बैंकर से विधायक, कांग्रेसी से समाजवादी; डिप्टी सीएम विजय चौधरी 21 साल से जेडीयू में नीतीश के भरोसेमंद
विजय कुमार चौधरी नीतीश कुमार के सबसे भरोसेमंद और अनुभवी सहयोगियों में से एक हैं। SBI में पीओ (PO) की नौकरी छोड़कर 1982 में राजनीति में कदम रखने वाले चौधरी ने अपने पिता की विरासत को बखूबी संभाला। उन्होंने कांग्रेस से अपनी पारी शुरू की थी, लेकिन पिछले 21 वर्षों से वे जदयू के स्तंभ बने हुए हैं।

Vijay Chaudhary News: बिहार की सियासत में जब भी धैर्य, सौम्यता और सधे हुए राजनीतिक अनुभव की बात होती है, तो एक नाम सबसे ऊपर आता है— विजय कुमार चौधरी समस्तीपुर की धरती से आने वाले विजय चौधरी आज उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर अपने राजनीतिक जीवन के एक नए और सबसे महत्वपूर्ण अध्याय की शुरुआत करने जा रहे हैं। पिछले 21 वर्षों से जदयू में नीतीश कुमार के 'छाया' बनकर रहने वाले विजय चौधरी ने अपनी काबिलियत के दम पर बैंक की नौकरी से लेकर डिप्टी सीएम तक का सफर तय किया है।
पिता की विरासत और एसबीआई की नौकरी का त्याग
विजय कुमार चौधरी का जन्म 8 जनवरी 1957 को एक प्रतिष्ठित राजनीतिक घराने में हुआ था। उनके पिता जगदीश प्रसाद चौधरी दलसिंहसराय से कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक थे। राजनीति में आने से पहले विजय चौधरी एक मेधावी छात्र थे और उन्होंने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) में बतौर पीओ दो साल तक नौकरी भी की। लेकिन 1982 में पिता के आकस्मिक निधन ने उनके जीवन की दिशा बदल दी। उन्होंने बैंक की सुरक्षित नौकरी छोड़ी और पिता की विरासत संभालने के लिए चुनावी मैदान में उतर गए। 1982 के उपचुनाव में दलसिंहसराय से जीतकर उन्होंने अपनी पहली राजनीतिक पारी की शुरुआत की।
कांग्रेसी से समाजवादी बनने का सफर
विजय चौधरी ने अपना राजनीतिक सफर कांग्रेस से शुरू किया और 1985 व 1990 में कांग्रेस के टिकट पर विधायक बने। तत्कालीन मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्र के करीबियों में गिने जाने वाले चौधरी विधानसभा में कांग्रेस के उपसचेतक भी रहे। हालांकि, 1995 और 2000 के चुनावों में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। साल 2005 में उन्होंने जदयू का दामन थामा और नीतीश कुमार के साथ हो गए। तब से पिछले 21 सालों में उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने न केवल पार्टी के महासचिव और प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी निभाई, बल्कि सरायरंजन विधानसभा क्षेत्र से साल 2010 से लगातार चौथी बार प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
नीतीश के सबसे भरोसेमंद में से एक
नीतीश कुमार ने हमेशा विजय चौधरी के शांत स्वभाव और प्रशासनिक पकड़ पर भरोसा किया है। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष के गौरवशाली पद को संभालने के साथ-साथ जल संसाधन, वित्त, शिक्षा, कृषि, परिवहन और ग्रामीण विकास जैसे अति-महत्वपूर्ण विभागों के मंत्री के रूप में कार्य किया है। वर्तमान में वे जल संसाधन सह संसदीय कार्य मंत्री हैं। उनके निर्वाचन क्षेत्र सरायरंजन में उनकी पहचान एक 'विकास पुरुष' और मिलनसार नेता के तौर पर है। चुनावी आंकड़ों पर गौर करें तो 2010 से लेकर हालिया 2025 के चुनाव तक, उनकी जीत का सिलसिला लगातार जारी है। 2025 में उन्होंने 20,798 मतों के बड़े अंतर से अपनी सीट बचाकर साबित कर दिया कि क्षेत्र की जनता और नीतीश कुमार का भरोसा उन पर आज भी अटूट है।




साइन इन