patna high court take strict action against judge of trial court and stop him to hearing in criminal cases पटना हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के जज को क्रिमिनल केस की सुनवाई करने से क्यों रोका, ट्रेनिंग लेने को भी कहा, Bihar Hindi News - Hindustan
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पटना हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के जज को क्रिमिनल केस की सुनवाई करने से क्यों रोका, ट्रेनिंग लेने को भी कहा

दरअसल यह पूरा मामला मनरेगा में कार्यरत जूनियर इंजीनियर (जेई) उज्ज्वल राज हत्याकांड में ट्रायल कोर्ट द्वारा दिए फैसले से जुड़ा हुआ है। पटना हाईकोर्ट ने उज्ज्वल राज हत्याकांड के सभी आरोपितों को बरी कर दिया।

Thu, 2 April 2026 07:24 AMNishant Nandan लाइव हिन्दुस्तान, पटना
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पटना हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के जज को क्रिमिनल केस की सुनवाई करने से क्यों रोका, ट्रेनिंग लेने को भी कहा

पटना हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के एक जज पर सख्ती दिखाई है। दरअसल पटना उच्च न्यायालय ने ट्रायल कोर्ट के जज के उस फैसले पर नाराजगी जाहिर की है जिसमें हत्या के एक मामले में बयान के आधार पर 5 लोगों को सजा सुनाई गई थी। इसी के साथ अदालत ने सभी पांचों को इस हत्याकांड से बरी भी कर दिया गया है। हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के जज पर सख्ती बरतते हुए उनके आपराधिक मामलों की सुनवाई करने पर रोक भी लगा दी है।

दरअसल यह पूरा मामला मनरेगा में कार्यरत जूनियर इंजीनियर (जेई) उज्ज्वल राज हत्याकांड में ट्रायल कोर्ट द्वारा दिए फैसले से जुड़ा हुआ है। पटना हाईकोर्ट ने उज्ज्वल राज हत्याकांड के सभी आरोपितों को बरी कर दिया। न्यायमूर्ति बिबेक चौधरी और न्यायमूर्ति चंद्रशेखर झा के खंडपीठ ने साक्ष्यों में गंभीर त्रुटि बताते हुए सभी को बरी करने का आदेश सुनाया।

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मामला वर्ष 2017 का है। नवादा निवासी जूनियर इंजीनियर उज्ज्वल राज की संध्या समय मारिया आश्रम के पास गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। माप पुस्तिका में फर्जी प्रविष्टि करने से इनकार किये जाने पर हत्या का आरोप लगा था। पुलिस ने सुनील कुमार, बालमुकुंद यादव, राजू कुमार, धर्मेंद्र पासवान और नंदन यादव को आरोपित बनाया था। शेखपुरा कोर्ट ने वर्ष 2019 में सभी को धारा 302/34 आईपीसी और आर्म्स एक्ट के तहत दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।

हाईकोर्ट में अपील की सुनवाई के दौरान बताया गया कि पूरा मामला कथित ‘डाइंग डिक्लेरेशन’ (मूल्यकालिक कथन) पर आधारित है, जिसे न तो मूलरूप में पेश किया गया और न ही स्वतंत्र गवाहों से इसकी पुष्टि कराई गई। कोर्ट ने पाया कि फर्दबयान वास्तव में पुलिस अधिकारी का पुनर्लेखन था। साथ ही, पुलिस के समक्ष दिए गए कबूलनामे को साक्ष्य मानना गलत करार दिया। कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के जज की कार्यप्रणाली पर प्रश्न खड़ा करते हुए उन्हें आपराधिक मामलों से अलग करने और विशेष प्रशिक्षण देने की अनुशंसा की है।

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