बक्सर जेल में कैदी की मौत पर बवाल; पत्नी बोलीं- 2 दिन पहले ठीक थे, हत्या का आरोप
बक्सर केंद्रीय जेल में विचाराधीन कैदी राजेंद्र सिंह की संदिग्ध मौत पर परिजनों ने हत्या का आरोप लगाया। जेल प्रशासन ने दिल का दौरा बताया, जबकि शरीर पर चोट के निशान का दावा किया गया। विरोध में सड़क जाम और प्रदर्शन हुआ, पुलिस ने जांच शुरू की।

बिहार के बक्सर केंद्रीय जेल में एक विचाराधीन कैदी की संदिग्ध मौत के बाद शनिवार को शहर में तनाव की स्थिति बन गई। मृतक की पहचान विराट नगर निवासी राजेंद्र कुमार सिंह के रूप में हुई है। उन्हें शराब बेचने के आरोप में दर्ज एक मामले में 12 फरवरी को जेल भेजा गया था। घटना के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों ने साजिश का आरोप लगाते हुए जमकर विरोध प्रदर्शन किया। जेल अधीक्षक ज्ञानिता गौरव ने बताया कि राजेंद्र सिंह पीलिया से पीड़ित थे और उनका इलाज चल रहा था। शुक्रवार सुबह 9:47 बजे उन्हें अचानक दिल का दौरा पड़ा। चार मिनट बाद, सुबह 9:51 बजे उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। जेल प्रशासन का कहना है कि प्रारंभिक तौर पर मौत का कारण हृदयाघात प्रतीत हो रहा है।
परिजनों ने हत्या का लगाया आरोप
हालांकि, परिजनों ने इस दावे को खारिज किया है। मृतक की पत्नी का कहना है कि दो दिन पहले हुई मुलाकात में उनके पति पूरी तरह स्वस्थ दिख रहे थे। उन्होंने बताया कि 2 मार्च को उन्हें जमानत मिलने की उम्मीद थी। पत्नी ने आरोप लगाया कि राजेंद्र के गाल, गर्दन, छाती और पेट पर चोट के निशान थे, जो मारपीट की ओर इशारा करते हैं। उनका कहना है कि यदि दिल का दौरा पड़ता, तो शरीर पर इस तरह के निशान नहीं होते। परिवार ने जेल के अंदर पीट-पीटकर हत्या किए जाने की आशंका जताई है।
कैदी की मौत पर परिजनों का हंगामा
मौत की खबर फैलते ही अस्पताल परिसर में लोगों की भीड़ जमा हो गई। बाद में प्रदर्शनकारी ज्योति प्रकाश चौक के पास स्टेशन रोड पर पहुंच गए, जहां शाम करीब 6 बजे से 8:30 बजे तक सड़क जाम कर टायर जलाए गए। यातायात पूरी तरह बाधित हो गया और पुलिस को स्थिति संभालने में काफी मशक्कत करनी पड़ी।सदर एसडीपीओ गौरव कुमार पांडे और टाउन एसएचओ मनोज कुमार सिंह सहित कई अधिकारी मौके पर पहुंचे। उन्होंने प्रदर्शनकारियों को निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच का आश्वासन दिया। अधिकारियों के समझाने के बाद जाम हटाया गया।
मामले की जांच में जुटी पुलिस
पुलिस ने बताया कि परिजनों की शिकायत के आधार पर केंद्रीय जेल के अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि मौत के बाद परिवार से कुछ दस्तावेजों पर जल्दबाजी में हस्ताक्षर कराने की कोशिश की गई। उन्होंने मृतक की पत्नी के लिए सरकारी नौकरी, मुआवजा और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। प्रशासन का कहना है कि मौत का वास्तविक कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा। फिलहाल मामले की जांच जारी है और अधिकारियों ने पारदर्शी कार्रवाई का भरोसा दिलाया है।




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