सावधान! अपनी जगह छोड़ रही है गंगा, 3 किमी तक मुड़ी धारा; बिहार के इन 3 जिलों में खतरे की घंटी
गंगा नदी ने गाद जमा होने के कारण वैशाली, बक्सर और सारण में अपनी धारा 3 किमी तक बदल ली है। इससे वैशाली में NH-122B और कई गांवों पर कटाव का खतरा पैदा हो गया है। बिहार सरकार ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए 176 करोड़ की सुरक्षा योजनाएं मंजूर…

Bihar News: बिहार की जीवनदायिनी कही जाने वाली गंगा नदी अब डराने लगी है। पिछले चार वर्षों के भीतर गंगा ने अपना रास्ता इस कदर बदला है कि तटवर्ती इलाकों में बसे लोगों की धड़कनें तेज हो गई हैं। सेटेलाइट तस्वीरों से हुए ताज़ा खुलासे के मुताबिक, गंगा ने वैशाली, बक्सर और सारण जिलों में अपनी प्राकृतिक धारा को तीन किलोमीटर तक खिसका लिया है। यह बदलाव इतना बड़ा है कि अब नेशनल हाईवे NH-122B और कई गांवों के अस्तित्व पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
वैशाली में नेशनल हाईवे तक पहुंची लहरें
नदी की बदलती धारा का सबसे भयानक असर वैशाली जिले में देखने को मिल रहा है। सहदेई बुजुर्ग प्रखंड के पास गंगा की धारा अपनी पुरानी जगह से 3 किलोमीटर मुड़कर नेशनल हाईवे 122B के बेहद करीब पहुंच गई है। अगर कटाव की यही रफ़्तार रही, तो जल्द ही सड़क का बड़ा हिस्सा नदी में समा सकता है। वहीं सारण जिले के जेपी सेतु के पास सबलपुर पछियारी टोला में भी नदी तेजी से जमीन निगल रही है।
बक्सर में यूपी की सीमा से ही शुरू हुआ 'मोड़'
बक्सर जिले की स्थिति और भी पेचीदा है। यहाँ गंगा उत्तर प्रदेश की सीमा के भीतर से ही मुड़ना शुरू कर रही है और बिहार में प्रवेश करते ही जमैनियां गांव के पास भारी कटाव कर रही है। नदी के तल में भारी मात्रा में जमा 'गाद' को इस बदलाव की मुख्य वजह माना जा रहा है। गाद के कारण नदी के बीच में बड़े-बड़े टापू बन गए हैं, जिससे पानी का प्रवाह बाधित होकर किनारों की ओर मुड़ रहा है।
सरकार का 176 करोड़ का 'सुरक्षा कवच'
जल संसाधन विभाग ने गंगा की बदलती धारा से उत्पन्न खतरे को 'अति गंभीर' श्रेणी में रखते हुए इसे रोकने के लिए 176 करोड़ रुपये की तीन बड़ी परियोजनाओं को हरी झंडी दे दी है। विभाग के प्रधान सचिव संतोष कुमार मल्ल की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में यह निर्णय लिया गया, जिसके तहत कटाव से सर्वाधिक प्रभावित वैशाली के लिए 65 करोड़, सारण के लिए 58 करोड़ और बक्सर के लिए 53 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इन योजनाओं के माध्यम से नदी के किनारों को सुरक्षित बनाया जाएगा और धारा के मुड़ने की प्रक्रिया पर प्रभावी रोक लगाकर तटवर्ती इलाकों, गांवों और नेशनल हाईवे को डूबने से बचाने का प्रयास होगा।




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