Pawan Singh could not secure ticket to Rajya Sabha as BJP picks Upendra Kushwaha as fifth candidate from Bihar पवन सिंह पर ‘मालिक’ मेहरबान नहीं, राज्यसभा रेस में उपेंद्र कुशवाहा ने पछाड़ दिया, Bihar Hindi News - Hindustan
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पवन सिंह पर ‘मालिक’ मेहरबान नहीं, राज्यसभा रेस में उपेंद्र कुशवाहा ने पछाड़ दिया

Pawan Singh News: आसनसोल छोड़कर और काराकाट लड़कर भी सांसद न बन पाए भोजपुरी अभिनेता पवन सिंह एक बार फिर एमपी बनते-बनते रह गए हैं। बीजेपी ने बिहार की 5वीं सीट के लिए पवन सिंह के बदले उपेंद्र कुशवाहा का नाम तय कर दिया है।

Tue, 3 March 2026 06:27 PMRitesh Verma लाइव हिन्दुस्तान, पटना
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पवन सिंह पर ‘मालिक’ मेहरबान नहीं, राज्यसभा रेस में उपेंद्र कुशवाहा ने पछाड़ दिया

Pawan Singh News: बिहार के विधानसभा चुनाव में हाई वोल्टेज प्रचार कर चुके भोजपुरी फिल्मों के ‘पावरस्टार’ पवन सिंह की राजनीतिक पारी पावर कट का शिकार हो गई है। सांसद बनकर नई पारी शुरू करने का उनका मंसूबा एक बार फिर ध्वस्त हो गया है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने राज्यसभा चुनाव के लिए बिहार की 5वीं सीट पर सहयोगी दल राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा को फिर लड़ाने का ऐलान कर दिया है। पवन पिछले दिनों भाजपा के अध्यक्ष नितिन नवीन से मिले थे और तब राज्यसभा टिकट को लेकर मीडिया के सवाल पर कहा था- ‘भैया से आशीर्वाद लिया। शिष्टाचार मुलाकात की। सिपाही हूं। जो मालिक चाहेंगे, वही ना होगा।’

पवन सिंह को 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने पश्चिम बंगाल की आसनसोल लोकसभा सीट से टिकट दिया था, लेकिन वो टिकट लौटाकर बिहार की काराकाट सीट से लोकसभा लड़ने आ गए थे। इस सीट पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की तरफ से उपेंद्र कुशवाहा लड़ रहे थे। पवन के निर्दलीय लड़ने से कोइरी (कुशवाहा) वोटरों में गलत संदेश गया और उसका असर शाहाबाद से मगध तक दिखा। इन इलाकों में महागठबंधन एनडीए पर भारी पड़ा और कई सीटों पर विपक्षी दलों को जीत मिली। विधानसभा चुनाव में कुशवाहा और पवन ने एकजुटता का संदेश देकर माहौल ठीक किया और उसका फायदा एनडीए को मिला।

बिहार की 5 राज्यसभा सीटों के चुनाव के लिए बीजेपी के अपने दो कैंडिडेट में एक नितिन नवीन हैं और दूसरे शिवेश राम हैं, जो सासाराम सीट से कांग्रेस के मनोज राम के हाथों हार गए थे। कुशवाहा जिस काराकाट सीट से पवन सिंह के लड़ने के कारण तीसरे नंबर पर चले गए थे, वो आधा सासाराम और आधा औरंगाबाद जिला है। सासाराम लोकसभा सीट के तहत आधा सासाराम और आधा कैमूर (भभुआ) जिला है। कुशवाहा की पत्नी स्नेहलता कुशवाहा सासाराम सीट से ही विधायक बनी हैं। इस तरह देखें तो बीजेपी के अपने और समर्थित कैंडिडेट मिलाकर 3 में 2 कैंडिडेट सासाराम से हैं। क्षेत्र के हिसाब से देखें तो बीजेपी के तीनों कैंडिडेट शाहाबाद और मगध के हैं, जहां कुशवाहा और पवन की लड़ाई से एनडीए को लोकसभा में भारी नुकसान हुआ था।

विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी ने पवन सिंह की कुशवाहा से मुलाकात कराई थी। मुलाकातों की फोटो जारी हुए थे। उसके बाद पवन सिंह ने एनडीए के लिए प्रचार भी किया था। माना जा रहा था कि बीजेपी इनाम में राज्यसभा भेज सकती है। लेकिन भाजपा की 2 सीटों पर नितिन नवीन और शिवेश राम का नाम तय होने के बाद कुशवाहा और पवन में किसी एक को ही उतारा जा सकता था। चिराग पासवान का दावा 19 विधायकों के कारण मजबूत था, लेकिन लगता है कि बीजेपी ने चिराग के साथ ही जीतनराम मांझी को भी उपेंद्र कुशवाहा के लिए मना लिया है।

चिराग की पार्टी और मांझी के दावों के बीच उपेंद्र कुशवाहा ने राज्यसभा रेस में पवन सिंह को पछाड़ दिया। पवन के कारण काराकाट से संसद जाने से चूक गए कुशवाहा ने राज्यसभा में पवन का रास्ता काट दिया। उपेंद्र कुशवाहा का कार्यकाल खत्म हो रहा था। बीजेपी नहीं भेजती तो वह अप्रैल में पूर्व सांसद बन जाते। 5वीं सीट पर लालू यादव और तेजस्वी यादव का राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) भी कैंडिडेट उतारेगा, इसलिए कुशवाहा के लिए यह टिकट तोहफा के साथ-साथ परीक्षा भी है।

एनडीए के 4 कैंडिडेट तो आराम से जीतेंगे। 5वें कैंडिडेट यानी कुशवाहा के लिए एनडीए को कम से कम 3 विपक्षी विधायक का समर्थन चाहिए, जो क्रॉस वोटिंग से ही हासिल हो सकता है। तेजस्वी की पार्टी को जीत के लिए महागठबंधन के 35 विधायकों के ऊपर असदुद्दीन ओवैसी और मायावती के 6 विधायकों का समर्थन चाहिए। मजेदार ये है कि ओवैसी की पार्टी खुद लड़ने और महागठबंधन से समर्थन करने कह रही है।

एनडीए खेमे में जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) बाकी 2 सीट पर अपना कैंडिडेट देगी, क्योंकि उसके पास 85 विधायक हैं और खाली होने वाली 5 सीटों में 2 सांसद रामनाथ ठाकुर और हरिवंश नारायण सिंह उसके नेता हैं। जेडीयू की तरफ से अब रामनाथ ठाकुर के साथ नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार के राज्यसभा जाने और राजनीतिक पारी शुरू करने की बात तय मानी जा रही है। रामनाथ ठाकुर को नीतीश कुमार जेडीयू की सामान्य परंपरा के उलट राज्यसभा का तीसरा मौका दे रहे हैं, जो उनसे पहले सिर्फ किंग्र महेंद्र को मिला था। राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश को नीतीश कुमार तीसरी बार नहीं भेजने जा रहे हैं।

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