नेहरू कैबिनेट में एक इस्तीफा और फिर बना जनसंघ, जिससे निकली भाजपा; क्या है कहानी
भाजपा के पहले अध्यक्ष अटल बिहारी वाजपेयी बने थे, जिनका कार्यकाल 1986 तक रहा था। यह भाजपा इसलिए अस्तित्व में आई थी क्योंकि जनता पार्टी में कहा गया था कि जो हमारा सदस्य होगा, वह आरएसएस से ताल्लुक नहीं रखेगा। जनता पार्टी का कहना था कि हम दोहरी सदस्यता को नहीं मानेंगे।

देश की सत्ता पर काबिज भारतीय जनता पार्टी का आज स्थापना दिवस है। 6 अप्रैल, 1980 को भाजपा का गठन हुआ था और उससे पहले जनसंघ अस्तित्व में था, जो आरएसएस की राजनीतिक शाखा कहा जाता था। उसी जनसंघ का विलय 1977 में जनता पार्टी में हो गया था और फिर 1980 में जब मतभेद बहुत बढ़े तो जनता पार्टी से जनसंघ बाहर निकल आया। इस बार उसने नया अवतार लिया और नाम रखा गया भारतीय जनता पार्टी। इस भाजपा के पहले अध्यक्ष अटल बिहारी वाजपेयी बने थे, जिनका कार्यकाल 1986 तक रहा था। यह भाजपा इसलिए अस्तित्व में आई थी क्योंकि जनता पार्टी में कहा गया था कि जो हमारा सदस्य होगा, वह आरएसएस से ताल्लुक नहीं रखेगा।
जनता पार्टी का कहना था कि हम दोहरी सदस्यता को नहीं मानेंगे। इसी के बाद जनसंघ के लोग उससे बाहर निकल आए और भाजपा बना ली। हालांकि भाजपा कुछ अलग नहीं थी बल्कि जनसंघ का ही नया रूप और नया नाम थी। जनसंघ के गठन की कहानी भी दिलचस्प है और इसका रास्ता नेहरू कैबिनेट से श्यामा प्रसाद मुखर्जी के इस्तीफे से निकला था। जम्मू-कश्मीर के विलय में विवाद, आर्टिकल 370, अलग संविधान और अलग झंडे को लेकर विरोध करते हुए श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने जवाहर लाल नेहरू की कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया था। वह उनकी सरकार में श्रम मंत्री थे। उन्होंने इस्तीफा दिया तो फिर वह नए राजनीतिक विकल्प को खड़ा करने की कोशिश में जुट गए।
इस्तीफे के बाद गुरुजी से क्यों मिले थे श्यामा प्रसाद मुखर्जी
इसके अलावा महात्मा गांधी की हत्या के बाद प्रतिबंध का सामना कर चुके आरएसएस को भी एक राजनीतिक ताकत की जरूरत थी। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने आरएसएस के तत्कालीन सरसंघचालक श्री गुरुजी से मुलाकात की थी और फिर जनसंघ की स्थापना को लेकर बात हुई। 21 अक्तूबर, 1951 को भारतीय जनसंघ की औपचारिक स्थापना हुई थी और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ही पहले अध्यक्ष बने। इसका गठन दिल्ली के ही राघोमल माध्यमिक विद्यालय में हुआ था। इसके बाद पार्टी का झंडा तय हुआ, जिसका रंग भगवा था। इसके अलावा दीपक चुनाव चिह्न मिला। 1952 के पहले आम चुनाव में भी जनसंघ ने हिस्सा लिया था।

पहले चुनाव में ही तीन सीटें जीता था जनसंघ, बना था गठबंधन
पहले ही चुनाव में जनसंघ ने उम्मीद से बढ़कर सफलता पाई थी। देश भर में उसे 3.06 फीसदी वोट मिले थे और तीन सांसद उसके जीते थे। इन सांसदों में से एक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ही थे। इसके बाद जनसंघ को राष्ट्रीय दल का दर्जा मिल गया। यही नहीं जनसंघ ने अपनी शुरुआती राजनीति से ही गठबंधन बनाने शुरू कर दिए थे। पहली बार जब संसद में जनसंघ के तीन सांसद पहुंचे तो अकाली दल, गणतंत्र परिषद, हिंदू महासभा, कॉमनवील पार्टी, द्रविड़ कड़गम, लोक सेवक संघ जैसे दलों के साथ गठजोड़ हुआ और इसका नाम रखा गया था- नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट। इसमें कुल 38 सांसद थे और यह संसद में मुख्य विपक्षी धड़ा बना। इसके अलावा श्यामा प्रसाद मुखर्जी अनौपचारिक तौर पर देश के पहले नेता विपक्ष बने थे।




साइन इन