अस्पतालों के कचरे को सही ढंग ने नष्ट नहीं करने पर किन-किन अस्पतालों को नोटिस दिया गया है। उनके विरुद्ध क्या कार्रवाई की गई। पूरा ब्योरा अगली सुनवाई में पेश करने का आदेश दिया।

Patna High Court: पटना हाईकोर्ट ने राज्य के सरकारी और निजी अस्पतालों के बायो मेडिकल वेस्ट के निस्तारण मामले में सूबे के सभी जिलाधिकारियों को अपने जिले में की गई कार्रवाई के बारे में जानकारी देने का आदेश दिया। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति संगम कुमार साहू और न्यायमूर्ति हरीश कुमार की खंडपीठ ने सोमवार को विकास चंद्र उर्फ गुड्डू बाबा की अर्जी पर सुनवाई की।
हाईकोर्ट ने केस में आगे की कार्रवाई में सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता अंजनी कुमार को हाजिर होने और जवाब दायर करने का आदेश दिया। कोर्ट ने सरकार को यह बताने को कहा कि राज्य के सरकारी, निजी अस्पतालों से निकलने वाले कचरे के निस्तारण के लिए क्या कार्रवाई की जा रही है। वहीं कोर्ट ने बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से जानना चाहा कि अस्पतालों के कचरे को सही ढंग ने नष्ट नहीं करने पर किन-किन अस्पतालों को नोटिस दिया गया है। उनके विरुद्ध क्या कार्रवाई की गई। पूरा ब्योरा अगली सुनवाई में पेश करने का आदेश दिया।
आवेदक विकास चंद्र उर्फ गुड्डू बाबा ने कोर्ट को बताया कि राज्य में बहुत सारे सरकारी और गैर सरकारी निजी अस्पताल हैं। अस्पतालों से जो गंदगी और कचरा निकलता है, उसे सही ढंग से नष्ट नहीं किया जाता है। उन्होंने कोर्ट को बताया कि अधिकतर अस्पताल मेडिकल बायो वेस्ट का निस्तारण मनमाने ढंग से करते हैं। इससे न सिर्फ गंदगी फैलती है बल्कि वायु प्रदूषित होता है।अस्पतालों के आसपास रहने वालों के स्वास्थ्य पर भी विपरीत प्रभाव पड़ता है। मामले पर 20 अप्रैल को अगली सुनवाई होगी।
बायोमेडिकल कचरा पर हिन्दुस्तान ने चलाया था अभियान
पटना सहित राज्य भर में मेडिकल कचरा के उठाव को लेकर बरती जा रही लापरवाही पर आपके अपने अखबार हिन्दुस्तान ने ‘बायोमेडिकल कचरा जोखिम में जान’ टैगलाइन से हाल में ही अभियान चलाया था। हिन्दुस्तान ने कचरा उठाव में मेडिकल अस्पतालों की लापरवाही, संबद्ध संस्थानों की सुस्ती और इसे सीधे गंगा में गिरनेवाले नालों में फेंकने की तस्वीर के साथ रिपोर्ट प्रकाशित की गई। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, सिविल सर्जन कार्यालय, जिला प्रशासन और नगर निगम ने तत्काल संज्ञान लिया। डीएम ने सिविल सर्जन से मेडिकल कचरा के निपटारे में अस्पतालों की जांच कर रिपोर्ट मांगी। राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद ने लापरवाही के आरोप में 400 अस्पतालों को नोटिस भी भेजा।




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