सुपौल : मध्य एशिया की आग बाजार तक पहुंची, पेट्रोल-डीजल महंगा होने से बढ़ी महंगाई की चिंता
मध्य एशिया और पश्चिम एशिया में तनाव के चलते भारत में पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतें बढ़ने लगी हैं। इससे महंगाई का खतरा गहरा गया है, जो डीजल-पेट्रोल, खाद्य सामग्री और निर्माण सामग्री पर असर डाल सकता है। व्यापारियों और उपभोक्ताओं में चिंता है कि ईंधन की बढ़ती कीमतें कृषि लागत को भी प्रभावित करेंगी।

सुपौल, हिन्दुस्तान संवाददाता। मध्य एशिया और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब भारतीय बाजारों में भी महसूस होने लगा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पैदा हुई अनिश्चितता के बीच पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी और आपूर्ति व्यवस्था में बदलाव से महंगाई बढ़ने की आशंका गहरा गई है। डीजल-पेट्रोल से लेकर खाद्य सामग्री, निर्माण सामग्री और अन्य रोजमर्रा की जरूरतों के सामानों तक पर इसका असर पड़ सकता है। जानकारों का कहना है कि तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर परिवहन लागत पर पड़ता है। ट्रांसपोर्टेशन खर्च बढ़ने के बाद थोक और खुदरा बाजार में सामानों के दाम बढ़ना लगभग तय माना जाता है। इसी वजह से व्यापारियों और उपभोक्ताओं के बीच चिंता बढ़ी हुई है।
ईंधन की आपूर्ति और कीमतें
पेट्रोलियम कंपनियों ने हाल के दिनों में ईंधन आपूर्ति पर निगरानी बढ़ा दी है। पहले पेट्रोल पंप संचालकों की मांग और भुगतान के आधार पर पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति की जाती थी, लेकिन अब पंपों पर उपलब्ध ऑनलाइन स्टॉक का मूल्यांकन करने के बाद ही टैंकर भेजे जा रहे हैं। इससे कई जगहों पर पेट्रोल पंपों में कुछ घंटों से लेकर दो दिनों तक ईंधन की कमी की स्थिति बन रही है। पंप संचालकों का कहना है कि मांग के अनुरूप सप्लाई नहीं मिलने से उपभोक्ताओं को परेशानी हो रही है। कई बार वाहनों की लंबी कतारें लग रही हैं, जबकि कुछ पंपों पर सीमित मात्रा में ईंधन उपलब्ध कराया जा रहा है। इधर, डीजल और पेट्रोल की कीमतों में करीब तीन रुपये तक वृद्धि के बाद बाजार में इसका असर दिखने लगा है। कारोबारियों के मुताबिक ईंधन महंगा होने से माल ढुलाई खर्च बढ़ेगा और इसका असर धीरे-धीरे सभी क्षेत्रों पर पड़ेगा।
निर्माण और खाद्य सामग्री पर असर
बिल्डिंग मैटेरियल कारोबारी ई. अंशु ने बताया कि पेट्रोलियम पदार्थों के दाम बढ़ने का असर सीमेंट, सरिया, बालू और अन्य निर्माण सामग्री की कीमतों पर पड़ना तय है। उन्होंने कहा कि निर्माण क्षेत्र पहले से लागत वृद्धि का सामना कर रहा है और ईंधन महंगा होने से स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है। वहीं गल्ला व्यापारी श्रवण मोहनका ने बताया कि खाद्य सामग्री की ढुलाई महंगी होने पर अनाज, दाल, तेल और अन्य जरूरी वस्तुओं के दाम बढ़ सकते हैं। निर्मली के कारोबारी अभिषेक पंसारी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय हालात लंबे समय तक प्रभावित रहे तो खुदरा बाजार में महंगाई का दबाव और बढ़ सकता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि वैश्विक तनाव कम नहीं हुआ तो आने वाले समय में आम लोगों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। फिलहाल बाजार की नजर तेल कीमतों और अंतरराष्ट्रीय हालात पर टिकी हुई है।
किसानों की चिंता
अर्थशास्त्र के जानकार और सेवानिवृत्त प्रोफेसर राम बहादुर मंडल ने बताया कि पेट्रोल और डीजल केवल वाहन चलाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पूरी आपूर्ति व्यवस्था इन पर निर्भर करती है। खेतों से मंडी तक अनाज पहुंचाने, फैक्ट्री से बाजार तक सामान भेजने और निर्माण सामग्री ढोने में डीजल प्रमुख भूमिका निभाता है। ऐसे में ईंधन के दाम बढ़ते ही माल ढुलाई महंगी हो जाती है। परिवहन खर्च बढ़ने का असर धीरे-धीरे खाद्य सामग्री, किराना, सब्जी, फल, दवा और निर्माण सामग्री तक पर दिखाई देने लगता है। यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल संकट या युद्ध की स्थिति का असर आम उपभोक्ता तक पहुंच जाता है। डीजल-पेट्रोल की बढ़ती कीमतों को लेकर आम लोगों और किसानों में चिंता दिखने लगी है। पेट्रोल पंप पर ईंधन लेने पहुंचे फजलु रहमान, सुनील कुमार और नवीन कुमार ने कहा कि गाड़ी चलानी है तो पेट्रोल-डीजल लेना मजबूरी है, कीमत बढ़ने के बावजूद लोग खरीदारी करेंगे। हालांकि उनका मानना है कि लगातार बढ़ोतरी से घरेलू बजट प्रभावित होगा। वहीं किसानों ने डीजल महंगा होने को खेती के लिए बड़ा झटका बताया। किसानों का कहना है कि ट्रैक्टर से जुताई, पंपसेट से सिंचाई और कई कृषि कार्य डीजल पर निर्भर हैं। ऐसे में ईंधन महंगा होने से खेती की लागत बढ़ेगी। किसानों ने आशंका जताई कि उत्पादन खर्च बढ़ने का असर आगे खाद्यान्न कीमतों पर भी पड़ सकता है, जिससे आम लोगों पर दोहरी मार पड़ेगी।
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