रघुनाथपुर की दलित बस्तियों के चापाकल सूखे,
रघुनाथपुर में अप्रैल के दूसरे सप्ताह से गर्मी बढ़ने लगी है, जिससे गरीब बस्तियों पर बुरा असर पड़ा है। पेयजल संकट और स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ रही हैं। कई हैंडपंप सूख गए हैं और गर्म पानी निकल रहा है। हीट स्ट्रोक के मामले भी बढ़ रहे हैं। अगले सप्ताह बारिश की संभावना है, जिससे राहत मिलने की उम्मीद है।

रघुनाथपुर, एक संवाददाता। बढ़ती गर्मी के बीच मौसम ने अप्रैल महीने के दूसरे सप्ताह से ही मई और जून की गर्मी का एहसास करा दिया है। रघुनाथपुर प्रखंड में भीषण गर्मी का असर सबसे ज्यादा गरीब और मलिन बस्तियों में देखने को मिल रहा है। टीन और छप्पर के घर दिन में भट्टी की तरह तप रहे हैं, जिससे लोगों का रहना मुश्किल हो गया है। कई परिवार दिन के समय पेड़ों की छांव या खुले स्थानों में समय बिताने को मजबूर हैं। रात में भी गर्मी से राहत नहीं मिल रही। पेयजल की स्थिति चिंताजनक है। कई हैंडपंप सूख चुके हैं, जबकि कुछ से गर्म पानी निकल रहा है।
लोग दूर-दराज के स्रोतों से पानी लाने को विवश हैं। साफ पानी की कमी के कारण बच्चों और बुजुर्गों में डायरिया और अन्य बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। स्वास्थ्य सुविधाएं भी सीमित हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में मरीजों की भीड़ बढ़ रही है। हीट स्ट्रोक के मामलों में भी इजाफा देखा जा रहा है।तेज धूप के कारण दोपहर में लोग कम ही निकल रहे हैं। शनिवार को दिन का अधिकतम तापमान 40 डिग्री और न्यूनतम 27 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गयाहै। हालांकि, अगले सप्ताह में बारिश के आसार बन रहे हैं। इससे राहत मिलने की संभावना है। आपदा प्रबंधन विभाग ने तो सभी विभाग प्रमुख को पत्र लिखकर इस स्थिति में सावधानी बरतने को कहा है। भीषण गर्मी और लू से बचने का कई सुझाव भी दिया गया है। इधर, स्कूलों में पठन-पाठन का काम तो 30 अप्रैल तक सुबह साढ़े 11 बजे तक करने का आदेश डीएम ने दिया है। दो मई से जनगणना के पहले चरण का कार्य शुरू हो रहा है। इस भीषण गर्मी में शिक्षकों को यह कार्य करना काफी चुनौती पूर्ण होगा ।
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