दुष्कर्म में 10 साल बाद केस, 12 साल बाद उम्रकैद; बिहार की बेटी को दिल्ली की डॉक्टर ने ऐसे दिलाया इंसाफ!
जमुई की एक मासूम से 6 साल की उम्र में हुई दरिंदगी का इंसाफ 12 साल बाद हुआ। दिल्ली की डॉ. सुनीता ने 10 साल बाद इस राज को उजागर कर खुद FIR दर्ज कराई। कोर्ट ने डॉ. सुनीता की गवाही पर दोषी को उम्रकैद और ₹1 लाख जुर्माने की सजा सुनाई है।

Bihar News: राममनोहर लोहिया अस्पताल, नई दिल्ली की एक महिला डॉक्टर ने जमुई की बच्ची के साथ हुई दरिंदगी के लिए जैसे लड़ाईलड़ी और अंततः उसे न्याय दिलवाकर ही दम लिया, यह आज के दौर में भी मानवता और संवेदना की गहरी उपस्थिति का जीवंत प्रमाण है। इस मामले में जमुई न्यायालय के पोक्सो स्पेशल जज महेश्वर दुबे ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए दोषी को आजीवन कारावास और दोषी पर 1 लाख रुपये का जुर्माना की सजा सुनाई है।
पूरी घटना क्या है?
इस घटना की शुरुआत तब हुई जब 16 साल की एक किशोरी को उसकी मां इलाज के लिए दिल्ली के राम मनोहर लोहिया (RML) अस्पताल ले गई। किशोरी के मुंह और कान से लगातार खून निकल रहा था। जमुई और पटना में इलाज के बाद भी जब कोई सुधार नहीं हुआ, तो दिल्ली में साइकेट्रिस्ट डॉ. सुनीता कुमारी ने उसकी काउंसलिंग शुरू की। काउंसलिंग के दौरान किशोरी फूट-फूट कर रोने लगी और उसने वह राज खोला जिसने सबके होश उड़ा दिए।
किशोरी ने बताया कि जब वह महज 6 साल की थी, तब उसके गांव के एक पड़ोसी, जिसे वो मामा कहती थी उसने उसके साथ दरिंदगी की थी। वह इतनी छोटी थी कि विरोध भी नहीं कर पाई और बेहोश हो गई थी। उस घटना के बाद से उसकी शारीरिक और मानसिक स्थिति बिगड़ती गई और उसे मुंह-कान से खून गिरने की गंभीर बीमारी हो गई।
10 साल बाद ऑनलाइन FIR हुआ दर्ज
राम मनोहर लोहिया दिल्ली की डॉ. सुनीता ने इस मामले में जब किशोरी की मां को पुलिस केस करने को कहा, तो वे लोकलाज के डर से तैयार नहीं हुईं। ऐसे में डॉक्टर खुद आगे आईं और उन्होंने राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग को सूचित करते हुए ऑनलाइन एफआईआर दर्ज कराई। जमुई महिला थाने में 29 अप्रैल 2024 को प्राथमिकी संख्या 26/2024 दर्ज की गई और 30 अप्रैल को आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।
कोर्ट ने सुनाया ऐतिहासिक फैसला
ट्रायल के दौरान डॉ. सुनीता ने दिल्ली से ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अपनी महत्वपूर्ण गवाही दी, जबकि सरकार की ओर से विशेष लोक अभियोजक मनोज कुमार शर्मा ने अदालत में मजबूती से पक्ष रखा। मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने दोषी को ताउम्र जेल यानी आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही दोषी पर 1 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है, जिसे न भरने की स्थिति में उसे 1 साल की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। साथ ही, कोर्ट ने पीड़िता के भविष्य और पुनर्वास को ध्यान में रखते हुए उसे 7 लाख रुपये का मुआवजा देने का भी आदेश जारी किया है।




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