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अब मेडिकल कॉलेजों में CCTV से होगी निगरानी, गायब डॉक्टरों की PG मान्यता जाएगी

NMC ने मेडिकल कॉलेजों में पारदर्शिता और अनुशासन बढ़ाने के लिए कैमरों से निगरानी का फैसला लिया है। पीजी कोर्स की मान्यता बरकरार रखने के लिए डॉक्टरों की सुबह 9 से शाम 4 बजे तक उपस्थिति, 80% बेड ऑक्युपेंसी और डिजिटल डेटा रिकॉर्ड को अनिवार्य कर दिया गया है।

Mon, 6 April 2026 09:58 AMJayendra Pandey लाइव हिन्दुस्तान, मुजफ्फरपुर
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अब मेडिकल कॉलेजों में CCTV से होगी निगरानी, गायब डॉक्टरों की PG मान्यता जाएगी

Bihar News: देश के मेडिकल कॉलेजों में पीजी की पढ़ाई और डॉक्टरों की उपस्थिति को लेकर नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों की गतिविधियों और उनकी मौजूदगी पर सीसीटीवी कैमरों के जरिए नजर रखी जाएगी। NMC ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि डॉक्टर निर्धारित समय पर कॉलेज में मौजूद नहीं मिले, तो संबंधित विभाग की पीजी मान्यता रद्द कर दी जाएगी।

सुबह 9 से शाम 4 बजे तक रहना का आदेश

NMC के नए दिशा-निर्देशों के मुताबिक, मेडिकल कॉलेजों में सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक डॉक्टरों का रहना अनिवार्य है। मुजफ्फरपुर के श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज (SKMCH) समेत अन्य संस्थानों को इसके लिए सीसीटीवी नेटवर्क को दुरुस्त करने का निर्देश दिया गया है। कॉलेज की प्राचार्या प्रो. (डॉ.) कुमारी विभा ने बताया कि कॉलेज में कैमरे काम कर रहे हैं और जहां खराबी है, उन्हें तुरंत ठीक कराया जा रहा है।

मान्यता के लिए कड़े मानक तय किए गए

NMC ने पीजी कोर्स की मान्यता बरकरार रखने के लिए कड़े मानक तय किए हैं, जिसके तहत मेडिकल कॉलेजों में कम से कम 80 फीसदी बेड पर मरीजों का भर्ती होना अनिवार्य है और इससे कम ऑक्युपेंसी होने पर पीजी की पढ़ाई की अनुमति नहीं दी जाएगी। साथ ही, कुल बेडों में से 15 फीसदी बेड विशेष रूप से आईसीयू (ICU) में पीजी ट्रेनिंग के लिए आरक्षित रखने होंगे और मरीजों का पूरा रिकॉर्ड डिजिटल फॉर्मेट में तैयार करना होगा, जिसमें हर महीने होने वाले लैब टेस्ट और ओपीडी का पूरा ब्यौरा सीधे NMC को भेजना अनिवार्य होगा।

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नियमों के अनुसार, मेडिकल कॉलेज का भवन 'नेशनल बिल्डिंग कोड' के तहत बना होना चाहिए। साथ ही, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से एनओसी (NOC) मिलना भी अनिवार्य है। इसके साथ ही, पीजी छात्रों के लिए कॉलेज में एक अलग टीचिंग रूम, वाई-फाई से लैस डिजिटल लाइब्रेरी और एक इन-हाउस लैब होना जरूरी कर दिया गया है। साथ ही, NMC ने अस्पताल आने वाले सभी मरीजों की 'आभा आईडी' (ABHA ID) बनाने का भी निर्देश दिया है।

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