मुजफ्फरपुर झड़प में थानेदार राजा सिंह समेत पूरी टीम सस्पेंड, गोलीबारी में हुई थी जगतवीर राय की मौत
मुजफ्फरपुर जिले के चोरनिया गांव में पिछले सप्ताह पुलिस और ग्रामीणों के बीच हुई हिंसक झड़प के मामले में थानेदार सह दारोगा राजा सिंह समेत गायघाट थाने की पूरी छापेमारी टीम को सस्पेंड कर दिया गया है। इस झड़प में किसान जगतवीर राय की मौत हो गई थी।

बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के चोरनियां गांव में 17 मार्च की रात हुई पुलिस और ग्रामीणों की भिड़ंत के मामले में बड़ा ऐक्शन हुआ है। एसएसपी कांतेश कुमार मिश्रा ने छापेमारी टीम में शामिल दारोगा राजा सिंह समेत सभी 6 पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया है। बता दें कि पुलिस और ग्रामीणों के बीच हुई भिड़ंत में गोलीबारी से किसान जगतवीर राय की जान चली गई थी।
इसमें थानेदार सह दारोगा राजा सिंह, एसआई मनीष कुमार, पीटीसी सिपाही रंजन कुमार, महिला सिपाही चांदनी कुमारी, चालक हवलदार ओम प्रकाश और स्थानीय चौकीदार प्रह्लाद कुमार शामिल है। होमगार्ड अपरजीत कुमार और मनीष कुमार के खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई के लिए डीएम से अनुरोध किया गया है।
इस मामले ने सियासी तूल पकड़ा हुआ है। बुधवार को नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव भी चोरनियां गांव पहुंचे थे और कई बिंदुओं पर सवाल उठाया। इसके अगले दिन गुरुवार को छापेमारी दल में शामिल सभी पुलिसकर्मियों के निलंबन का निर्देश जारी कर दिया गया। उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी चलाई जाएगी। एसएसपी ने बताया कि 17 मार्च की रात चोरनियां में छापेमारी के दौरान आरोपी ने हल्ला कर ग्रामीणों को एकत्रित कर लिया था। इसके साथ ही पुलिस टीम पर पथराव, लाठी-डंडा एवं फायरिंग करते हुए हमला किया गया।
ग्रामीणों की भीड़ में फंस जाने एवं जानमाल की सुरक्षा के लिए तत्कालीन थानेदार राजा सिंह को बचाव में हवाई फायरिंग करनी पड़ी। इसके बाद किसी तरह जान बचाकर वहां से छापामारी दल के सदस्य निकले थे। इस दौरान ग्रामीण जगतवीर राय की मौत हो गई थी।
थानेदार ने नहीं लिया विवेकपूर्ण निर्णय
मुजफ्फरपुर एसएसपी ने गुरुवार को कहा कि ढाई साल पहले भी चोरनियां में तत्कालीन थानेदार सरुण कुमार मंडल एवं उनके साथ गए पुलिसकर्मियों को कार्य निष्पादन में ग्रामीणों की ओर से अवरोध पैदा किया गया था। पिछले दिनों थानेदार राजा सिंह ने क्षेत्र की पूरी जानकारी प्राप्त किए बिना ही अपर्याप्त बल के साथ चोरनियां में छापेमारी के लिए चले गए। यह अविवेकपूर्ण निर्णय था।
उन्होंने कहा कि स्थानीय चौकीदार ने भी छापेमारी से पहले गायघाट थानेदार को ढाई साल पहले हुए विरोध से अवगत नहीं कराया। इससे स्पष्ट है कि छापामारी दल ने संयमित रूप से विवेकपूर्ण कार्रवाई नहीं की है। पूरे मामले जांच के बाद एसडीपीओ पूर्वी-1 अलय वत्स ने छापेमारी दल के सदस्यों के खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई की अनुशंसा की है। इसलिए छापेमारी दल में शामिल आधा दर्जन पुलिसकर्मी व दो होमगार्ड पर कार्रवाई की गई।
दूसरी ओर, ग्रामीणों का आरोप है कि छापेमारी करने आई पुलिस टीम में मौजूद दारोगा राजा सिंह ने अपनी बंदूक निकालकर गोली चलाई थी। इस दौरान बीच-बचाव करने आए किसान जगतवीर राय के सीने में गोली लगने से मौत हो गई। इस घटना के बाद गांव में तनाव हो गया था। दो दिन भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती रही। पीड़ित परिवार और ग्रामीणों की ओर से पुलिस-प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन भी किया गया था। बाद में समझाइश पर शव का अंतिम संस्कार किया गया। फिलहाल इस मामले की जांच जारी है, जगतवीर राय की मौत वास्तव में किस वजह से हुई इसका खुलासा अभी नहीं किया गया है।
(रिपोर्ट- प्रमुख संवाददाता, मुजफ्फरपुर)




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