नीतीश की खाली हुई सीट से विधान परिषद नहीं जाएंगे निशांत कुमार? MLC चुनाव में क्या है जेडीयू का प्लान
बिहार विधान परिषद की 10 सीटों पर चुनाव और उपचुनाव के लिए मतदान 18 जून को होगा। सम्राट सरकार में स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार को जेडीयू एमएलसी बना सकती है। हालांकि, उन्हें पूर्व सीएम नीतीश कुमार के इस्तीफे से खाली हुई सीट से विधान परिषद नहीं भेजा जाएगा, ऐसी चर्चा चल रही है।

बिहार विधान परिषद की 10 सीटों पर चुनाव की घोषणा हो चुकी है। इनमें 9 सीटों पर चुनाव और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस्तीफे से खाली हुई एक एमएलसी सीट पर उपचुनाव होगा। नीतीश के बेटे एवं सम्राट सरकार में स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार अभी किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं। ऐसे में आगामी चुनाव में उनके विधान परिषद जाने की पूरी संभावना है। जनता दल यूनाइटेड (JDU) में संभावित उम्मीदवारों पर मंथन भी शुरू हो गया है। सूत्रों के हवाले से बताया जा रहा है कि नीतीश के इस्तीफे से खाली हुई सीट से निशांत को विधान परिषद नहीं भेजा जाएगा, बल्कि किसी दूसरी सीट से उन्हें एमएलसी बनाया जाएगा। हालांकि, पार्टी ने अभी कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी है।
बिहार विधान परिषद की जिन 10 सीटों पर चुनाव और उपचुनाव होना है, वे विधानसभा कोटे की हैं। इनमें से 7 अभी सत्ताधारी गठबंधन एनडीए के पास हैं। जेडीयू सूत्रों के अनुसार, स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार को उन 9 सीटों में से एक से प्रत्याशी बनाया जाएगा, जिनका कार्यकाल जून 2026 में समाप्त हो रहा है। इससे निशांत एमएलसी चुने जाने के बाद अगले 6 सालों तक विधान परिषद के सदस्य रहेंगे।
दूसरी ओर, जेडीयू अध्यक्ष नीतीश कुमार के इस्तीफे से खाली हुई सीट से पार्टी किसी और नेता को सदन भेज सकती है। इस सीट का कार्यकाल 4 साल यानी 2030 तक का ही है। जेडीयू से निशांत के अलावा, ललन मंडल, भीष्म सहनी जैसे नेताओं को एमएलसी चुनाव में टिकट दिए जाने की चर्चा है। हालांकि, उम्मीदवारों की फाइनल लिस्ट पार्टी चीफ नीतीश कुमार की मुहर के बाद ही जारी की जाएगी।
जेडीयू के पास विधानसभा में 85 विधायक हैं। जिन 9 सीटों एमएलसी चुनाव होने हैं, उनमें से 3 पर नीतीश की पार्टी की जीत पक्की मानी जा रही है। वहीं, नीतीश की खाली हुई सीट पर भी जेडीयू से ही किसी के एमएलसी बनने के आसार नजर आ रहे हैं।
9 सीटों पर एनडीए की जीत पक्की?
विधानसभा में संख्याबल के अनुसार, आगामी एमएलसी चुनाव और उपचुनाव में 10 में से 9 सीटों पर एनडीए की जीत पक्की मानी जा रही है। जबकि राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेतृत्व वाले विपक्षी पार्टियों के महागठबंधन के खाते में एक सीट जा सकती है। विधानसभा में एनडीए के 200 से ज्यादा विधायक हैं, जबकि महागठबंधन के विधायकों की संख्या महज 35 है। एक एमएलसी सीट जीतने के लिए लगभग 25 विधायकों का समर्थन आवश्यक है।
कुशवाहा की पार्टी को मिल सकती है एक सीट
एनडीए में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की भारतीय जनता पार्टी भी कम से कम 3 सीटें अपने खाते में कर सकती है। भाजपा को अपने सहयोगियों को भी सेट करना होगा। एक सीट उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा को दी जा सकती है, जिस पर मंत्री दीपक प्रकाश को एमएलसी बनाया जा सकता है। निशांत की तरह दीपक भी किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं। मंत्री पद पर बने रहने के लिए उनका 6 महीने के भीतर विधायक या एमएलसी बनना जरूरी है।
भाजपा में नए चेहरों को मौका?
चर्चा है कि भाजपा अपने कोटे की एमएलसी सीटों पर नए चेहरों को मौका दे सकती है। जो सीटें जून में खाली हो रही हैं, उनमें अभी भाजपा के पास दो सीट हैं। इनमें से एक मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की है, जो पिछले बिहार चुनाव में तारापुर से विधायक बन गए हैं। दूसरी सीट संजय मयूख की है।
अटकलें चल रही हैं कि संजय मयूख को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के इस्तीफे से खाली हुई पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट से उपचुनाव में प्रत्याशी बनाया जा सकता है। नितिन ने राज्यसभा सांसद बनने के बाद विधायक पद छोड़ दिया था। बांकीपुर में उपचुनाव आगामी महीनों में होना है। विधान परिषद में संजय मयूख की जगह किसी नए नेता को मौका दिया जा सकता है। भाजपा अपने कोटे के उम्मीदवारों के चयन में जातिगत समीकरणों को भी ध्यान में रखेगी।
18 जून को वोटिंग
75 सीटों वाले बिहार विधान परिषद की 9 सीटों पर द्विवार्षिक चुनाव की घोषणा मंगलवार को निर्वाचन आयोग ने की। एमएलसी चुनाव की अधिसूचना 1 जून को जारी की जाएगी। 8 जून तक नामांकन होंगे। 18 जून को मतदान होगा। वहीं, नीतीश कुमार के इस्तीफे से खाली हुई एमएलसी सीट पर उपचुनाव के लिए वोटिंग की तारीख भी 18 जून ही है।
(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के आधार पर)




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