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पहले ही मिल रही चेतावनी फिर भी बिहार में ठनके मर रहे लोग, वज्रपात के कहर से कैसे बचें

वज्रपात की घटनाएं अप्रैल से शुरू हो जाती हैं। अप्रैल में ज्यादा गर्मी पड़ने पर वज्रपात होता है। बिहार में ज्यादा घटनाएं मानसून के दौरान दर्ज की गई हैं। इसके बाद जुलाई-अगस्त में घटनाएं बढ़ती हैं। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार ज्यादा गर्मी पड़ने पर दोपहर बाद ऐसी घटनाएं होती हैं।

Wed, 6 May 2026 06:56 AMNishant Nandan हिन्दुस्तान ब्यूरो, पटना
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पहले ही मिल रही चेतावनी फिर भी बिहार में ठनके मर रहे लोग, वज्रपात के कहर से कैसे बचें

बिहार में मानसून से पहले ही वज्रपात का कहर शुरू हो चुका है। पिछले दो दिनों में राज्य में 17 लोगों की मौत हो चुकी है। लाख कोशिश के बाद भी राज्य में ठनका से होने वाली मौतें कम नहीं हो रही हैं। मौसम खराब होने से पहले आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से भेजे जाने वाले अलर्ट कारगर नहीं हो पा रहे हैं। खासकर मजदूरों, बच्चों और पशुपालकों को यह नहीं बचा पा रहा है। बच्चे बाग में खेलने या आम चुनने के फेर में इसके शिकार हो रहे हैं। वहीं, मजदूर और पशुपालक खेतों में इसके शिकार हो रहे हैं।

आंकड़ों को देखें तो पिछले दस वर्षों में ढाई हजार से ज्यादा लोगों को यह अपनी चपेट में ले चुका है। आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अध्ययन में पता चला है कि वज्रपात से मौतें ग्रामीण क्षेत्रों में दिन में होती हैं। खेतों में काम करने वाले मजदूर, पशुपालक, बाहर खेल रहे बच्चे, पेड़ के नीचे छिपे हुए यात्री इसके ज्यादा शिकार हुए हैं। यह देखा गया है कि जहां पानी जमा हुआ है या तालाब आदि हैं, वहां आकाशीय बिजली अधिक गिरती है। आपदा प्रबंधन विभाग का कहना है कि खेतों में पेड़ के आसपास खतरा अधिक रहता है। इसलिए ऐसे मौसम में खेतों में जाने से परहेज करना चाहिए।

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अप्रैल से शुरू हो जाता है प्रकोप

वज्रपात की घटनाएं अप्रैल से शुरू हो जाती हैं। अप्रैल में ज्यादा गर्मी पड़ने पर वज्रपात होता है। बिहार में ज्यादा घटनाएं मानसून के दौरान दर्ज की गई हैं। इसके बाद जुलाई-अगस्त में घटनाएं बढ़ती हैं। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार ज्यादा गर्मी पड़ने पर दोपहर बाद ऐसी घटनाएं होती हैं। पिछले वर्ष अप्रैल में 56 और मई में 33 की जानें गई थीं। इस वर्ष अप्रैल में तीन और मई में 17 की मौत हो चुकी है।

मौसम खराब होने का मोबाइल पर अलर्ट जाता है

मौसम खराब होने की सूचना मिलते ही आपदा प्रबंधन विभाग संबंधित क्षेत्र के सभी मोबाइल उपभोक्ताओं को दो से ढाई घंटे पहले अलर्ट भेजता है। आपदा प्रबंधन विभाग संयुक्त निदेशक नदीमुल अख्तर सद्दिकी कहते हैं कि टू जी से लेकर फाइव जी तक सभी उपभोक्ताओं को मैसेज जाता है। इसमें मेघ गर्जन, वज्रपात, हवा के साथ मध्यम वर्षा को लेकर ऑरेंज या रेड अलर्ट की चेतावनी होती है। इसके अलावा आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की ओर से सी डॉट की मदद से, दामिनी और इंद्रवज्र एप के जरिए भी लोगों को अलर्ट किया जा रहा है।

ये सतर्कता बरतें

● खराब मौसम की चेतावनी मिलने पर बाहर जाने से बचें।

● पेड़ों के नीचे खड़े नहीं हों। घर के अंदर रहें।

● धातु की वस्तुओं से दूरी रखें।

● मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण का सीमित उपयोग करें।

● पानी वाली जगह जैसे, तालाब, नदी या गीले स्थानों के पास न जाएं।

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