बिहार में नक्सलियों का नेटवर्क ध्वस्त, 13 खूंखार उग्रवादी गिरफ्तार; हथियारों का जखीरा बरामद
बिहार में नक्सलियों के खिलाफ पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। मार्च महीने में नवादा, जमुई और बांका समेत विभिन्न जिलों से 13 नक्सली गिरफ्तार किए गए। पुलिस ने एके-47, राइफल और विस्फोटक जैसे हथियारों का जखीरा बरामद किया है। गिरफ्तार उग्रवादियों में झारखंड के…

Bihar News: बिहार में नक्सलवाद अब अपने अंतिम दौर में है। राज्य में नक्सली पूरी तरह से पस्त हो चुके हैं और उनकी सक्रियता लगभग खत्म हो चुकी है। पुलिस और सुरक्षा बलों की निरंतर कार्रवाई के कारण नए और पुराने कांडों के आरोपी नक्सली तेजी से सलाखों के पीछे पहुँच रहे हैं। मार्च महीने की रिपोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि बिहार के नक्सल प्रभावित जिलों में उग्रवादियों की गतिविधि अब शून्य हो चुकी है। अकेले मार्च महीने में ही पुलिस ने 13 नक्सलियों को गिरफ्तार किया है।
भारी मात्रा में हथियार और विस्फोटक बरामद
पुलिस मुख्यालय द्वारा तैयार रिपोर्ट के अनुसार, गिरफ्तार किए गए नक्सलियों के पास से भारी मात्रा में अवैध हथियार, कारतूस और विस्फोटक बरामद किए गए हैं। पुलिस ने नवादा, गया, जमुई और मुंगेर जैसे जिलों में सघन सर्च ऑपरेशन चलाकर देसी पिस्टल, कट्टा, राइफल, एके-47 और डेटोनेटर जैसे घातक सामान जब्त किए हैं।
इन जिलों से हुई गिरफ्तारियां, दो झारखंड के भी
गिरफ्तार नक्सलियों में बिहार के अलग-अलग जिलों के साथ-साथ झारखंड के उग्रवादी भी शामिल हैं, जो सीमावर्ती इलाकों में छिपकर वारदातों को अंजाम देने की फिराक में थे। पुलिस ने इनके पास से हथियार बरामद किए है।
नवादा से गिरफ्तारी: झारखंड के कोडरमा निवासी पवन सिंह को नवादा से गिरफ्तार किया गया, जिसके पास से राइफल और कारतूस मिले। इसके अलावा नवादा से ही अजीत कुमार यादव (पास से एके-47 बरामद), दयानंद राजवंशी, मिथलेश राजवंशी और गिरिडीह के पंकज यादव को दबोचा गया।
जमुई और लखीसराय: जमुई से 2014 के कांड की आरोपी जानकी यादव को गिरफ्तार किया गया। वहीं, लखीसराय के पीरीबाजार थाने में दर्ज कांड के आरोपी गुहन कोड़ा उर्फ अनिल कोड़ा को लखीसराय से पकड़ा गया।
अन्य गिरफ्तारियां: बांका से अंगद कुमार सिंह, जहानाबाद से शत्रुघ्न राम और मुजफ्फरपुर के देवरिया से 2009 के हत्या मामले के आरोपी नवल किशोर राम की गिरफ्तारी हुई है।
पुराने कांडों का हिसाब और पुलिस की रणनीति
गिरफ्तार किए गए अधिकांश नक्सली पिछले 10 से 15 वर्षों से फरार चल रहे थे। इनमें मुजफ्फरपुर का नवल किशोर राम और बांका का अंगद कुमार सिंह जैसे नाम शामिल हैं, जिन पर 2009 और 2014 से गंभीर मामले दर्ज थे। पुलिस की इस सफलता के पीछे इंटेलिजेंस और सीमावर्ती राज्यों (विशेषकर झारखंड) के साथ बेहतर समन्वय माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि नक्सलियों के पास अब न तो स्थानीय समर्थन बचा है और न ही संसाधन, जिससे उनका नेटवर्क पूरी तरह ध्वस्त हो गया है।




साइन इन