नितिन-सम्राट की बैठक में तावड़े दिखे, बहुमत के बाद विस्तार; कैबिनेट में BJP से कौन-कौन मंत्री?
Samrat Choudhary Cabinet: बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात में बिहार प्रभारी विनोद तावड़े की मौजूदगी साफ संकेत है कि कैबिनेट विस्तार में भाजपा के मंत्रियों पर पार्टी में चर्चा चालू है।

Samrat Choudhary Cabinet: बिहार में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सप्ताह भर पुरानी एनडीए सरकार का पहला कैबिनेट विस्तार अटकलों के दौर से गुजर रहा है। सम्राट चौधरी दिल्ली दौरे से पटना लौट आए हैं। पटना लौटते ही वो जेडीयू अध्यक्ष और पूर्व सीएम नीतीश कुमार से मिलने गए। दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा सम्राट ने भाजपा के अध्यक्ष नितिन नवीन समेत कई नेताओं से मुलाकात की। नितिन से मुलाकात के दौरान सम्राट के साथ बिहार भाजपा के प्रभारी विनोद तावडे़ की मौजूदगी रही, जो संकेत है कि कैबिनेट विस्तार में मंत्री बनने वाले भाजपा नेताओं पर चर्चा शुरू हो चुकी है। नीतीश सरकार में भाजपा के दो डिप्टी सीएम समेत 14 मंत्री थे, जबकि जदयू के सीएम समेत 9 मंत्री थे। लोजपा-आर के 2 और हम व रालोमो के 1-1 मंत्री थे।
फिलहाल सीएम और दो डिप्टी सीएम से चल रही सरकार की जिम्मेदारियां भाजपा, जदयू, लोजपा-आर, हम और रालोमो के नेताओं के हाथों में कैबिनेट विस्तार से जाएंगी। लोजपा, हम और रालोमो के मंत्रियों की संख्या और चेहरे में बदलाव की गुंजाइश कम है। जो नए मंत्री आ सकते हैं, वो भाजपा और जदयू की लिस्ट में दिखेंगे। नए नेताओं को जगह मिलने पर नीतीश सरकार में मंत्री रहे एकाध पुराने चेहरों की विदाई हो जाएगी। नीतीश ने जदयू से विजय चौधरी और बिजेंद्र यादव को पहले ही दिन डिप्टी सीएम बनवा दिया था। श्रवण कुमार भी विधायक दल के नेता भी बना दिए गए हैं।
सीएम सम्राट 24 अप्रैल को विधानसभा में बहुमत साबित करेंगे। इसके बाद मई महीने की शुरुआत में बाकी मंत्रियों को शपथ दिलाई जा सकती है। पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में आखिरी चरण के मतदान के फौरन बाद भी मंत्रिमंडल विस्तार की कुछ अटकलें है, लेकिन संभावना है कि चुनाव नतीजों के बाद ही यह हो पाएगा। अभी बिहार से भाजपा के बहुत सारे विधायक और नेता बंगाल में पार्टी के प्रचार में जुटे हैं। पार्टी नेतृत्व का पूरा फोकस इस समय चुनाव पर है।
कैबिनेट विस्तार के मद्देनजर सबसे ज्यादा चर्चा पूर्व उप-मुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा को लेकर हो रही है। पिछली विधानसभा के शुरुआती दौर में स्पीकर रहे विजय की नीतीश और सम्राट से सदन के अंदर बहस की बात हो रही है। राजस्व मंत्री के तौर पर विजय के तेवर और काम की गिनती हो रही है। सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि विजय कैबिनेट में वापसी करते हैं या नहीं। वापसी होती है तो मंत्रालय पुराना रहता है या उससे ऊपर या कमतर। याद दिला दें कि सम्राट को नेता चुनने का प्रस्ताव विजय ने ही रखा था और मीडिया से कहा था कि पार्टी के कमांडर के आदेश से गठबंधन की राजनीति को लेकर चलने के लिए उन्होंने सम्राट चौधरी के नाम का प्रस्ताव रखा।
सीएम पद से नीतीश के इस्तीफे के समय सरकार में भाजपा के मंत्रियों में सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा के अलावा मंगल पांडे, दिलीप जायसवाल, रामकृपाल यादव, सुरेंद्र मेहता, संजय सिंह टाइगर, अरुण शंकर प्रसाद, नारायण प्रसाद, रमा निषाद, लखेंद्र रौशन, श्रेयसी सिंह और प्रमोद चंद्रवंशी का नाम था। सरकार गठन के समय बने 14 मंत्रियों में एक नितिन नवीन ने भाजपा अध्यक्ष बनने के बाद मंत्री पद छोड़ दिया था।
नई सरकार में कुशवाहा सीएम, यादव और भूमिहार डिप्टी सीएम बन जाने से इन तीन जातियों के पुराने मंत्री तनाव में हैं। राजपूत जाति से पिछली सरकार में 4 मंत्री थे, जिनकी संख्या के बढ़ने-घटने पर भी सबकी नजर होगी। कैबिनेट में नीतीश मिश्रा, नीरज सिंह बबलू, जीवेश मिश्रा जैसे भाजपा नेताओं की वापसी पर भी अटकलबाजी चल रही है। भाजपा जिस तरह सभी वर्ग, जाति और क्षेत्र को साधने की कोशिश करती है, उसमें किसे दोबारा कुर्सी मिलेगी और कौन पूर्व मंत्री ही रह जाएंगे, यह कहना बहुत मुश्किल है।




साइन इन