SIR के बाद 'जिंदा' हो गए कई मृत मतदाता; मुजफ्फरपुर में दर्जन भर नाम, सवालों में ड्राफ्ट वोटर लिस्ट
बिहार गहन पुनरीक्षण के बाद कई मृत मतदाता 'जिंदा' हो गए हैं। मुजफ्फरपुर में ऐसे दर्जनभर नाम सामने आए हैं। जो मतृ हो चुके हैं, लेकिन ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में उनको जीवित दिखाया गया है। जिसके बाद से ड्रॉफ्ट मतदाता सूची में गड़बड़ी का आरोप लगा है। इसकी वजह बीएलओ के स्तर पर हुई लापरवाही बताई जा रही है।

गहन पुनरीक्षण के बाद कई मृत मतदाता भी ‘जिंदा’ हो गए हैं। ऐसा मुजफ्फरपुर नगर विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में हुआ है। नगर निगम के वार्ड संख्या 27 अंतर्गत शिवपुरी मोहल्ले से जुड़े अब तक करीब दर्जनभर ऐसे नाम सामने आए हैं, जिनकी मौत हो चुकी है। हालांकि, एसआईआर के बाद जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची में उनकी उपस्थिति बरकरार है। इनमें वार्ड 27 के पार्षद अजय कुमार ओझा के दिवंगत भाई नरेश ओझा का नाम भी शामिल है। पार्षद के मुताबिक इसी साल उनकी मृत्यु हुई है। जबकि एसआईआर में उन्हें ‘जीवित’ बताया गया है।
करीब नौ साल पहले पार्षद के पड़ोसी विपिन बिहारी श्रीवास्तव की मृत्यु हो गई पर मतदाता सूची में नाम बरकरार रखा गया है। बीते सात वर्षों में एक ही परिवार के तीन सदस्यों सोनिया शरण (2018), शांता शरण (2019) और मनीत मंतेश (2025) की मृत्यु होने के बाद भी वे मतदाता बने हुए हैं। अरविंद कुमार शाही व उनके भाई के अलावा कृष्णदेव ठाकुर और श्यामनंदन सिंह की मृत्यु के लंबे समय बीतने के बाद भी आयोग की मतदाता सूची में उनकी मौजूदगी बनी हुई है।
दरअसल, बूथ नंबर 136 के बिखंडित होने पर दो बूथ (संख्या 183 व 184) बने हैं। इनमें उक्त सभी मामले बूथ संख्या 183 से जुड़े हैं। इसको लेकर लोग ताजा पुनरीक्षण प्रक्रिया में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए बीएलओ से लेकर जन प्रतिनिधियों तक के यहां शिकायत दर्ज करा रहे हैं।
यह तो महज बानगी है। ऐसे मामलों की लंबी फेहरिस्त हो सकती है, जिसमें ‘मृत’ लोगों के नाम मतदाता सूची में मौजूद हैं। यह दावा करते हुए वार्ड पार्षद अजय ओझा ने कहा कि फोटोयुक्त ताजा मतदाता सूची मिल जाए तो पूरी सच्चाई सामने आ जाएगी। बीएलओ के स्तर पर हुई लापरवाही के कारण यह गड़बड़ी हुई है। करीब तीन साल से बीएलओ रहने के बावजूद घर-घर संपर्क नहीं करने या अन्य स्तरों पर खामी के कारण मृत लोगों के नाम मतदाता सूची में बरकरार हैं।




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