तेजस्वी यादव में दम है तो वोटिंग करा लें; विपक्ष को क्यों उकसा रही थी नीतीश कुमार की जेडीयू?
Samrat Choudhary Floor Test: बिहार विधानसभा में सीएम सम्राट चौधरी के बहुमत साबित करने से पहले जेडीयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने राजद नेता तेजस्वी यादव को उकसाया था कि हिम्मत है तो फ्लोर टेस्ट में मत विभाजन की मांग करें।

Samrat Choudhary Floor Test: जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के प्रवक्ता नीरज कुमार ने विधानसभा में सीएम सम्राट चौधरी के बहुमत साबित करने से पहले राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेता तेजस्वी यादव को उकसाया था कि हिम्मत है तो वो सदन में मत विभाजन की मांग करें। तेजस्वी या विपक्ष के किसी नेता ने सम्राट चौधरी के विश्वास मत प्रस्ताव पर वोटिंग की मांग नहीं की और स्पीकर प्रेम कुमार ने इसके ध्वनि मत से पारित होने की घोषणा कर दी। नीरज ने तेजस्वी को कायर और पदलोलुप बताते हुए दावा किया था कि अगर तेजस्वी विश्वास मत पर मतदान की मांग करेंगे तो राजद के अंदर का कलह ही बाहर आ जाएगा। मत विभाजन की इस मांग को राज्यसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस के 3 और राजद के 1 विधायकों के वोट नहीं देने से जोड़ा जा रहा है। नेता विपक्ष के पद के लिए विधायकों की कुल संख्या के 10 फीसदी एमएलए की जरूरत है।
जेडीयू एमएलसी नीरज कुमार ने कहा कि प्रचंड जनादेश के बाद भी उनकी पार्टी के अध्यक्ष नीतीश कुमार ने पद त्याग की मिसाल कायम कर दी। उनके पुत्र निशांत कुमार जो पार्टी के सर्वमान्य नेता हैं, उन्होंने भी पद त्याग कर दिया। उन्होंने कहा कि सात निश्चय 3 घोषणा भर नहीं है। नीरज ने कहा कि सम्राट का बहुमत साबित करना तय है। उन्होंने कहा कि तेजस्वी को जनता ने नकारा है। नीरज ने तेजस्वी को पदलोलुप बताते हुए ललकारा कि वो विश्वास मत के प्रस्ताव पर मत विभाजन की मांग करें। उन्होंने कहा कि करंट लग रहा है, लेकिन अकड़ कायम है। उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता का पद ना चला जाए, इसलिए तेजस्वी वोटिंग की मांग नहीं करेंगे।
जदयू नेता की इस मांग के पीछे की कहानी यह है कि विधानसभा में 25 विधायक वाली पार्टी राजद के नेता की हैसियत से तेजस्वी यादव को नेता विपक्ष का दर्जा मिला है। अगर राजद के विधायकों की संख्या सदन में मत विभाजन के दौरान 23 या उससे नीचे दिख जाती है तो उनके नेता विपक्ष के पद पर खतरा आ जाता। नेता विपक्ष के तौर पर तेजस्वी यादव को कैबिनेट मंत्री का दर्जा, उसी मुताबिक सुरक्षा और सुविधाएं प्राप्त है। विपक्ष के पास 41 विधायक हैं। एनडीए के 201 एमएलए हैं। बांकीपुर की 1 सीट नितिन नवीन के विधानसभा से इस्तीफा के बाद खाली है।
तेजस्वी यादव को जदयू के उकसावे का मतलब यह सामने लाना है कि राजद के विधायक एकजुट नहीं हैं और वोटिंग की नौबत आई तो एमएलए की संख्या 25 से इतना नीचे जा सकती है कि उनका नेता विपक्ष का दर्जा ही छिन जाए। राज्यसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस के 3 और राजद के 1 कुल 4 विधायकों के गच्चा देने से राजद कैंडिडेट एडी सिंह की हार हो गई थी। अगले महीने विधान परिषद की 9 सीटों के लिए द्विवार्षिक चुनाव होना है। विपक्ष और राजद के विधायकों की दलीय प्रतिबद्धता और एकजुटता की अगली परीक्षा उसमें होगी।




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