बदलाव की बयार, अब नहीं नीतीश कुमार; CM पद से इस्तीफा के बाद नई सरकार का मार्गदर्शन करेंगे
Nitish Kumar Quitting as Bihar CM: जेडीयू अध्यक्ष नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देकर राज्यसभा सांसद की पारी शुरू करेंगे। नेतृत्व परिवर्तन अप्रैल के पहले हफ्ते में हो सकता है, जब बीजेपी सीएम के नेतृत्व में नई एनडीए सरकार बनेगी।

बिहार में बदलाव की बयार है, अब नहीं नीतीश कुमार हैं। दो दशक के दौरान अब तक 10 पारियों में 19 साल 195 दिन बिहार के मुख्यमंत्री रहे जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के अध्यक्ष नीतीश अब पटना छोड़कर दिल्ली की राजनीति करने संसद के ऊपरी सदन राज्यसभा जा रहे हैं। जेडीयू नेता ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के लिए मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने और नेतृत्व परिवर्तन की तैयारी को सार्वजनिक कर दिया है। नीतीश ने कहा है कि उनके जीवन की एक इच्छा थी कि विधानमंडल और संसद के दोनों सदनों का वह एक बार सदस्य बनें। विधानसभा, लोकसभा और विधान परिषद के सदस्य रह चुके नीतीश ने इस राज्यसभा चुनाव के जरिए अपनी उस अधूरी इच्छा को पूरी करने के अपने फैसले का ऐलान कर दिया है।
राज्यसभा चुनाव के नामांकन के आखिरी दिन पर्चा भरने जाने से पहले नीतीश ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए राज्यसभा चुनाव लड़ने के अपने फैसले की जानकारी दी है। नीतीश के बयान में चारों सदन में जाने की इच्छा का जिक्र उन अटकलों का जवाब है, जिसमें कहा जा रहा है कि भाजपा ने उन्हें सीएम का पद छोड़कर राज्यसभा जाने के लिए कहा है। नीतीश के इस फैसले का जेडीयू के कार्यकर्ता पटना में सीएम आवास के बाहर जुटकर विरोध कर रहे हैं, लेकिन नीतीश ने जब खुद ही कह दिया है कि राज्यसभा जाने की उनकी इच्छा थी, तो कार्यकर्ताओं का राजनीतिक ड्रामा जल्द ही ठंडा हो जाएगा।
बिहार में अब नए मुख्यमंत्री और नई सरकार के गठन की कवायद शुरू हो जाएगी। एनडीए दलों के बीच अगली सरकार के स्वरूप पर अनौपचारिक चर्चा तेज हो जाएगी। संभावना है कि नीतीश अप्रैल के पहले हफ्ते में मुख्यमंत्री का पद छोड़कर राज्यसभा के लिए प्रस्थान करें। उनके इस्तीफा से पहले भाजपा को अपने मुख्यमंत्री कैंडिडेट का नाम तय करना होगा। जेडीयू को सरकार में डिप्टी सीएम के 2 पद मिलने की चर्चा है, जिसमें एक पद नीतीश के बेटे निशांत कुमार को मिलना तय है। दूसरे डिप्टी सीएम पद के लिए जेडीयू से विजय कुमार चौधरी का नाम चल रहा है। बीजेपी नित्यानंद राय, सम्राट चौधरी जैसे बड़े और स्थापित हो चुके नेताओं को मुख्यमंत्री बनाती है या संजीव चौरसिया या किसी और लो-प्रोफाइल नेता को मुख्यमंत्री बनाकर चौंकाती है, यह देखना दिलचस्प होगा।
नीतीश कुमार भले राज्यसभा के रास्ते दिल्ली चले जाएं, लेकिन बिहार में सरकार पर उनका असर अभी बना रहेगा। उन्होंने अपने संदेश में इसका इशारा भी कर दिया है। नीतीश कुमार ने लिखा है- “मैं आपको पूरी ईमानदारी से विश्वास दिलाना चाहता हूं कि आपके साथ मेरा यह संबंध भविष्य में भी बना रहेगा एवं आपके साथ मिलकर एक विकसित बिहार बनाने का संकल्प पूर्ववत कायम रहेगा। जो नई सरकार बनेगी, उसको मेरा पूरा सहयोग एवं मार्गदर्शन रहेगा।”




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