मदरसों के बच्चों के लिए स्मार्ट क्लास, गर्मी की छुट्टी में गणित की पढ़ाई; सम्राट चौधरी सरकार का प्लाान
चरणबद्ध तरीके से बिहार के सभी मदरसों में स्मार्ट क्लास की व्यवस्था होगी। शुरुआत प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर पर होगी। शिक्षकों के लिए ट्रेनिंग प्रोग्राम भी होंगे, ताकि वे डिजिटल टूल्स का प्रभावी तरीके से इस्तेमाल कर सकें।

बिहार में छात्रों की बेहतर पढ़ाई को लेकर सम्राट चौधरी सरकार गंभीर नजर आ रही है। बिहार सरकार ने अब राज्य के मदरसों में जहां स्मार्ट क्लास शुरू करने का प्लान बनाया है तो वहीं गर्मी की छुट्टियों में भी छात्रों के लिए विशेष पढ़ाई का इंतजाम भी किया जा रहा है। सम्राट चौधरी सरकार की योजना है कि बिहार में मदरसों के बच्चे भी स्मार्ट क्लास में पढ़ेंगे। राज्य सरकार मदरसों में स्मार्ट क्लास की व्यवस्था करेगी। शिक्षा विभाग ने इस दिशा में बड़ी पहल की है। इसके तहत सरकारी अनुदान प्राप्त सभी मदरसों में यह सुविधा होगी। इस वित्तीय वर्ष में इस योजना को पूरा करने का लक्ष्य है। इसका उद्देश्य मदरसा शिक्षा को आधुनिक शैक्षिक तकनीक से जोड़कर छात्रों की समग्र साक्षरता और डिजिटल कौशल को बढ़ाना है। इस समय 1942 मदद से सरकारी अनुदान प्राप्त हैं। इन सभी में स्मार्ट क्लास की व्यवस्था होगी। फिलहाल 75 मदरसों में स्मार्ट क्लास की योजना मंजूर कर चुकी है।
चरणबद्ध तरीके से मदरसों में इसकी व्यवस्था की जाएगी
अब चरणबद्ध तरीके से अन्य सभी मदरसों में इसकी व्यवस्था होगी। शुरुआत प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर पर होगी। इसके बाद संबंधित विषयों में तकनीकी संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे। शिक्षकों के लिए ट्रेनिंग प्रोग्राम भी होंगे, ताकि वे डिजिटल टूल्स का प्रभावी तरीके से इस्तेमाल कर सकें। शिक्षा विभाग का मानना है कि मदरसों के विद्यार्थी परंपरागत पाठ्यक्रम के साथ समकालीन विज्ञान, गणित और कंप्यूटर शिक्षा से भी लाभान्वित हो सकते हैं। हालांकि प्रशिक्षित शिक्षक की कमी और पारंपरिक पाठ्यक्रम के साथ संतुलन स्थापित करने की चुनौती भी है। इसे दूर करने के लिए शिक्षा विभाग काम कर रहा है।
गर्मी की छुट्टी में भाषा और गणित पढेंगे बच्चे
सरकारी विद्यालय के पांचवीं और छठी के बच्चे गर्मी की छुट्टी में भाषा और गणित विषय में दक्ष बनेंगे। राज्य के सरकारी विद्यालयों में अध्ययनरत कक्षा पांच और छह के बच्चों के लिए विशेष समर कैंप लगेगा। इनमें भाषा और गणितीय दक्षता में अपेक्षाकृत कमजोर बच्चे मुख्यत: हिस्सा लेंगे। यह कैंप एक से 30 जून तक राज्यभर के गांव एवं टोला स्तर पर लगेंगे।
इस संबंध में प्राथमिक शिक्षा निदेशक विक्रम वीरकर ने निर्देश जारी किया है। इसके अनुसार इस समर कैंप का मुख्य उद्देश्य बच्चों के पढ़ने, समझने, अभिव्यक्त करने एवं गणितीय कौशल को सुदृढ़ बनाना है, ताकि वे उच्च प्राथमिक स्तर की पढ़ाई के लिए बेहतर रूप से तैयार हो सकें। समर कैंप पूर्णतः समुदाय आधारित होगा तथा प्रत्येक कैंप में 10 से 15 छात्र-छात्राओं को शामिल किया जाएगा। चिह्नित बच्चों की संख्या एवं उनके निवास स्थान के आधार पर कैंप स्थल का चयन किया जाएगा। कैंप के संचालन के लिए बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों की सहायता ली जाएगी। राज्य के सभी मध्य विद्यालयों से प्रति विद्यालय 2 से 3 ऐसे स्वयंसेवकों को चिह्नित किया जाएगा, जो स्वेच्छा से बगैर किसी शुल्क के योगदान देने के इच्छुक हों।
इसके अतिरिक्त राज्य के सभी शिक्षा सेवक एवं शिक्षा सेवक तालीमी मरकज कर्मी भी स्वयंसेवक के रूप में अपने-अपने केंद्रों पर समर कैंप का संचालन करेंगे। कैंप के संचालन और अनुश्रवण के लिए जिला, प्रखंड एवं पंचायत स्तर पर अधिकारियों एवं सहयोगी संस्थाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से कैंप की प्रगति की नियमित ट्रैकिंग एवं मॉनिटरिंग भी की जाएगी।




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