नालंदा के इन मुसलमानों ने 24 घंटे पहले ही मना ली ईद, क्या है 'सऊदी कनेक्शन'?
नालंदा जिले के सिलाव प्रखंड के कुछ गांवों में 24 घंटे पहले ही ईद-उल-फितर का त्योहार मना लिया गया। शुक्रवार को मस्जिदों में लोगों ने नमाज अदी की और एक-दूसरे को मुबारकबाद दी। एक दिन पहले ईद मनाने के पीछे यहां के मुसलमानों का ‘सऊदी कनेक्शन’ है।

Eid 2026: देश के अधिकांश हिस्सों में जहां ईद का चांद दिखने का इंतजार चल रहा है। वहीं, बिहार के नालंदा जिले में कुछ मुस्लिम परिवारों ने 24 घंटे पहले शुक्रवार को ही ईद-उल-फितर का त्योहार मना लिया। एक दिन पहले ईद मनाने वाले जिले के सिलाव प्रखंड के कई गांवों के मुसलमान शामिल हैं। इसके पीछे 'सऊदी कनेक्शन' है। दूसरी ओर, भारत में अधिकतर जगहों पर गुरुवार को ईद का चांद नजर नहीं आया, जिस कारण शुक्रवार को ईद नहीं मनाई गई। अब शनिवार 21 मार्च को ईद-उल-फितर का पर्व मनाया जाएगा।
सिलाव प्रखंड के बड़ाकर समेत कई गांव 24 घंटे पहले ईद मनाने को लेकर चर्चा में आ गए। यहां के मुस्लिम समाज के लोगों ने शुक्रवार को ईद-उल-फितर पूरी अकीदत और उल्लास के साथ मनाई। लोगों ने मस्जिद एवं ईदगाहों में नमाज अदा कर एक-दूसरे को गले लगाया और ईद की मुबारकबाद दी।
'सऊदी कनेक्शन' क्या है?
दरअसल, नालंदा जिले के सिलाव के कई गांवों के बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज के लोग खाड़ी देश सऊदी अरब में रहकर रोजगार करते हैं। सालों से यह परंपरा चली आ रही है कि सऊदी में चांद दिखने के आधार पर ही ये लोग अपने गांवों में भी ईद मनाते हैं। गुरुवार की शाम सऊदी अरब के कैलेंड के अनुसार चांद नजर आ गया, वहां शुक्रवार को ही ईद का त्योहार मनाने का ऐलान हो गया।
इसके बाद, इन गांवों के लोगों ने भी अपनी पुरानी रीत को निभाते हुए शुक्रवार को ही ईद मनाने का फैसला लिया। गुरुवार रात को सऊदी में चांद दिखने के बाद गांव के लोग खुशी से झूम उठे और एक-दूसरे को चांद दिखने की मुबारकबाद देते नजर आए।
नमाज के बाद मुल्क में अमन-चैन की दुआ
शुक्रवार की सुबह होते ही सिलाव के इन ग्रामीण इलाकों में उत्सव का माहौल दिखा। नए और पाकीजा लिबासों में सजे बच्चे और बड़े-बुजुर्ग सुबह-सवेरे ही ईदगाहों की ओर रुख करने लगे। नमाज खत्म होने के बाद सामूहिक दुआ मांगी गई और देश की खुशहाली एवं आपसी भाईचारे के लिए हाथ उठाए गए। ईदगाह के बाहर निकलते ही लोगों ने एक-दूसरे को 'ईद मुबारक' कहा और खुशियां साझा कीं।
सिवइयों की मिठास और बच्चों की ईदी
गांव की गलियों में शुक्रवार को सुबह से ही सिवइयों और लजीज पकवानों की खुशबू महकने लगी। बच्चों में ईदी को लेकर खासा उत्साह देखा गया। वहीं, बड़े-बुजुर्गों ने घर आए मेहमानों का स्वागत पारंपरिक अंदाज में किया। ग्रामीणों का कहना है कि उनके लिए त्योहार सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि सात समंदर पार बैठे अपनों की भावनाओं और परंपराओं का सम्मान है।




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