उपेंद्र कुशवाहा राज्यसभा रिटर्न, अब मंत्री बेटे दीपक प्रकाश को MLC बनाना RLM की चुनौती
राष्ट्रीय लोक मोर्चा के चीफ उपेंद्र कुशवाहा राज्यसभा चुनाव जीत गए हैं। अब आरएलएम के सामने उनके बेटे दीपक प्रकाश को एमएलसी बनाने की चुनौती होगी। दीपक बिहार सरकार में पंचायती राज मंत्री हैं, लेकिन किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं।

राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा की राज्यसभा में तीसरी पारी शुरू होने वाली है। भारतीय जनता पार्टी और अन्य सहयोगी दलों के समर्थन से वे राज्यसभा चुनाव जीत गए हैं। अब कुशवाहा के सामने अपने बेटे दीपक प्रकाश को एमएलसी बनाने की चुनौती होगी। दीपक अभी बिहार सरकार में पंचायती राज मंत्री हैं, लेकिन विधानसभा या विधान परिषद में से किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं। अगर उन्हें मंत्री बने रहना है, तो आगामी विधान परिषद चुनाव में एमएलसी बनना जरूरी होगा।
उपेंद्र कुशवाहा ने 2023 में नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड से अलग होकर नई पार्टी बनाई थी। 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने एनडीए में रहकर काराकाट सीट से चुनाव लड़ा लेकिन भोजपुरी स्टार पवन सिंह के निर्दलीय लड़ने से वे हार गए। बाद में भाजपा ने उन्हें अपने सपोर्ट से राज्यसभा सांसद बनाया था, जिसका कार्यकाल अप्रैल 2026 तक है।
इसके बाद, कुशवाहा ने एनडीए में रहते हुए ही बिहार विधानसभा चुनाव 2025 लड़ा। गठबंधन में आरएलएम को 6 सीटें लड़ने को मिलीं। कुशवाहा की मांग इससे कहीं ज्यादा थी। बताया गया कि उपेंद्र इस फॉर्मूले से नाराज भी हुए थे। मगर भाजपा ने उन्हें दोबारा राज्यसभा सांसद बनाने और एक एमएलसी सीट देने का वादा करके मना लिया था।
विधानसभा चुनाव में कुशवाहा की पार्टी ने 6 में से 4 सीटों पर जीत दर्ज की। उपेंद्र की पत्नी भी स्नेहलता भी सासाराम से जीतकर विधायक बनीं। नवंबर 2025 में जब नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली नई सरकार का गठन हुआ, तो कुशवाहा की पार्टी को एक मंत्री पद मिला। उन्होंने अपने चारों विधायकों को दरकिनार कर बेटे दीपक प्रकाश को मंत्री बना दिया।
इसके बाद आरएलएम में बगावत के सुर उठने लगे। राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, प्रवक्ता से लेकर कई नेता-कार्यकर्ता कुशवाहा का साथ छोड़ जाने लगे। आरएलएम के तीन विधायक भी नाराज बताए जाने लगे। मगर कुशवाहा ने जैसे-तैसे विधायकों को मना लिया और पार्टी को बचा लिया।
फरवरी 2026 में जब बिहार की पांच राज्यसभा सीटों पर चुनाव की घोषणा हुई, तो उपेंद्र कुशवाहा की परीक्षा की घड़ी आ गई। चर्चा चलने लगी कि इस बार कुशवाहा को राज्यसभा सीट से हाथ धोना पड़ सकता है। यह भी अटकलें लगीं कि कुशवाहा को राज्यसभा सांसद बने रहने के बदले आरएलएम का भाजपा में विलय का ऑफर दिया गया है।
इस बीच उपेंद्र कुशवाहा ने दिल्ली पहुंचकर भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात की। फिर खुद भाजपा नेताओं ने ही सभी अटकलों पर विराम लगा दिया। भाजपा ने अपने कोटे के दो राज्यसभा उम्मीदवारों (नितिन नवीन और शिवेश राम) के नामों का ऐलान करने के साथ ही उपेंद्र कुशवाहा की उम्मीदवारी पर भी स्थिति साफ कर दी।
5 मार्च को कुशवाहा ने रालोमो के सिंबल पर नितिन नवीन, शिवेश राम, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और रामनाथ ठाकुर के साथ नामांकन किया। 16 मार्च को मतदान हुआ तो कुशवाहा भाजपा विधायकों के वोटों के समर्थन से बिल्कुल सेफ तरीके से चुनाव जीत गए।
दीपक प्रकाश का मंत्री पद बचा रहेगा?
उपेंद्र कुशवाहा के राज्यसभा चुनाव जीतने के बाद अब सियासी गलियारों में सवाल उठ रहा है कि अब उनके बेटे दीपक प्रकाश का क्या होगा। क्या दीपक भाजपा के सहयोग से एमएलसी बनेंगे और बिहार सरकार में मंत्री बने रहेंगे? या फिर पिता के राज्यसभा सीट के चलते उन्हें मंत्री पद का त्याग करना होगा।
कयास लगाए जा रहे हैं कि उपेंद्र कुशवाहा भाजपा से अपने पुराने वादे को दोहराते हुए एक एमएलसी सीट की पुरजोर मांग करेंगे। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आरएलएम के लिए एमएलसी सीट पाने के लिए कुशवाहा ने रणनीतिक तरीके से अपने बेटे को मंत्री बनाया था।
जून 2026 में बिहार विधान परिषद के 9 सदस्यों का कार्यकाल खत्म होने जा रहा है। वहीं, मंगल पांडेय के विधायक बनने के बाद उनकी सीट पर भी उपचुनाव होना है। ऐसे में 10 सीटों पर इलेक्शन की घोषणा जल्द ही होने वाली है। एमएलसी चुनाव में एनडीए से कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश प्रत्याशी बनाए जाएंगे या नहीं, यह आने वाले समय में ही पता चलेगा।




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