एक झटके में पद नहीं छोड़ेंगे नीतीश कुमार, दो किस्तों में इस्तीफा देंगे सीएम! पहला रिजाइन कब?
Nitish Resignation Timeline: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक झटके में पद नहीं छोड़ेंगे। सूत्रों के मुताबिक वह दो किस्तों में मौजूदा जिम्मेवारी छोड़ेंगे। नीतीश सबसे पहले एमएलसी पद से इस्तीफा देंगे, सीएम पद से बाद में।
Nitish Resignation Timeline: जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के अध्यक्ष और राज्यसभा के निर्वाचित सांसद नीतीश कुमार एक झटके में बिहार के मुख्यमंत्री का पद नहीं छोड़ेंगे। जीतनराम मांझी का कार्यकाल छोड़ दें तो लगभग दो दशक से बिहार में सरकार चला रहे नीतीश बारी-बारी से दो किस्तों में मौजूदा जिम्मेवारी वाले पद छोड़ेंगे। सूत्रों का कहना है कि नीतीश सबसे पहले बिहार विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा देंगे। देश के कानून के मुताबिक नीतीश को 30 मार्च तक एमएलसी पद से इस्तीफा देना जरूरी है, नहीं तो उनकी राज्यसभा की सदस्यता शुरू होने से पहले स्वतः खत्म हो जाएगी। राज्यसभा में उनका कार्यकाल 10 अप्रैल से शुरू हो सकता है, इसलिए तब तक वो एमएलसी का पद छोड़कर भी बिहार के मुख्यमंत्री बने रह सकते हैं। नीतीश कुमार सीएम पद से अप्रैल के दूसरे हफ्ते में त्यागपत्र दे सकते हैं, जब उनके राज्यसभा सांसद पद की शपथ लेने की घड़ी नजदीक आएगी।
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 101, एक साथ सदस्यता निषेध नियम 1950 और लोक प्रतिनिधित्व कानून 1951 की धारा 70 के मुताबिक एक व्यक्ति एक समय में संसद और विधानसभा में से किसी एक का सदस्य ही रह सकता है। अगर राज्य विधानमंडल का कोई सदस्य सांसद चुन लिया जाता है तो उसे निर्वाचित घोषित होने के 14 दिनों के अंदर विधानमंडल में सदन के अध्यक्ष या सभापति को अपनी सदस्यता का इस्तीफा सौंप देना है। निर्धारित समय के अंदर इस्तीफा नहीं देने पर संसद की वह सीट स्वतः रिक्त हो जाएगी, जिसके लिए उसे चुना गया हो।
बिहार की 5 राज्यसभा सीटों के लिए 16 मार्च को नीतीश के साथ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा, जेडीयू के केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर और बिहार भाजपा के महासचिव शिवेश राम निर्वाचित घोषित हुए थे। इनमें नीतीश कुमार बिहार विधान परिषद और नितिन नवीन बिहार विधानसभा के मौजूदा सदस्य हैं। नीतीश और नितिन दोनों को 14 दिनों के अंदर यानी 30 मार्च तक क्रमशः विधान पार्षद और विधायक के पद से इस्तीफा देना जरूरी है।
बिहार की जिन 5 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव हुआ था, उसके मौजूदा पदधारक उपेंद्र कुशवाहा और रामनाथ ठाकुर फिर से चुने गए हैं। नीतीश कुमार, नितिन नवीन और शिवेश राम नए सदस्य के तौर पर जीते हैं, जो संसद के ऊपरी सदन में हरिवंश नारायण सिंह, प्रेमचंद गुप्ता और एडी सिंह की जगह लेंगे। निवर्तमान सदस्यों का कार्यकाल 9 अप्रैल तक है। इसलिए 10 अप्रैल या उसके बाद नए सदस्यों को राज्यसभा के सभापति शपथ दिला सकते हैं।
संभावना है कि अप्रैल के दूसरे हफ्ते में नीतीश कुमार की जगह लेने वाले नए मुख्यमंत्री के चयन के लिए भाजपा, जदयू के अलावा एनडीए के घटक दल लोजपा-आर, हम और रालोमो के विधायकों की बैठकें हो। पहले हर घटक दल अपने-अपने विधायक दल का नेता चुनेगा। सबसे अंत में एनडीए विधानमंडल दल की संयुक्त बैठक में गठबंधन का नेता चुना जाए, जो सीएम बनेगा। बिहार की सत्ता छोड़ रहे नीतीश चाहें तो राज्यसभा सांसद की शपथ लेने के लिए दिल्ली जाने से पहले मुख्यमंत्री की कुर्सी पर नए सीएम को बिठाकर जाएं या फिर सांसद बनकर पटना लौटने के बाद सत्ता हस्तांतरण की औपचारिकताओं को पूरा करें।
मधेपुरा से अररिया, पूर्णिया से कटिहार; सम्राट चौधरी के कंधे पर नीतीश कुमार का हाथ सीएम का कोई संकेत!
नीतीश क्या करेंगे, कब करेंगे, इसका अंदाजा तो नहीं लगाया जा सकता है। लेकिन, उनकी समृद्धि यात्रा के 26 मार्च को पटना में समापन के बाद नए सीएम की खोज तेज हो सकती है। भाजपा ने यह कहा भी है कि एनडीए में नए सीएम और अगली सरकार को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई है। बीजेपी के प्रवक्ता ने यह जरूर कहा है कि अगले सीएम का चुनाव घटक दलों के नेता मिलकर करेंगे। एनडीए और भाजपा के कुछ नेता यह कहते रहे हैं कि नीतीश कुमार जिसे चाहेंगे, अगला सीएम वही होगा।




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